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आगरा में घर-घर जूते बुनकर महिलाएं जुटा रहीं लाखों की कमाई, संवर रहा परिवार का भविष्यमनी
15 अक्तू॰ 2026, 8:37 pm (14 दिन पहले)· 0

आगरा में घर-घर जूते बुनकर महिलाएं जुटा रहीं लाखों की कमाई, संवर रहा परिवार का भविष्य

उत्तर प्रदेश के आगरा में घरेलू महिलाएं घरेलू कामकाज निपटाने के बाद जूतों के अपर बुनकर सालाना लाखों रुपये कमा रही हैं और परिवार का मुख्य आर्थिक सहारा बन रही हैं।

उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा में घरेलू महिलाएं अपने हुनर के दम पर न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि शहर के मशहूर जूता उद्योग की मजबूत रीढ़ भी साबित हो रही हैं। सुबह और दोपहर के रोजमर्रा के घरेलू कामकाज पूरे करने के बाद ये महिलाएं अपने घरों में बैठकर जूतों के ऊपरी हिस्से यानी अपर की बुनाई का काम करती हैं। इस कारीगरी से वे अपने परिवार को बड़ा वित्तीय संबल दे रही हैं और सालाना लाखों रुपये की सम्मानजनक कमाई कर रही हैं।

जगदीशपुरा की लंबी गली बनी महिला कारीगरों का बड़ा केंद्र

शहर के थाना जगदीशपुरा क्षेत्र में स्थित लंबी गली इस जमीनी बदलाव का सबसे जीवंत उदाहरण बन चुकी है। इस इलाके के लगभग हर घर में महिलाएं जूतों के अपर तैयार करने के काम में जुटी दिखाई देती हैं। महिलाएं अपने घरों में फुर्सत के पलों में इन हिस्सों की महीन बुनाई पूरी करती हैं और फिर तैयार माल को स्थानीय फैक्ट्रियों या कार्यशालाओं में भेज देती हैं। वहां इन पर सोल लगाने और फिनिशिंग का बाकी काम किया जाता है।

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शौक से शुरू हुआ सफर बना चार दशकों का सहारा

शुरुआत में कई महिलाएं इसे खाली समय बिताने या अतिरिक्त आमदनी के छोटे साधन के रूप में अपनाती हैं, लेकिन समय के साथ यह उनकी मुख्य आजीविका में तब्दील हो जाता है। स्थानीय महिला मछला बताती हैं कि वे पिछले 40 वर्षों से घर पर ही जूते की बुनाई का काम कर रही हैं। जब परिवार में कोई अन्य कमाने वाला सदस्य नहीं था, तब इसी हुनर ने उनके परिवार के भरण-पोषण और जीवन-यापन की पूरी जिम्मेदारी संभाली।

हर डिजाइन में माहिर हाथ और आर्थिक सुरक्षा

इसी क्षेत्र की एक अन्य कारीगर अनोखी बताती हैं कि वे हर तरह के आधुनिक और पारंपरिक डिजाइन वाले जूतों की बुनाई में पूरी तरह पारंगत हैं। उनकी पूरी गली की महिलाएं किसी न किसी रूप में इस काम से जुड़ी हुई हैं। कुछ महिलाएं सीधे फैक्ट्रियों में जाकर काम करती हैं, जबकि बड़ी संख्या में महिलाएं घर की चारदीवारी के भीतर रहकर ही काम संभालती हैं। इस नियमित आमदनी से पूरे घर का खर्च बेहद आराम से चल जाता है।

जूता नगरी की पहचान को मजबूत करता महिलाओं का योगदान

जूता नगरी के रूप में विख्यात आगरा में सैकड़ों छोटी-बड़ी जूता निर्माण इकाइयां संचालित हो रही हैं। इन कारखानों में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर महिलाएं भी काम कर रही हैं। जो महिलाएं पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते कारखानों तक नहीं जा पातीं, उनके लिए घर बैठे जूते बुनने की यह व्यवस्था स्वावलंबन और सामाजिक सम्मान का सबसे बड़ा जरिया बन चुकी है।

सवाल-जवाब

आगरा में महिलाएं घर पर मुख्य रूप से क्या काम कर रही हैं?
महिलाएं घरेलू कामकाज के बाद जूतों के ऊपरी हिस्से यानी अपर की बुनाई का काम करती हैं।
जूते की बुनाई के काम से महिलाएं कितना कमा रही हैं?
घर बैठे जूतों के अपर बुनकर महिलाएं सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रही हैं।
आगरा का कौन सा इलाका इस काम के लिए प्रमुख उदाहरण है?
थाना जगदीशपुरा क्षेत्र की लंबी गली इसका प्रमुख केंद्र है, जहां लगभग हर घर में महिलाएं यह काम करती हैं।
महिलाएं तैयार माल को कहां भेजती हैं?
महिलाएं तैयार अपर को फैक्ट्रियों या वर्कशॉप में भेजती हैं, जहां उनमें सोल लगाने और बाकी काम पूरे किए जाते हैं।
कारीगर मछला कितने समय से यह काम कर रही हैं?
मछला पिछले 40 सालों से घर बैठकर जूते की बुनाई कर रही हैं और यही उनके परिवार का सहारा बना।
कारीगर अनोखी किस प्रकार के जूते तैयार करती हैं?
अनोखी सभी तरह के डिजाइन वाले जूतों की बुनाई करती हैं, जिससे उनके घर का खर्च आसानी से निकल जाता है।
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