शेयर बाजार में कथित तौर पर हेरफेर करने और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए निवेशकों को चूना लगाने के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के मुंबई जोनल ऑफिस-1 ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के प्रावधानों के तहत यह कदम उठाया है। जांच के दायरे में आर एम ड्रिप एंड स्प्रिंकलर्स सिस्टम्स लिमिटेड और आर एंड बी डेनिम्स लिमिटेड नाम की दो लिस्टेड कंपनियां आई हैं, जिनके शेयरों में गड़बड़ी की बात सामने आई है। इस सिलसिले में एजेंसी की टीमों ने 16 अक्टूबर 2026 को एक साथ दो राज्यों के कुल छह शहरों में दबिश दी।
इन शहरों में हुई एक साथ छापेमारी
जांच एजेंसी ने महाराष्ट्र और गुजरात के कई ठिकानों पर एक साथ शिकंजा कसा। महाराष्ट्र के लिहाज से देखें तो मुंबई और नासिक में कुल मिलाकर कई परिसरों की तलाशी ली गई। इसके साथ ही गुजरात के बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्रों को भी इस कार्रवाई में शामिल किया गया। गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, गांधीनगर और भावनगर में स्थित दफ्तरों और घरों पर भी एक साथ छापे मारे गए। इस व्यापक तलाशी अभियान के दौरान केंद्रीय एजेंसी को दोनों कंपनियों के कामकाज और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई अहम सुराग हाथ लगे हैं।
ऐसे रची गई शेयरों के दाम बढ़ाने की साजिश
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि दोनों कंपनियों ने मिलकर अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के दौरान एक सोची-समझी साजिश के तहत अपने शेयर और कन्वर्टिबल वारंट जारी किए थे। इस अवधि में चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को 3.5 करोड़ से अधिक शेयर बांटे गए। खास बात यह है कि इन शेयरों के एवज में मिलने वाली रकम का भुगतान किसी आम निवेशक से नहीं आया, बल्कि यह पैसा आपस में जुड़े हुए लोगों और चुनिंदा कंपनियों के एक छोटे से दायरे से ही घूमकर आया था। इसके बाद आने वाले महीनों में कृत्रिम तरीके से दोनों कंपनियों के शेयरों के भाव लगातार ऊपर चढ़ाए जाते रहे। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अधिकांश शेयर आम लोगों के पास जाने के बजाय उन्हीं चुनिंदा लोगों के पास सुरक्षित बने रहे जो इस खेल में पहले से शामिल थे।
व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए खुदरा निवेशकों को फंसाया
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह से लेकर फरवरी 2026 के बीच सुनियोजित तरीके से मल्टीबैगर स्टॉक्स के नाम से कई कम्युनिटी ग्रुप बनाए गए थे। इन व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से रोजाना साधारण खुदरा निवेशकों को दोनों कंपनियों के शेयर खरीदने के लिए लुभावने टिप्स भेजे जाते थे। इन नेटवर्क को चलाने के लिए शातिर तरीके से हरियाणा और मुंबई में दूसरे लोगों के नाम पर जारी किए गए सिम कार्ड का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि इन सभी व्हाट्सएप ग्रुप्स का वास्तविक संचालन और नियंत्रण गुजरात के भावनगर शहर से किया जा रहा था। इन भ्रामक संदेशों और लुभावने टिप्स के झांसे में आकर इन शेयरों में रुचि दिखाने वाले खरीदारों की संख्या 3,400 से अचानक बढ़कर सीधे एक लाख से भी ज्यादा पहुंच गई।
ग्रुप डिलीट होते ही शेयरों में आई भारी गिरावट
मामले में नया मोड़ तब आया जब 25 फरवरी 2026 को अचानक इन सभी व्हाट्सएप ग्रुप्स को एक साथ डिलीट कर दिया गया। जैसे ही ये ग्रुप बंद हुए, दोनों कंपनियों के शेयर बाजार खुलते ही लोअर सर्किट की चपेट में आ गए। इसके चलते कुछ ही दिनों के भीतर इन शेयरों की कीमतें करीब 70 प्रतिशत तक धड़ाम से नीचे गिर गईं। अचानक आए इस भारी भूचाल के कारण एक लाख से अधिक छोटे और खुदरा निवेशकों को अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा गंवाना पड़ा। लोअर सर्किट लग जाने की वजह से निवेशक ऐसे शेयरों में फंसकर रह गए जिन्हें चाहकर भी वे बेच नहीं पा रहे थे और उनका पैसा पूरी तरह अटक गया।
छापेमारी के दौरान क्या-क्या हुआ बरामद
इस देशव्यापी तलाशी अभियान के दौरान ईडी के अधिकारियों ने दोनों कंपनियों के आधिकारिक दफ्तरों के अलावा उनके मुख्य प्रमोटरों के आवासों की भी बारीकी से छानबीन की। इसके अलावा उन तमाम लोगों के ठिकानों पर भी छापे मारे गए जिन्हें बेहद कम कीमत पर शेयर आवंटित किए गए थे और जो इस पूरे खेल का हिस्सा थे। इस फर्जी प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले व्हाट्सएप ग्रुप्स के संचालकों और कुछ स्टॉक-ब्रोकिंग फर्मों के परिसरों की भी सघन जांच की गई। इस कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और शेयर लेनदेन से जुड़े पुख्ता रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। फिलहाल एजेंसी इस पूरे मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल और वित्तीय गड़बड़ियों के स्रोतों की गहराई से और आगे की जांच कर रही है।


















