दृश्यम 3 रिव्यू (2026): सस्पेंस और कोर्टरूम ड्रामा की जबर्दस्त वापसीमेरठ के चर्चित हत्याकांड में दोषी मुस्कान और साहिल को सताया मौत की सजा का खौफ, कारागार में रो पड़े दोनोंअमित शाह की मौजूदगी में महानदी जल बंटवारे पर मंथन, विष्णु देव साय और मोहन चरण माझी ने तलाशा साझा हलफ्लाईदुबई विमान अपहरण की नाकाम कोशिश में चरमपंथी साजिश के संकेत, बेंजामिन नेतन्याहू ने दिए बड़े खुलासेअसम के मानस नेशनल पार्क के दो महावतों को मिला मास्टर महावत का वैश्विक सम्मान, थाईलैंड में देंगे विशेष प्रशिक्षणबालाघाट में राहुल गांधी का दौरा महज राजनीतिक तमाशा, मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रियों का तीखा पलटवारश्रीनगर पुलिस ने अंतर-राज्यीय ड्रग और हथियार सिंडिकेट पकड़ा, आठ लोग हिरासत मेंबिजली का करंट लगने से मासूम की मौत, दौसा के ठीकरिया में मुआवजे और कार्रवाई की मांग पर अड़े ग्रामीणरणबीर कपूर के पांच गहरे जज्बाती किरदार जो ओटीटी पर लाते हैं आंखों में आंसूउत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था पर मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख में तकरार, 2027 चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ा
मेरठ के चर्चित हत्याकांड में दोषी मुस्कान और साहिल को सताया मौत की सजा का खौफ, कारागार में रो पड़े दोनोंउत्तर प्रदेश
1 अक्तू॰ 2026, 9:52 pm (26 मिनट पहले)· 1

मेरठ के चर्चित हत्याकांड में दोषी मुस्कान और साहिल को सताया मौत की सजा का खौफ, कारागार में रो पड़े दोनों

मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की हत्या में दोषी करार दिए जाने के बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला गहरे अवसाद में हैं। अदालत द्वारा 14 अक्टूबर को सजा सुनाए जाने से पहले जेल प्रशासन दोनों की मानसिक काउंसलिंग करा रहा है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ में घटित दिल दहला देने वाले 'नीला ड्रम कांड' में अदालत का फैसला आने के बाद दोषियों के चेहरों पर खौफ साफ नजर आ रहा है। मर्चेंट नेवी के अधिकारी सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद मृतक की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके साथी साहिल शुक्ला गहरे सदमे की स्थिति में हैं। दोनों को अब फांसी की सजा मिलने की भारी आशंका सता रही है। अदालत आगामी 14 अक्टूबर को इस सनसनीखेज मामले में सजा की अवधि तय करेगी। इसी बीच दोनों की बिगड़ती मानसिक स्थिति और तनाव को देखते हुए जेल प्रशासन की निगरानी में उनकी नियमित काउंसलिंग कराई जा रही है।

दोषी ठहराए जाने के बाद छूटा अन्न-जल, जेल में पहली बार छलके आंसू

वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉक्टर वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद मुस्कान और साहिल दोनों ने रात के समय खाना खाने से पूरी तरह मना कर दिया था। जेल कर्मियों द्वारा काफी समझाने-बुझाने के बाद दोनों ने बेहद मामूली सा भोजन ग्रहण किया। गुरुवार के दिन भी दोनों दोषियों को मानसिक अवसाद से उबारने के लिए विशेष काउंसलिंग सत्र आयोजित किया गया। जेल प्रशासन का कहना है कि उनकी गंभीर मानसिक स्थिति को देखते हुए यह काउंसलिंग आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

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कारागार में बंद साहिल को पहली मर्तबा रोते हुए देखा गया, जबकि मुस्कान के चेहरे पर भी गहरा तनाव और बेचैनी साफ झलक रही थी। डॉक्टर शर्मा ने साझा किया कि मुस्कान अपनी छह साल की मासूम बेटी को भी जेल के भीतर अपने साथ रख रही है। अब जैसे-जैसे सजा के ऐलान की तारीख पास आ रही है, मुस्कान अपनी बेटी के आने वाले भविष्य और परवरिश को लेकर गहरी चिंता जाहिर कर रही है।

