मिजोरम में मेडिकल दवाओं के गलत इस्तेमाल और अवैध खरीद-फरोख्त पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई ने दवा कारोबारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वे नियमों का उल्लंघन करते पाए गए तो उनके लाइसेंस सीधे रद्द कर दिए जाएंगे। यह कदम राज्य के विभिन्न हिस्सों में कफ सिरप और अन्य फॉर्मूलेशन के बढ़ते गैर-चिकित्सीय उपयोग को देखते हुए उठाया गया है।
आइजोल में बुलाई गई उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक
दवाओं के दुरुपयोग की गंभीर स्थिति पर विचार करने के लिए मंगलवार को आइजोल में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई के साथ आबकारी एवं नारकोटिक्स मंत्री लालंगहिंगलोवा हमार भी शामिल हुए। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग, आबकारी एवं नारकोटिक्स विभाग के आला अधिकारियों और सेंट्रल यंग मिजो एसोसिएशन (वाईएमए) के प्रतिनिधियों ने भी चर्चा में भाग लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नशे के नए चलन को समझना और आपूर्ति तंत्र को पूरी तरह तोड़ना था।
हेरोइन की किल्लत बनी सिरप के नशे की मुख्य वजह
बैठक के दौरान सामने आए तथ्यों की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मिजोरम में लंबे समय से हेरोइन सबसे बड़ा खतरा बनी हुई थी। हालांकि हाल के दिनों में हेरोइन की आपूर्ति में भारी गिरावट आई है। आपूर्ति घटने के कारण नशे के आदी कई लोग अब फार्मास्यूटिकल दवाओं और विशेष रूप से कोडीन सिरप की ओर मुड़ गए हैं। इस बदलाव ने सुरक्षा एजेंसियों और स्वास्थ्य तंत्र के सामने एक नई और जटिल चुनौती खड़ी कर दी है।
फर्जी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और लाइसेंसी डीलरों की सांठगांठ
अवैध कारोबार की जांच के दौरान कुछ चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। कई लाइसेंसी दवा विक्रेताओं और खुद को मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव बताकर काम करने वाले लोगों की इस काले कारोबार में संलिप्तता पाई गई है। दवाओं की खरीद और बिक्री में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप में कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और उन पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई ने गहरी चिंता जताई कि नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाएं राज्य के बेहद दूरदराज और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाई जा रही हैं। भारी मात्रा में यह सिरप राज्य में लाया जा रहा है और बिना डॉक्टर के पर्चे के खुलेआम बेचा जा रहा है।
असली मरीजों के लिए दवा मिलना हुआ मुश्किल
स्वास्थ्य मंत्री ने इस पूरे संकट के एक विडंबनापूर्ण पहलू की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सख्ती बढ़ने से उन वास्तविक मरीजों को परेशानी हो रही है जिन्हें इलाज के लिए कोडीन आधारित दवाओं की सख्त जरूरत है। सामान्य मरीजों के लिए यह दवा हासिल करना कठिन हो गया है, जबकि दूसरी ओर मुनाफाखोरों का अवैध नेटवर्क कई इलाकों में अब भी सक्रिय है।
लाइसेंस रद्द करने और कड़ी निगरानी के निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार भरोसे के आधार पर दवा लाइसेंस जारी करती है, लेकिन अगर कोई इसका दुरुपयोग कर अवैध कमाई करेगा तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी करने वालों के लाइसेंस तुरंत वापस लिए जाएंगे और भविष्य में नए लाइसेंस बेहद सावधानी तथा कड़ी जांच के बाद ही मंजूर होंगे। इसके साथ ही उन्होंने आबकारी एवं नारकोटिक्स विभाग को जांच तेज करने, खाद्य एवं औषधि प्रशासन को निगरानी बढ़ाने और सेंट्रल वाईएमए को जमीनी स्तर पर अभियान जारी रखने का आह्वान किया।





















