मेघालय में राज्य पर्यटन विभाग और खासी हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (KHADC) के बीच एक बड़ा कानूनी विवाद पैदा हो गया है। लबान पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई एक आधिकारिक शिकायत में पर्यटन विभाग ने परिषद के प्रवर्तन कर्मचारियों पर मदान लबान स्थित शिलोंग पीक रोपवे प्रोजेक्ट के निर्माण शिविर में अवैध रूप से घुसने, उसे सील करने और परियोजना से जुड़े सामान को ज़ब्त करने का आरोप लगाते हुए आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करने की मांग की है।
मदान लबान में हुई घटना का पूरा विवरण
यह विवादित घटना मंगलवार को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच मदान लबान स्थित रोपवे परियोजना के लोअर टर्मिनल पॉइंट साइट पर हुई। राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार, KHADC की प्रवर्तन शाखा की एक टीम बिना किसी पूर्व सूचना, वैधानिक अधिकार या राज्य सरकार की अनुमति के शिविर में दाखिल हुई। यह स्थान एक अस्थायी परिचालन आधार और लॉजिस्टिक्स कैंप के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसे मुख्य ठेकेदार मेसर्स KEC-TCL (JV) ने स्थापित किया था। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस स्थान पर कोई स्थायी निर्माण कार्य नहीं चल रहा था, बल्कि यह राज्य प्रशासन के सीधे नियंत्रण में चलने वाली एक उच्च-प्राथमिकता वाली जनहित पर्यटन परियोजना का प्रशासनिक केंद्र था।
पर्यटन विभाग का पत्र और नामजद अधिकारी
पर्यटन निदेशक ने मेघालय सरकार और मेघालय रोपवे डेवलपमेंट अथॉरिटी (MRDA) की ओर से 27 अक्टूबर को लबान पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को एक लिखित पत्र भेजा। इस शिकायत में KHADC के प्रवर्तन विंग के निरीक्षक कोर्डोर सिनरेम और उनके साथ आए अन्य अज्ञात कर्मचारियों को नामजद किया गया है। राज्य प्रशासन ने इस टीम पर सरकारी संपत्ति पर अवैध प्रवेश, परियोजना के सामान की अनाधिकृत ज़ब्ती और राज्य की इंफ्रास्ट्रक्चर साइट को गैर-कानूनी ढंग से बंद करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
ज़ब्त किए गए उपकरण और जबरन हस्ताक्षर कराने का आरोप
छापेमारी के दौरान परिषद की टीम ने साइट पर मौजूद कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया और जिला परिषद के व्यापार नियमों के तहत एक ज़ब्ती सूची तैयार की। टीम ने फ्रांस की पोमा कंपनी से आयातित महंगे रोपवे उपकरणों के अलावा कार्यालय के अन्य सामान को ज़ब्त कर लिया। ज़ब्त की गई वस्तुओं में 4 गोदरेज यूनिट्स, 11 कुर्सियां, 8 मेजें, डेस्कटॉप कंप्यूटर, एक ज़ेरॉक्स मशीन, CCTV उपकरण और एक DG सेट शामिल हैं। इसके बाद टीम ने कार्यालय के दरवाजों पर ताले और कपड़े की सील लगा दी, जिससे ठेकेदार कंपनी को अपने ही कैंप से बेदखल होना पड़ा। शिकायत में यह भी कहा गया है कि परियोजना के साइट मैनेजर जय प्रकाश सिंह और तारकेश्वर सिंह से जबरन ज़िमा-नामा पर हस्ताक्षर करवाए गए।
कानूनी नियम और अधिकारों के दुरुपयोग पर तर्क
पर्यटन विभाग ने KHADC की इस कार्रवाई को प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग करार दिया है। परिषद ने इस कार्रवाई के लिए खासी हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (ट्रेडिंग बाय नॉन-ट्राइबल्स) रेगुलेशन, 1954 की धारा 3 और 7A का हवाला दिया था। हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि किसी राज्य-स्वीकृत सार्वजनिक परियोजना के लिए अस्थायी कैंप स्थापित करना गैर-आदिवासी संस्था द्वारा व्यावसायिक व्यापार या खुदरा बिक्री की श्रेणी में नहीं आता। विभाग ने तर्क दिया है कि परिसर को सील करके सरकारी कर्मचारियों और स्वीकृत ठेकेदारों को उनके सार्वजनिक कल्याण कार्य से रोका गया है, जो आपराधिक अतिचार, गलत तरीके से रोकने और जबरन वसूली की श्रेणी में आता है।
पुलिस प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें
पर्यटन स्थल पर काम दोबारा शुरू करने के लिए पर्यटन विभाग ने त्वरित पुलिस कार्रवाई की मांग की है। पुलिस से कानून की प्रासंगिक धाराओं के तहत FIR दर्ज करने के साथ-साथ साइट के दरवाजों से अवैध सील हटाने और ज़ब्त किए गए सभी सामान को तुरंत वापस दिलाने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा, भविष्य में ऐसी किसी भी अनधिकृत बाधा को रोकने के लिए मदान लबान स्थित कैंप में पर्याप्त पुलिस सुरक्षा प्रदान करने की मांग भी की गई है।


