पत्रावली के सबूतों पर टिकी सजा, पीड़ित परिवार ने की सख्त मांग

अदालत ने बुधवार को तमाम कानूनी दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने के उपरांत मुस्कान और साहिल को सौरभ राजपूत के कत्ल का दोषी ठहराया था। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य यह पूरी तरह साबित करते हैं कि दोनों ने मिलकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। इसके साथ ही अदालत ने दोनों पक्षों को सजा के बिंदु पर अपनी अंतिम दलीलें रखने के लिए 15 दिनों की मोहलत प्रदान की है। इस कानूनी फैसले के बाद सौरभ की मां रेनू देवी और उनके भाई राहुल काफी भावुक हो उठे। दोनों परिजनों ने न्याय व्यवस्था पर अपना अटूट भरोसा जताते हुए दोषियों के लिए फांसी की सजा मुकर्रर करने की पुरजोर मांग की है।

15 टुकड़ों में काटा था शरीर, वीरान पड़ा है घटना वाला मकान

सौरभ राजपूत की हत्या 4 मार्च 2025 को बेहद सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी। योजना के अनुसार मुस्कान ने पहले सौरभ के भोजन में नशीली नींद की गोलियां मिला दी थीं। सौरभ के अचेत होते ही साहिल ने उसकी छाती पर चाकू से ताबड़तोड़ तीन जानलेवा वार किए। इसके बाद दोनों ने मिलकर सौरभ के शव को 15 टुकड़ों में बेरहमी से काटा और फिर उन टुकड़ों को एक प्लास्टिक के ड्रम में भरकर ऊपर से सीमेंट का घोल डाल दिया।

सघन जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने मुस्कान और साहिल दोनों को सलाखों के पीछे भेज दिया था। इस सनसनीखेज वारदात के करीब 19 महीने बीत जाने के बाद भी ब्रह्मपुरी का वह मकान पूरी तरह बंद पड़ा है, जहां सौरभ का कत्ल हुआ था। मकान मालिक ओमपाल सिंह का कहना है कि उस काली रात के बाद से न तो उन्हें कोई नया किराएदार मिला और न ही कोई संपत्ति खरीदने आगे आया। इलाके के निवासी आज भी उस जगह को 'हत्या वाला घर' कहकर बुलाते हैं।

संपत्ति बेचने की कोशिशें नाकाम, 14 अक्टूबर के फैसले पर टिकी निगाहें

अपराध स्थल से महज 200 मीटर के फासले पर स्थित मुस्कान के पिता प्रमोद रस्तोगी के मकान का भी यही हाल है। परिवार अपने इस घर को बेचने की पूरी कोशिश कर रहा है, मगर अब तक कोई भी खरीदार सामने नहीं आया है। पूरे क्षेत्र में दहशत और बदनामी का ऐसा असर है कि लोग इस मामले से जुड़े किसी भी ठिकाने से दूरी बनाए हुए हैं। अब हर किसी का ध्यान 14 अक्टूबर की तारीख पर लगा हुआ है, जब अदालत मुस्कान और साहिल के अपराध की अंतिम सजा तय करेगी।

सवाल-जवाब

मेरठ का 'नीला ड्रम कांड' असल में क्या है?
यह मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या का मामला है, जिसमें उनकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल ने शव के 15 टुकड़े कर सीमेंट से भरे प्लास्टिक ड्रम में छिपा दिए थे।
अदालत ने मुस्कान और साहिल को कब दोषी ठहराया?
अदालत ने पत्रावली में मौजूद पुख्ता सबूतों के आधार पर बुधवार को दोनों को सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी करार दिया।
दोषियों को सजा का ऐलान किस तारीख को होगा?
अदालत दोनों पक्षों को सजा के बिंदु पर अपनी दलीलें रखने के लिए 15 दिन का वक्त देते हुए 14 अक्टूबर को सजा सुनाएगी।
दोषी करार दिए जाने के बाद जेल में दोनों की क्या स्थिति है?
फांसी की सजा के डर से दोनों ने खाना छोड़ दिया था और साहिल रो पड़ा, जिसके बाद जेल प्रशासन दोनों की नियमित काउंसलिंग करवा रहा है।
सौरभ के परिजनों ने अदालत से क्या मांग की है?
सौरभ की मां रेनू देवी और भाई राहुल ने न्यायपालिका पर विश्वास जताते हुए दोनों दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की है।
हत्या की वारदात किस तारीख को अंजाम दी गई थी?
सौरभ राजपूत की हत्या 4 मार्च 2025 को खाने में नींद की गोलियां मिलाने के बाद चाकू मारकर की गई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 मिनट पहले

अपराध करते वक्त तो जरा भी दया नहीं आई, अब फांसी के डर से रोने का क्या फायदा।

Rohan Verma@rohan-verma·8 मिनट पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। मेरठ वाले उस घर के पास से जब मैं पिछले साल गुजरा था, तब भी वहां का सन्नाटा देखकर रूह कांप गई थी।

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