ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव खाड़ी क्षेत्र में लगातार सातवीं रात भी जारी रहा। ईरान ने अमेरिकी नौसेना के जहाजों को क्रूज मिसाइलों से निशाना बनाया और खाड़ी में फैले कई सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए, जबकि अमेरिकी सेना ने भी ईरान के भीतर सैन्य लक्ष्यों पर जवाबी हमले जारी रखे।
टकराव कब और कैसे शुरू हुआ
यह टकराव अचानक सामने नहीं आया है। मार्च 2026 में खबरें आई थीं कि ईरान ने कादर क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुए अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को निशाना बनाया था। इसके बाद मई 2026 में अमेरिका ने कहा कि अपने युद्धपोतों पर हुए हमले के जवाब में उसने ईरान के भीतर कई ठिकानों पर हमला किया।
जुलाई में हमलों में तेजी
जुलाई 2026 में यह टकराव काफी तेज हो गया। 13 जुलाई को ईरानी स्टेट टीवी ने दावा किया कि ईरान ने क्रूज मिसाइलों से अमेरिका के एक जहाज को निशाना बनाया। इसी दिन ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और क्रूज मिसाइलों से हमला किया और खाड़ी के अन्य इलाकों में भी हमले किए, जिसे हाल के महीनों में अमेरिका के खिलाफ सबसे भारी हमलों में गिना गया।
इसके जवाब में 15 जुलाई को अमेरिका ने ईरान की तटीय रक्षा प्रणालियों के साथ-साथ क्रूज मिसाइलों के भंडारण और उन्हें दागे जाने वाले ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद 17 जुलाई को ईरान ने एक बार फिर अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर क्रूज मिसाइलों से हमला किया और खाड़ी क्षेत्र में फैले सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसी दिन हिंद महासागर में भी एक अमेरिकी जहाज को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई।
चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी कार्रवाई
अमेरिकी सेना ने लगातार सातवीं रात भी ईरान के भीतर हमलों का सिलसिला जारी रखा। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने पुष्टि की कि उसने ईरान के चाबहार पोर्ट पर मौजूद एक निगरानी टावर को नष्ट कर दिया है।
कादर मिसाइल क्या हैं
ईरान के हमलों में बार-बार जिन कादर क्रूज मिसाइलों का जिक्र आ रहा है, उन्हें लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम माना जाता है और इन्हें ईरान के सैन्य जखीरे का अहम हिस्सा माना जाता है। मार्च 2026 में इन्हीं मिसाइलों के जरिए यूएसएस अब्राहम लिंकन को निशाना बनाए जाने की खबर आई थी।
आगे क्या हो सकता है
दोनों पक्षों के बीच हमलों और जवाबी हमलों का यह सिलसिला अब कई महीनों से चल रहा है और खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। लगातार सैन्य कार्रवाइयों के चलते क्षेत्र में तेल आपूर्ति, समुद्री यातायात और वहां रह रहे विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।



















