सऊदी अरब पर यमन के हूती गुट की ओर से बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों के मद्देनजर ब्रिटेन ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी को मजबूत करने का कदम उठाया है। रियाद सहित रणनीतिक ठिकानों और तटीय इलाकों में ऊर्जा केंद्रों पर हालिया हमलों के बाद ब्रिटेन अपनी वायुसेना यानी आरएएफ के टाइफून लड़ाकू विमान सऊदी अरब की रक्षा के लिए भेजेगा। इस पूरे रक्षात्मक मिशन को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने हरी झंडी दी है, जिसका मुख्य उद्देश्य सऊदी आबादी वाले शहरों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को हवाई हमलों के खतरे से महफूज रखना है।
यह तैनाती पूरी तरह रक्षात्मक रणनीति का हिस्सा है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने मंगलवार को जारी एक लिखित बयान में स्पष्ट किया कि इन ब्रिटिश लड़ाकू विमानों की भूमिका केवल बचाव तक सीमित रहेगी और वे हूतियों के खिलाफ किसी भी तरह के आक्रामक हमलों को अंजाम नहीं देंगे। इस कदम का मकसद सिर्फ सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र की निगरानी और सुरक्षा करना है ताकि रिहायशी क्षेत्रों तथा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले हवाई खतरों को बीच में ही बेअसर किया जा सके।
हवाई अड्डे पर हमला और तनाव में बढ़ोतरी
सऊदी अरब और हूती विद्रोही लंबे समय से यमन के आंतरिक संघर्ष से जुड़े तनाव का सामना कर रहे हैं। हूती विद्रोही यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के खिलाफ संघर्ष में उलझे हैं, जिसे सऊदी अरब का समर्थन हासिल है। इस क्षेत्रीय तनातनी के बीच हूती गुट ने 10 और 11 अक्टूबर को सऊदी राजधानी रियाद में स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दो हवाई हमलों की जिम्मेदारी ली थी। इस हमले में 14 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए थे।
इस घातक घटना के बाद सुरक्षा हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। हूतियों का कहना है कि वे पश्चिमी यमन में अपने नियंत्रण वाले इलाकों, विशेष रूप से राजधानी सना में हुए हमलों के जवाब में जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं। रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने एक अलग बयान में रियाद हवाई अड्डे को निशाना बनाए जाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह हमला दर्शाता है कि हूती गुट क्षेत्र में स्थिति को भड़काने के लिए किस हद तक जा रहा है। इसी घटनाक्रम के कारण ब्रिटेन ने सऊदी अरब को अतिरिक्त सैन्य सहयोग उपलब्ध कराने का फैसला लिया है।
लड़ाकू विमानों के साथ अतिरिक्त सैन्य सहायता
ब्रिटिश वायुसेना के टाइफून विमानों के अलावा मिशन को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए कई अन्य सैन्य संसाधन भी मुहैया कराए जा रहे हैं। ब्रिटेन सऊदी अरब में सैन्य सलाहकारों की एक टीम भेजने के साथ-साथ एक आरएएफ A400M परिवहन विमान भी तैनात करेगा। यह परिवहन विमान सऊदी अरब के भीतर रक्षा उपकरणों की आवाजाही और साजो-सामान के त्वरित प्रबंधन में मदद करेगा, जिससे किसी भी खतरे की स्थिति में रक्षा प्रणालियों को तुरंत सक्रिय किया जा सके।
ब्रिटेन पहले से ही हवाई हमलों से बचाव के लिए सऊदी अरब को आवश्यक रक्षा उपकरण उपलब्ध करा रहा है। इसके साथ ही सऊदी अरब के रक्षात्मक अभियानों के लिए हवा से हवा में ईंधन भरने की सुविधा भी दी जा रही है। ब्रिटिश सरकार ने इस एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग व्यवस्था को 90 दिनों के लिए और आगे बढ़ा दिया है, जिससे सऊदी लड़ाकू विमानों की हवाई निगरानी और गश्त की क्षमता को मजबूती मिलेगी।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा पर असर
खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने इस बात पर जोर दिया कि खाड़ी में जारी हिंसा के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो रही है। ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली इस बाधा के चलते आम परिवारों और व्यापारिक संस्थानों पर लगातार बढ़ती लागत का बोझ पड़ रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
दूसरी ओर, हूती नेतृत्व की ओर से भी टकराव कम करने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। इस महीने की शुरुआत में हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने चेतावनी दी थी कि वे सऊदी अरब के अंदरूनी इलाकों में अपने हमलों के अभियान को और तेज गति से जारी रखेंगे। इस बयान के बाद सऊदी अरब के हवाई सुरक्षा नेटवर्क को मजबूत करना अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के लिए प्राथमिक आवश्यकता बन गया है, जिसे ध्यान में रखते हुए ब्रिटेन ने अपनी रक्षात्मक उपस्थिति बढ़ाने का फैसला किया है।


















