शिलोंग में दो पड़ोसी राज्यों के बीच पर्यटकों को लाने-ले जाने वाले वाहनों की आवाजाही को लेकर उपजा गतिरोध रविवार को भी बना रहा। ऑल खासी मेघालय टूरिस्ट टैक्सी एसोसिएशन से जुड़े प्रदर्शनकारी उमियम में डटे हुए हैं और उन्होंने अपना विरोध प्रदर्शन वापस नहीं लिया है। यह स्थिति तब है जब दोनों राज्यों की सरकारों के बीच एक सहमति बन चुकी है जिसके तहत मेघालय में रजिस्टर्ड गाड़ियों को असम में प्रवेश की अनुमति दी गई है।
चालकों और ऑपरेटरों का यह संगठन लगातार असम की उन tourist गाड़ियों को रोक रहा है जो मेघालय की सीमा में प्रवेश कर रही हैं। एसोसिएशन का कहना है कि स्थानीय टैक्सी चालकों की समस्याओं और चिंताओं पर राज्य सरकार ने अब तक कोई ठोस ध्यान नहीं दिया है और न ही उनकी मांगों को ठीक से सुलझाया गया है।
सीधी बातचीत न होने से बढ़ा रोष
प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि सरकार ने असम के अधिकारियों और हितधारकों के साथ बैठकें जरूर कीं और वाहनों के सुचारू संचालन का भरोसा दिया, लेकिन मैदान पर प्रदर्शन कर रहे स्थानीय टैक्सी चालकों की सुध नहीं ली। उनके साथ किसी तरह की आधिकारिक चर्चा करने से प्रशासनिक स्तर पर परहेज किया गया, जिससे चालकों में नाराजगी और बढ़ गई।
नाराजगी की एक बड़ी वजह सरकार का रवैया भी बताया गया। एसोसिएशन ने उप मुख्यमंत्री स्निआवभलांग धर के काफिले के उस वाकये पर सवाल उठाया जब उनका वाहन उस क्षेत्र से गुजरा लेकिन उन्होंने वहां धरने पर बैठे ड्राइवरों से मिलने या उनकी बात सुनने के लिए रुकना जरूरी नहीं समझा। स्थानीय चालकों का मानना है कि इस तरह की अनदेखी से यह पूरा विवाद और गहरा गया है।
सचिवालय में बुलाई गई उच्चस्तरीय बैठक
इस पूरे मामले को किसी तरह शांत करने और समाधान निकालने के लिए मेघालय सरकार ने पहल की है। प्रशासन ने विभिन्न टूरिस्ट टैक्सी एसोसिएशनों और यूनियनों के प्रतिनिधियों को रविवार को दोपहर 1 बजे राज्य सचिवालय में एक अहम बैठक के लिए बुलाया है।
इस बैठक में टैक्सी ऑपरेटरों की तमाम शिकायतों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। साथ ही उमियम में चल रहे धरने को समाप्त कराने की दिशा में भी ठोस प्रयास किए जाएंगे। इस बात पर भी सभी की नजरें टिकी हैं कि क्या इस चर्चा से दोनों राज्यों के बीच tourist वाहनों के आवाजाही के इस पुराने विवाद का कोई स्थाई हल निकल पाता है या नहीं।





















