मेघालय के सुदूरवर्ती इलाकों में प्राथमिक शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए पश्चिम जयंतिया हिल्स में पाडु बह गवर्नमेंट लोअर प्राइमरी स्कूल को सात कमरों का एक नया आधुनिक भवन सौंपा गया है। राज्य के शिक्षा मंत्री लखमेन रिम्बुई ने डीईएसएल योजना 2023–26 के अंतर्गत तैयार किए गए इस नए शैक्षणिक परिसर का विधिवत उद्घाटन किया। वर्ष 1954 में स्थापित इस ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान को नया भवन मिलने से यहां नामांकित बच्चों को मौसम की मार से राहत मिलेगी और पढ़ाई के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध होगा। उद्घाटन समारोह के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, अभिभावकों और गांव के गणमान्य नागरिकों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
ग्रामीण अंचलों में मजबूत हो रहा शिक्षा का आधारभूत ढांचा
समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री लखमेन रिम्बुई ने कहा कि मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश भर में बुनियादी शैक्षणिक ढांचे के विस्तार और हर वर्ग के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने आमलारेम उप-मंडल में शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने के लिए उठाए जा रहे कदमों का ब्योरा दिया। मंत्री ने बताया कि उच्च माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों को अलग-अलग संकायों की सुविधा देने की योजना पर तेजी से काम हो रहा है। इसके साथ ही सुदूर ग्रामीण इलाकों के छात्रों को घर के पास ही बेहतर अवसर मिल सकें, इसके लिए आरएमएसए योजना के तहत श्केनपिर्सित, तरांगब्लांग और उमलदखुर में शैक्षणिक व्यवस्था को सशक्त बनाया गया है, जबकि जोंग यू चेन और खारकाना में भी माध्यमिक शिक्षा के सुनियोजित विस्तार की तैयारी है।
शिक्षा मंत्री ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) के तहत मिलने वाले अवसरों के प्रसार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों को केवल स्कूल तक लाने के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी निरंतर पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, स्कूल यूनिफॉर्म, कंपोजिट ग्रांट और छात्रवृत्तियां उपलब्ध करा रही है। इन पहलों का सीधा मकसद यह है कि आर्थिक तंगी की वजह से किसी भी बच्चे की शिक्षा अधूरी न छूटे।
कौशल विकास और आत्मनिर्भरता पर सरकार का जोर
शिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में इस बात को रेखांकित किया कि पढ़ाई केवल परीक्षा पास करने या अकादमिक डिग्रियां हासिल करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है जो छात्रों में आत्मविश्वास जगाए और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के व्यावहारिक कौशल प्रदान करे। राज्य सरकार की कम्युनिटी इंटीग्रेटेड स्किल्स लर्निंग पहल का संदर्भ देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी सहज प्रतिभा को पहचानें और ऐसे हुनर सीखें जो उनके स्थानीय समुदाय और परिवेश से मेल खाते हों।
लखमेन रिम्बुई ने कृषि, पर्यटन, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को आजीविका व उद्यमिता के बेहतरीन अवसर बताए। उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे पारंपरिक सरकारी नौकरियों के पीछे भागने के बजाय अपनी शिक्षा, प्रतिभा और हुनर के दम पर उद्यम शुरू करें। इस सिलसिले में उन्होंने युवाओं के कौशल संवर्धन और आजीविका के नए रास्ते खोलने के लिए शुरू की गई सीएम-एलीवेट और हैलो मेघालय जैसी सरकारी योजनाओं का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। इसके अलावा शिक्षकों से लगातार शिक्षण विधियों को आधुनिक बनाने की अपील करते हुए उन्होंने मेघालय टीचर ट्रेनिंग एकेडमी के माध्यम से चलाए जा रहे व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों का हवाला दिया। उन्होंने अभिभावकों को भी बच्चों की पढ़ाई में नियमित सक्रिय भागीदारी निभाने की सलाह दी और याद दिलाया कि सीखने की नींव घर से ही शुरू होती है।
मिशनरी स्कूल से सरकारी संस्थान बनने का सफर
इससे पहले स्कूल की मुख्य अध्यापिका राममोन मुखिम ने विद्यालय के सात दशकों के गौरवशाली सफर पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि इस संस्थान की नींव 1954 में वेल्श प्रेस्बिटेरियन मिशनरियों द्वारा रखी गई थी और शुरुआती दौर में यह बेसिक स्कूल के रूप में संचालित होता था। इसके बाद विद्यालय का प्रशासनिक नियंत्रण जयंतिया हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के अधीन आया और अंततः 1994 में राज्य सरकार ने इसका पूरी तरह अधिग्रहण कर लिया। वर्तमान में इस लोअर प्राइमरी स्कूल में 4 शिक्षक कार्यरत हैं और 95 विद्यार्थी नामांकित हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्य अध्यापिका ने स्कूल की आगे की जरूरतों को रेखांकित करते हुए एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें एक अतिरिक्त कक्षा, बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय तथा एक खेल मैदान के विकास की मांग शामिल है।
स्कूल के सुनहरे इतिहास को याद करते हुए 37 वर्षों तक यहां अपनी सेवाएं देने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक एफ्राम पोहलोंग भावुक हो गए। उन्होंने शुरुआती दौर की चुनौतियों को याद करते हुए बताया कि उस समय कमरों की बेहद कमी थी और कक्षाओं के बीच विभाजन के लिए चादरों का पर्दा लगाया जाता था। एक समय ऐसा भी था जब बहुत कम मानदेय मिलता था, लेकिन बच्चों के भविष्य और पेशे के प्रति जिम्मेदारी के भाव ने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया। उन्होंने गर्व से कहा कि इस छोटे से प्राथमिक विद्यालय ने समाज को कई डॉक्टर, इंजीनियर, उद्यमी और जिम्मेदार नागरिक दिए हैं।
पुराने दिनों की कठिनाइयां और बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
इसी विद्यालय की पूर्व छात्रा और वर्तमान में अपर प्राइमरी स्कूल की मुख्य अध्यापिका ल्यूलिनैस पोहश्ना ने भी अपने बचपन की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि पुराने भवन में भारी बारिश के दौरान पानी टपकने और अन्य दिक्कतों के बीच बच्चे और शिक्षक पढ़ाई करते थे। उन्होंने नए सात कमरों के भवन के निर्माण के लिए शिक्षा मंत्री का आभार जताया और छात्रों में नैतिक मूल्यों, विश्वास और जिम्मेदार नागरिकता के विकास पर जोर दिया।
आमलारेम की एसडीएसईओ डब्ल्यू. नोंगहुलू ने स्कूल के शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों में अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी पैदा करना है। उन्होंने स्कूल को समग्र शिक्षा का मंदिर बताते हुए ग्रामीणों से नए भवन की समुचित देखरेख करने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने माता-पिता से बच्चों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर नजर रखने का सुझाव दिया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए वार वेस्ट के एमडीसी हेट पोहथमी ने विज्ञान, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में शिक्षकों और छात्रों को लगातार खुद को अपग्रेड करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में कक्षा 1 और 2 के नन्हें बच्चों ने विशेष नृत्य और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। अंत में टी. पोहथमी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ।



















