त्रिपुरा के सिपाहीजला जिले के अंतर्गत आने वाले रहीमपुर-अशाबारी सीमा क्षेत्र में भारतीय सीमा के अंदर कथित तौर पर प्रवेश करने वाले बांग्लादेशी सीमा बल के दो जवानों को हिरासत में ले लिया गया। यह घटना गुरुवार रात की है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रतिक्रिया देखने को मिली। पकड़े गए दोनों जवानों को शुक्रवार को हुई एक फ्लैग मीटिंग के बाद वापस बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंप दिया गया।
पहचान और नशे की हालत में घुसपैठ का आरोप
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए दोनों सुरक्षा कर्मियों की पहचान सहायक उप-निरीक्षक (ASI) इमरान हुसैन और कांस्टेबल रुहित देवान के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों के बयानों और साक्ष्यों के मुताबिक, ये दोनों जवान कथित तौर पर नशे की हालत में जीरो-लाइन क्षेत्र तक पहुंच गए थे और वहां एक स्थानीय व्यापारी को पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। इस अप्रत्याशित हरकत के बाद सीमाई इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया था।
स्थानीय लोगों का हस्तक्षेप और बीएसएफ की कार्रवाई
स्थिति को भांपते हुए स्थानीय निवासियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और सीमा बाड़ के भारतीय हिस्से में दोनों जवानों को दबोच लिया। इस दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था और ऐसी खबरें सामने आईं कि बीएसएफ के मौके पर पहुंचने से पहले स्थानीय लोगों ने दोनों जवानों की पिटाई भी कर दी थी। इसके तुरंत बाद बीएसएफ की 49वीं बटालियन के जवान घटनास्थल पर पहुंचे और दोनों को अपनी हिरासत में लेकर अशाग्राम बाड़ी कैंप ले आए।
रातभर कैंप में रखा और मेडिकल जांच कराई
अशाग्राम बाड़ी कैंप लाए जाने के बाद दोनों बांग्लादेशी जवानों का पूरी रात मेडिकल परीक्षण कराया गया। वे शुक्रवार को अपने देश के अधिकारियों को सौंपे जाने तक इसी कैंप में सुरक्षित रखे गए थे। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सीमा सुरक्षा से जुड़े तमाम पहलुओं पर कड़ी नजर रखी गई ताकि किसी भी तरह के कूटनीतिक तनाव को बढ़ने से रोका जा सके।
फ्लैग मीटिंग के बाद सुरक्षित वापसी
शुक्रवार को दोपहर करीब 1 बजे रहीमपुर सेक्टर में गेट नंबर 163 और बॉर्डर पिलर 2057 के पास एक आधिकारिक फ्लैग मीटिंग का आयोजन किया गया। यह बैठक बीएसएफ की 49वीं बटालियन द्वारा जीरो लाइन पर आयोजित की गई थी, जिसमें दोनों देशों के सीमा बलों के प्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी और खुफिया विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों जवानों को शांतिपूर्ण तरीके से उनके देश के सुपुर्द कर दिया गया।
सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरी घटना ने सीमाई इलाकों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर यह बात चिंता का विषय बनी हुई है कि कैसे बांग्लादेशी बल के ये दो जवान बिना किसी बाधा के भारतीय सीमा में दाखिल हो गए और सीमा बाड़ को पार करने में सफल रहे। इस मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों द्वारा आंतरिक तौर पर समीक्षा किए जाने की संभावना है।



















