मध्य पूर्व में जारी भारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अमेरिकी नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर पूरी तरह से नियंत्रण स्थापित कर लिया है। अमेरिका का इरादा इस महत्वपूर्ण समुद्री जलडमरूमध्य पर अपने कड़े नियंत्रण को बनाए रखने का है। डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी की ताकत को रेखांकित करते हुए इसे लोहे और स्टील की एक अभेद्य दीवार करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान की सैन्य स्थिति इतनी लाचार हो चुकी है कि वह इस अमेरिकी नाकाबंदी के खिलाफ कोई भी जवाबी कार्रवाई करने में पूरी तरह असमर्थ है।
ट्रुथ सोशल पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा खुलासा और ईरान की खराब आर्थिक स्थिति
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर शेयर की गई एक विस्तृत पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सैन्य और आर्थिक लाचारी का पूरा ब्योरा पेश किया। ट्रंप के मुताबिक ईरान की रक्षा क्षमताएं पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हैं और अब उसके पास न तो कोई सक्रिय नेवी बची है और न ही एयर फोर्स। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सशस्त्र बलों के बाकी बचे सैनिकों को महीनों से वेतन तक नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के जवान पूरी तरह बिखर चुके हैं और मैदान छोड़कर भाग रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान का राजनीतिक नेतृत्व इस समय बहुत ही बुरे दौर से गुजर रहा है और देश का खजाना पूरी तरह खाली हो चुका है। आर्थिक मोर्चे पर ईरान की हालत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां के नागरिक 300% की भयानक महंगाई का सामना कर रहे हैं, जबकि सरकार के पास अपनी जनता को देने के लिए केवल फर्जी खबरें ही बची हैं। उन्होंने कहा कि तेहरान सिर्फ बड़ी बातें करना जानता है लेकिन धरातल पर कुछ भी करने में अक्षम है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में चुटकी लेते हुए लिखा,
"ईरान सिर्फ बातें करता है, काम कुछ नहीं करता और अब वह मिडिल ईस्ट का दादा नहीं रहा।"
दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का रणनीतिक महत्व
ओमान और ईरान के समुद्री तटों के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से दुनिया का सबसे नाजुक और अहम समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया भर में होने वाले कुल कच्चे तेल के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। फारस की खाड़ी के प्रमुख तेल उत्पादक देश इसी रास्ते का उपयोग करके अपने पेट्रोलियम उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाते हैं।
सामरिक विश्लेषकों का मानना है कि इस जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव या व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में रुकावट पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला सकती है। ऐसे व्यवधान से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, समुद्री जहाजों के बीमा प्रीमियम में अत्यधिक बढ़ोतरी हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। तेहरान ने अतीत में भी कई बार चेतावनी दी थी कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगी उस पर आर्थिक और सैन्य दबाव बढ़ाते हैं, तो वह इस समुद्री रास्ते को ठप कर सकता है।
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की तैनाती और कूटनीतिक रास्ते
हॉर्मुज में जारी खींचतान को देखते हुए वॉशिंगटन ने फारस की खाड़ी में अपनी नौसेना के बड़े बेड़े और युद्धपोतों की तैनाती को लगातार मजबूत बनाए रखा है। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जहाजों की निर्बाध आवाजाही और नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी नौसेना हर समय मुस्तैद है।
दिलचस्प बात यह है कि डोनाल्ड ट्रंप का यह सख्त रुख ऐसे समय में सामने आया है जब पर्दे के पीछे तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत के जरिए इस बात की संभावना तलाशी जा रही है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सामान्य वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बहाल की जा सके और दोनों देशों के बीच बने युद्ध के खतरे को कम किया जा सके।



















