अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से ठीक पहले मतदान प्रक्रिया और मतदाता सूचियों को लेकर कानूनी टकराव तेज हो गया है। एक अमेरिकी संघीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को कड़ा निर्देश जारी करते हुए उन सभी राज्यों के नामों का खुलासा करने का आदेश दिया है, जिनसे गैर-नागरिकों द्वारा मतदान किए जाने की आशंका के तहत संपर्क किया गया था। डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा दाखिल इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार की यह मुहिम कानूनी सीमाओं का उल्लंघन करती है और चुनाव संचालन के राज्यस्तरीय अधिकारों पर सीधा हमला है। चीफ जज जेम्स बोसबर्ग ने चुनाव के दिन से ठीक पहले किसी भी संभावित संघीय कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर बेहद तेजी से सुनवाई करने का कार्यक्रम तय किया है।
चीफ जज जेम्स बोसबर्ग ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए स्पष्ट किया कि इस कानूनी याचिका पर उनका औपचारिक फैसला सोमवार तक आने की पूरी योजना है, जो कि मतदान दिवस से ठीक एक दिन पहले का समय है। यह कानूनी विवाद उस समय अदालत की दहलीज पर पहुंचा जब डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख नेताओं ने 20 अक्टूबर को अमेरिकी जिला अदालत में एक विस्तृत याचिका दाखिल की थी। इस मुकदमे का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा राज्यों के चुनाव संचालन तंत्र और मतदाता सूचियों के प्रबंधन में किए जा रहे कथित हस्तक्षेप पर तत्काल प्रभाव से अंकुश लगाना है।
डेमोक्रेटिक याचिकाकर्ताओं की मांगें और कानूनी आपत्तियां
अदालत में पेश की गई याचिका में डेमोक्रेटिक वादियों ने कई महत्वपूर्ण राहतों की मांग की है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि वह संघीय प्रशासन को कानूनी रूप से पंजीकृत मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से जबरन हटाने से रोकने के लिए औपचारिक निषेधाज्ञा जारी करे। इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ताओं ने किसी भी ऐसे संभावित कदम को रोकने की मांग की है जिससे राज्यों द्वारा मतदाताओं को मतपत्र जारी करने की प्रक्रिया बाधित हो सकती हो। इस कानूनी अर्जी में उन कदमों पर भी पूरी तरह रोक लगाने की मांग शामिल है जो स्थानीय चुनाव अधिकारियों को डाले गए मतपत्रों की गिनती करने से रोक सकते हैं। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने यह भी संकेत दिया कि प्रशासन चाहे तो अदालत में औपचारिक नोटिस दाखिल करके इस पूरे विवाद को समाप्त करने का मार्ग चुन सकता है।
मुकदमे में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जज बोसबर्ग ने प्रशासन को शुक्रवार तक एक व्यापक सूची सौंपने का स्पष्ट निर्देश जारी किया। इस सूची में उन सभी राज्य अधिकारियों का पूरा ब्योरा मांगा गया है जिन्हें न्याय विभाग की तरफ से आधिकारिक चेतावनी पत्र भेजे गए थे। अदालत और याचिकाकर्ताओं दोनों का मुख्य ध्यान इस पहलू पर टिका है कि क्या कैलिफोर्निया और वाशिंगटन जैसे राज्यों के अलावा भी अन्य राज्यों से इस सिलसिले में संपर्क किया गया था। न्याय विभाग द्वारा भेजे गए इन पत्रों में राज्यों को सख्त चेतावनी दी गई थी कि यदि राज्यव्यापी मतदाता सूचियों में गैर-नागरिकों के नाम जानबूझकर बनाए रखे गए, तो इसके लिए आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है।
अदालती बहस और कानूनी अधिकार का पेच
अदालत की सुनवाई के दौरान चीफ जज बोसबर्ग ने इस बुनियादी बिंदु की पड़ताल की कि क्या डेमोक्रेटिक समूहों को वास्तव में इस मामले में मुकदमा दायर करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में सबसे बड़ी कानूनी चुनौती याचिकाकर्ताओं का कानूनी अधिकार क्षेत्र तय करना है। न्यायाधीश ने अदालत कक्ष में कहा, "मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि आपकी चिंताएं वैध हैं। मेरे लिए अधिक कठिन प्रश्न यह है कि इसे अदालत में चुनौती देने का आपका कानूनी अधिकार क्या है।"
