भूमध्य सागर के पूर्वी तटीय हिस्से में पनपे विशालकाय माइक्रोएल्गी के जमावड़े ने इज़राइल की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को अप्रत्याशित संकट में डाल दिया। समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाले देश के छह प्रमुख डिसेलिनेशन प्लांटों में से पांच के फिल्टर इस शैवाल के कारण जाम हो गए। इसके चलते अगस्त के आखिर में राजधानी यरूशलम के कई इलाकों में पानी के टैंकरों के जरिए वितरण की नौबत आ गई। हालांकि अब प्रभावित संयंत्रों को दोबारा चालू कर दिया गया है, लेकिन वे अभी केवल 50 प्रतिशत तक की क्षमता पर ही काम कर रहे हैं। लगभग तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी पानी में यह माइक्रोएल्गी लगातार बना हुआ है, जिससे भविष्य में पानी की सुरक्षा को लेकर वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
समुद्र में 100 किलोमीटर तक फैला माइक्रोएल्गी का जाल
विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, यह माइक्रोएल्गी अपने चरम स्तर पर लगभग 100 किलोमीटर लंबा और 7 किलोमीटर चौड़ा हो चुका था। पानी के ऊपर सूक्ष्मजीवों की यह परत इतनी घनी थी कि उसने समुद्री जल शुद्धिकरण इकाइयों के भारी-भरकम फिल्टरों को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। इज़राइल की राष्ट्रीय जल कंपनी मेकोरोट के प्रवक्ता लिओर गुटमैन ने इसे सूक्ष्मजीवों का एक भारी गलीचा करार दिया। यह शैवाल मुख्य रूप से नील डेल्टा के समुद्री क्षेत्र से उत्पन्न हुआ माना जा रहा है। पूर्वी भूमध्य सागर में बहने वाली उत्तरी समुद्री धाराएं इसे बहाकर सीधे गाजा और इज़राइल के तटों तक ले आईं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमध्य सागर में सामान्य से अधिक दर्ज किया गया उच्च तापमान इस शैवाल के तेजी से पनपने की सबसे बड़ी वजह बना। पर्याप्त धूप और पानी में घुले पोषक तत्वों को सोखकर यह बहुत कम समय में विशालकाय रूप ले चुका था। बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी के जकरबर्ग इंस्टीट्यूट फॉर वॉटर रिसर्च के प्रोफेसर ईदो बार-ज़ीव ने इस पूरे घटनाक्रम को एक अप्रत्याशित मेगा इवेंट बताया। प्रोफेसर बार-ज़ीव ने स्पष्ट किया कि वे पिछले लगभग 20 वर्षों से समुद्र के पानी के नमूने लेने के शोध कार्य से जुड़े हैं, लेकिन ऐसा दृश्य उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। सामान्य परिस्थितियों में इस प्रकार के शैवाल कुछ दिनों या अधिकतम एक सप्ताह में बिखर जाते हैं, परंतु यह जमावड़ा लंबे समय से समुद्र में टिका हुआ है।
सीवेज संकट और युद्ध का पर्यावरणीय प्रभाव
पर्यावरण विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का कहना है कि हमास के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष के दौरान गाजा के सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्रों का नष्ट होना भी इस पर्यावरणीय तबाही को बढ़ावा देने वाला कारक हो सकता है। पर्यावरण समूह इकोपीस मिडिल ईस्ट के गिदोन ब्रोमबर्ग ने इस संबंध में बताया कि जब पानी में बड़ी मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं, तो शैवाल की वृद्धि दर अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाती है, और सीवेज असल में शैवाल के लिए प्राथमिक पोषण का काम करता है।
गिदोन ब्रोमबर्ग के अनुसार, इस युद्ध से पहले भी इज़राइली प्रतिबंधों के कारण गाजा में सीवेज के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना संभव नहीं हो पा रहा था। गाजा में आधुनिक सीवर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार करने और संचालित करने के लिए आवश्यक कुछ निर्माण सामग्रियों, विशेषकर सीमेंट जैसी वस्तुओं को इज़राइली सेना द्वारा दोहरे उपयोग वाली सामग्री के तौर पर वर्गीकृत किया गया था, जिसका इस्तेमाल हथियार या सैन्य ढांचे बनाने में होने की आशंका जताई जाती थी। वर्तमान स्थिति यह है कि गाजा की अधिकांश अपशिष्ट जल प्रणालियों के ध्वस्त हो जाने के कारण प्रतिदिन लगभग 40,000 क्यूबिक मीटर अनुपचारित सीवेज सीधे समुद्र में बह रहा है।
इज़राइल की पेयजल आपूर्ति और गाजा की जमीनी हकीकत
इज़राइल में समुद्र के पानी को मीठा बनाने वाले छह मुख्य संयंत्र देश की कुल पेयजल आपूर्ति का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा तैयार करते हैं। हालांकि इस तकनीकी खराबी के दौरान सामान्य नागरिकों पर इसका बड़ा असर नहीं देखा गया। मेकोरोट के प्रवक्ता लिओर गुटमैन ने बताया कि सिंचाई के लिए रीसायकल किए गए पानी का उपयोग करने वाले अधिकांश किसानों को किल्लत नहीं झेलनी पड़ी और देश के 99 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ताओं की नियमित जलापूर्ति भी सामान्य बनी रही।
इसके ठीक विपरीत, गाजा में आम लोगों की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। सहायता संगठन डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली बमबारी के कारण गाजा पट्टी का 90 प्रतिशत जल और स्वच्छता बुनियादी ढांचा पूरी तरह तबाह हो चुका है। वहां के नागरिक हर दिन पीने के साफ पानी की एक-एक बूंद के लिए भारी जद्दोजहद कर रहे हैं, जबकि सीमा के दूसरी ओर इज़राइल की मजबूत जल प्रणालियों के कारण वहां के आम नागरिकों को इस समुद्री संकट का प्रत्यक्ष आभास तक नहीं हुआ।
डिसेलिनेशन तकनीक पर निर्भरता और भविष्य की चेतावनी
बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के मिले-जुले असर से निपटने के लिए इज़राइल ने अपनी तटीय सीमा पर बड़े पैमाने पर डिसेलिनेशन संयंत्र स्थापित किए हैं और वह इस तकनीक का विश्व स्तर पर अगुआ बन चुका है। इज़राइली कंपनियां दुनिया भर के कई देशों में ऐसे संयंत्रों का डिजाइन और निर्माण करती हैं। लेकिन इस सूक्ष्म शैवाल द्वारा देश के लगभग पूरे जल शोधन नेटवर्क को पंगु बना दिए जाने की घटना ने विशेषज्ञों को गहरी चिंता में डाल दिया है। गिदोन ब्रोमबर्ग ने जोर देकर कहा कि यह घटना जल क्षेत्र से जुड़े हर विशेषज्ञ और विशेषकर पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र के लिए एक वेक-अप कॉल है, जहां जल सुरक्षा हासिल करने के लिए डिसेलिनेशन तकनीक को सबसे बड़े समाधान के रूप में देखा जा रहा है।



















