गाजा पट्टी के भीतर एक साल पहले प्रभावी हुए संघर्ष विराम के बावजूद खूनी हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इलाके के दो अलग-अलग हिस्सों में हुए ताजा सैन्य हमलों में कम से कम आठ लोगों की जान चली गई है, जिनमें एक मासूम बच्चा और नियमित ड्यूटी पर तैनात पांच पुलिसकर्मी शामिल हैं। उत्तरी इलाके में स्थित अस्पतालों के अधिकारियों और स्थानीय सुरक्षा प्रशासन ने इन मौतों की पुष्टि की है। जमीन पर मौजूद नागरिकों के लिए यह घटना इस कड़वी हकीकत को फिर उजागर करती है कि औपचारिक युद्धविराम समझौते के बाद भी वहां आसमान से मंडराता मौत का खतरा रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना हुआ है।
उत्तरी गाजा में स्कूल के पास गिरा मिसाइल
पहला हमला गाजा सिटी के उत्तर में स्थित अल-रिमाल इलाके में दर्ज किया गया। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, यह मिसाइल अल-रिमाल के काहिरा स्कूल के ठीक बगल में मौजूद आम नागरिकों के एक समूह पर आकर गिरी। इस भीषण विस्फोट में एक बच्चे समेत तीन नागरिकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। स्कूल के पास मौजूद भीड़भाड़ वाले इलाके में अचानक हुए इस धमाके से अफरातफरी मच गई और आसपास मौजूद लोग घायलों को बचाने के लिए दौड़े। युद्ध के दौरान विस्थापित हुए कई परिवारों ने ऐसे शैक्षणिक परिसरों और उनके नजदीकी इलाकों में पनाह ले रखी है, जिसके चलते इस प्रकार के हमलों में आम नागरिकों के हताहत होने का खतरा हमेशा बना रहता है।
दक्षिणी क्षेत्र में गश्ती दल पर ड्रोन का वार
दूसरा घातक हमला दक्षिणी गाजा के प्रमुख शहर खान यूनिस के अल-मवासी इलाके में हुआ। हमास द्वारा संचालित गृह मंत्रालय के अनुसार, वहां तैनात पुलिसकर्मियों के एक दल को निशाना बनाकर सटीक ड्रोन हमला किया गया। यह हमला उस समय हुआ जब सुरक्षाकर्मी इलाके में अपनी नियमित ड्यूटी निभा रहे थे। ड्रोन से गिरे बारूद ने पांच पुलिस अधिकारियों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे उन सभी की मौके पर मौत हो गई। बाद में मृतकों के जनाजे में सैकड़ों स्थानीय लोग और परिजन शामिल हुए, जहां गम और आक्रोश का माहौल देखने को मिला।
मृतक पुलिसकर्मियों की पहचान और आधिकारिक बयान
गृह मंत्रालय ने जान गंवाने वाले सभी पांचों पुलिसकर्मियों के नामों की घोषणा की और बताया कि उनकी उम्र 23 से 53 वर्ष के बीच थी। मंत्रालय ने इस कार्रवाई को इजरायली सुरक्षा बलों द्वारा किया गया एक भयानक नरसंहार करार दिया है। दूसरी तरफ, इजरायली सेना ने स्वीकार किया कि उसने क्षेत्र में दो अलग-अलग हमले किए हैं। हालांकि, इजरायली पक्ष का दावा है कि ये हमले सैन्य ऑपरेटिव्स को निशाना बनाकर किए गए थे। फिलहाल सेना ने अपने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत या विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
कागजों में सिमटा समझौता और जारी मौतों का आंकड़ा
गाजा पट्टी में पिछले साल अक्टूबर के महीने में दोनों पक्षों के बीच एक संघर्ष विराम लागू हुआ था। इस समझौते के तहत गाजा में बंधक बनाए गए सभी 48 शेष बंधकों की रिहाई के बदले इजरायल की हिरासत में मौजूद हजारों फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ा गया था, ताकि लंबे खूनी संघर्ष को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके। इस पूरे युद्ध की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के नेतृत्व में हुए अचानक हमले के बाद हुई थी, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बनाकर ले जाया गया था। हालांकि अक्टूबर में हुए युद्धविराम के बाद से हवाई हमलों का सिलसिला लगभग हर रोज बदस्तूर जारी है। हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक 1,580 लोग मारे जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र इन स्वास्थ्य आंकड़ों को विश्वसनीय मानता है। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि वे हमास के ठिकानों को चुन-चुनकर निशाना बनाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन ऑपरेशनों में अक्सर निर्दोष नागरिक भी अपनी जान गंवा रहे हैं।
शांति वार्ता में गहराता गतिरोध
हवाई बमबारी की इस निरंतरता के बीच गाजा के लिए तैयार की गई कूटनीतिक शांति योजना पूरी तरह से अधर में लटकी नजर आ रही है। ट्रंप प्रशासन की मध्यस्थता में आगे बढ़ाई गई शांति प्रक्रिया मौजूदा समय में ठप पड़ चुकी है, जिससे जमीन पर राजनीतिक समाधान निकलने की उम्मीदें लगातार कमजोर हो रही हैं। जब से यह व्यापक युद्ध शुरू हुआ है, तब से लेकर अब तक पूरे गाजा क्षेत्र में 74,594 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हमलों में लगातार हो रही मौतों और राजनयिक बातचीत में जारी ठहराव ने इस आशंका को और गहरा दिया है कि मौजूदा संघर्ष विराम केवल नाम का रह गया है और गाजा की जनता किसी भी पल दोबारा पूर्ण युद्ध के दलदल में धकेली जा सकती है।



















