भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधू ने जर्मनी में दमदार प्रदर्शन करते हुए हाइलो ओपन सुपर 500 बैडमिंटन टूर्नामेंट की ट्रॉफी अपने नाम कर ली है। खिताबी भिड़ंत में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता ने डेनमार्क की प्रतिद्वंद्वी लाइन कजर्सफेल्ट को सीधे गेम में 21-12, 21-14 से शिकस्त दी। पिछले सप्ताह फ्रेंच ओपन के फाइनल मुकाबले में दुनिया की नंबर एक शटलर एन से यंग से पराजित होने के बाद भारतीय खिलाड़ी ने शानदार वापसी की और खिताबी मुकाबले में कोई चूक नहीं होने दी। पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय स्टार का दबदबा देखने को मिला और उन्होंने एक भी गेम गंवाए बिना ट्रॉफी तक का सफर पूरा किया।
सीजन का दूसरा बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब
सिंधू के लिए यह जीत अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर उनके मजबूत होते फॉर्म का बड़ा प्रमाण है। मौजूदा सीजन में यह उनका दूसरा बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब बन गया है। इससे पहले जुलाई के महीने में उन्होंने जापान ओपन की चैंपियनशिप जीती थी। फ्रेंच ओपन के उपविजेता रहने के फौरन बाद जर्मनी में यह खिताबी जीत दर्ज करके उन्होंने अपनी निरंतरता और कोर्ट पर आक्रामकता को फिर से साबित किया है। इस पूरे हफ्ते उन्होंने अपने खेल की गति और सटीक शॉट्स से प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को बैकफुट पर रखा।
टूर्नामेंट में सिंधू का अजेय सफर
हाइलो ओपन में भारतीय खिलाड़ी का अभियान बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने अपने पहले दौर की शुरुआत भारत की ही युवा खिलाड़ी प्रकृति भरत के खिलाफ सीधे गेम में जीत दर्ज करके की थी। इसके बाद अगले चरण में फ्रांस की रोसी ओक्टाविया पंकासारी को हराकर उन्होंने क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की की। अंतिम आठ के मुकाबले में उनका सामना जर्मनी की अमाली शुल्ज से हुआ, जहां मेजबान देश की खिलाड़ी को शिकस्त देकर वह सेमीफाइनल में पहुंचीं। सेमीफाइनल में एक बार फिर दो भारतीय आमने-सामने थीं, जहां सिंधू ने अनमोल खरब को 21-13, 21-16 से हराकर खिताबी मुकाबले का टिकट हासिल किया था।
कजर्सफेल्ट के खिलाफ रिकॉर्ड और फाइनल की जंग
फाइनल में सिंधू की प्रतिद्वंद्वी रहीं डेनमार्क की विश्व नंबर 25 खिलाड़ी लाइन कजर्सफेल्ट को खिताबी मुकाबले तक पहुंचने के लिए कोर्ट पर कड़ा पसीना बहाना पड़ा था। कजर्सफेल्ट ने सेमीफाइनल में थाईलैंड की पोर्नपावी चोचुवोंग को 8-21, 21-19, 28-26 के बेहद नजदीकी स्कोर से मात दी थी। 82 मिनट तक चले उस मैराथन मुकाबले में डेनमार्क की शटलर ने चार मैच पॉइंट बचाकर सनसनीखेज जीत दर्ज की थी। हालांकि, फाइनल में सिंधू के सामने उनकी एक न चली। दोनों खिलाड़ियों के बीच आमने-सामने के मुकाबलों में भारतीय स्टार का पहले से ही भारी दबदबा रहा था। इस फाइनल से पहले सिंधू हेड-टू-हेड रिकॉर्ड में 6-1 से आगे थीं, जिसमें इसी साल इंडोनेशिया मास्टर्स में मिली जीत भी शामिल थी। जर्मनी के कोर्ट पर भी सिंधू ने उसी दबदबे को बरकरार रखते हुए सीधे गेम में जीत हासिल की।



