दूसरी ओर, न्याय विभाग के वकील क्रिश्चियन डिब्ली ने प्रशासन के रुख का बचाव करते हुए तर्क दिया कि केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए पत्र राज्यों पर कोई कार्रवाई करने का दबाव नहीं बनाते हैं। क्रिश्चियन डिब्ली ने अदालत में कहा, "यह पूरी तरह उन पर निर्भर है। यह उनका अपना फैसला है। यह पत्र उन्हें केवल संघीय कानून के संभावित उल्लंघन के बारे में सूचित करता है।" इसके साथ ही प्रशासन के वकीलों ने डेमोक्रेटिक पार्टी की कानूनी मांग को जरूरत से ज्यादा व्यापक और अस्पष्ट करार देते हुए खारिज करने की मांग की।
कैलिफोर्निया का विवाद और मतपत्रों की जांच
दाखिल मुकदमे में कैलिफोर्निया में हाल ही में की गई संघीय कार्रवाई को केंद्र सरकार के कथित हस्तक्षेप के सबसे प्रमुख उदाहरण के रूप में पेश किया गया। कैलिफोर्निया में न्याय विभाग ने राज्य के स्थानीय अधिकारियों को कुछ डाक मतपत्रों की गिनती करने से रोकने के लिए सीधे मुकदमा दायर किया था। संघीय सरकार का यह दावा था कि वे मतपत्र उन व्यक्तियों द्वारा डाले गए थे जिन्हें प्रशासन ने संभावित रूप से गैर-नागरिक के रूप में चिह्नित किया था। न्याय विभाग ने अदालत से मांग की थी कि संबंधित मतदाताओं की आव्रजन स्थिति की पुष्टि होने तक उन मतपत्रों की गिनती पर अस्थायी रोक लगाई जाए।
हालांकि, बुधवार को एक संघीय न्यायाधीश ने इस मामले में कैलिफोर्निया राज्य के पक्ष में अपना फैसला सुना दिया। न्याय विभाग ने इस न्यायिक आदेश के खिलाफ तुरंत ऊपरी अदालत में अपील दायर कर दी। प्रशासन के वकीलों का कहना है कि सरकार के पास इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि गैर-नागरिकों ने मतदान किया है या वे अवैध रूप से मतदान करेंगे। इसके विपरीत, राज्यों की अपनी आधिकारिक समीक्षाओं और संघीय जांचों के ऐतिहासिक निष्कर्ष यह दिखाते रहे हैं कि गैर-नागरिकों द्वारा मतदान की ऐसी घटनाएं अत्यंत दुर्लभ हैं।
मुकदमे के पक्षकार और राजनीतिक पृष्ठभूमि
इस हाई-प्रोफाइल मुकदमे में डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने सीधे तौर पर मोर्चा संभाला है। याचिकाकर्ताओं में सीनेट अल्पसंख्यक नेता चक शूमर और प्रतिनिधि सभा के अल्पसंख्यक नेता हकीम जेफ्रीज शामिल हैं। इसके अलावा कई प्रमुख राजनीतिक इकाइयां भी इस मुकदमे में वादी बनी हैं, जिनमें डेमोक्रेटिक सीनेटोरियल कैंपेन कमेटी और डेमोक्रेटिक कांग्रेसनल कैंपेन कमेटी शामिल हैं। डेमोक्रेटिक गवर्नर्स एसोसिएशन ने भी इस कानूनी लड़ाई में अपनी औपचारिक भागीदारी दर्ज कराई है। वादियों के वकील उज़ोमा न्क्वोंटा ने अदालत से जोरदार अपील करते हुए आग्रह किया कि राज्यों की मतदान प्रक्रिया में संघीय दखल को तुरंत रोका जाए।
मुकदमे में प्रतिवादियों के तौर पर स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, न्याय विभाग और अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच को नामजद किया गया है। इसके साथ ही डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी और उसके सचिव मार्कवेन मुलिन को भी औपचारिक प्रतिवादी बनाया गया है। इस पूरे मुकदमे की मूल मांग यह है कि अदालत राज्यों की स्वतंत्र चुनाव प्रक्रियाओं को किसी भी प्रकार के संघीय दबाव से पूरी सुरक्षा प्रदान करे और पंजीकृत मतदाताओं को मतदाता सूचियों से अनुचित तरीके से बाहर किए जाने के प्रयासों से बचाए।
डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा नियुक्त किए गए चीफ जज बोसबर्ग पहले भी व्हाइट हाउस के तीखे हमलों का सामना कर चुके हैं। पिछले वर्ष जज बोसबर्ग द्वारा एलियन एनिमीज एक्ट के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने के बाद ट्रंप और उनके राजनीतिक सहयोगियों ने जज के महाभियोग की मांग तक उठा दी थी। उस ऐतिहासिक फैसले ने वेनेजुएला के प्रवासियों को अल सल्वाडोर भेजे जाने वाली निर्वासन उड़ानों पर पूर्ण विराम लगा दिया था। अब यह नया चुनावी मुकदमा कानूनी अधिकार क्षेत्र के तकनीकी सवाल और सोमवार को आने वाले अहम अदालती फैसले के इर्द-गिर्द घूम रहा है।



















