भारत में म्यूचुअल फंड निवेश तेजी से बढ़ रहा है। वित्तीय साक्षरता में सुधार, एम्फी (AMFI) द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान और जिरोधा, ग्रो और अपस्टॉक्स जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सुलभता ने इसे काफी आसान बना दिया है। जो निवेशक लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप की सीमाओं से परे जाकर अपने पोर्टफोलियो में विविधता चाहते हैं, उनके लिए मल्टी-कैप म्यूचुअल फंड एक बेहतरीन विकल्प साबित हो रहे हैं।
मल्टी-कैप फंड क्या होते हैं?
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के अनुसार, मल्टी-कैप फंड्स को अपनी कुल संपत्ति का कम से कम 75 फीसदी हिस्सा इक्विटी और संबंधित साधनों में निवेश करना अनिवार्य है। पोर्टफोलियो का ढांचा इस तरह तैयार किया जाता है कि इसमें 25 फीसदी लार्ज-कैप, 25 फीसदी मिड-कैप और 25 फीसदी स्मॉल-कैप स्टॉक्स में निवेश होता है।
25-25-25 आवंटन का महत्व
यह अनिवार्य आवंटन नियम फंड मैनेजर को पोर्टफोलियो के हर हिस्से में संतुलन बनाने के लिए बाध्य करता है। लार्ज-कैप कंपनियां बाजार में स्थिरता प्रदान करती हैं क्योंकि ये स्थापित होती हैं और इनका वित्तीय आधार मजबूत होता है। वहीं, मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियां विकास की अपार संभावनाएं लेकर आती हैं, हालांकि इनमें जोखिम और अस्थिरता का स्तर भी ज्यादा होता है। यह 25-25-25 का मिश्रण निवेशकों को बाजार के विभिन्न चक्रों में सुरक्षा और विकास का तालमेल बिठाने में मदद करता है।
पिछले 3 वर्षों में सबसे अधिक रिटर्न देने वाले 5 मल्टी-कैप फंड
एम्फी (AMFI) के 24 जून, 2026 तक के आंकड़ों के आधार पर, यहाँ शीर्ष पांच मल्टी-कैप म्यूचुअल फंड की सूची दी गई है जिन्होंने तीन साल की अवधि में शानदार प्रदर्शन किया है।
- एचएसबीसी मल्टी कैप फंड: लेटेस्ट एनएवी 20.60, 3 साल का रिटर्न 22.46 फीसदी
- कोटक मल्टीकैप फंड: लेटेस्ट एनएवी 21.42, 3 साल का रिटर्न 22.18 फीसदी
- बैंक ऑफ इंडिया मल्टीकैप फंड: लेटेस्ट एनएवी 20.24, 3 साल का रिटर्न 21.51 फीसदी
- एक्सिस मल्टीकैप फंड: लेटेस्ट एनएवी 19.63, 3 साल का रिटर्न 21.18 फीसदी
- आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल मल्टीकैप फंड: लेटेस्ट एनएवी 960.03, 3 साल का रिटर्न 20.04 फीसदी
मल्टी-कैप फंड के फायदे और जोखिम
इन फंड्स का सबसे बड़ा लाभ इसमें मिलने वाली अंतर्निहित विविधता है, जो बड़े और उभरते दोनों प्रकार के व्यवसायों में जोखिम को फैला देती है। यह निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान लंबे समय तक निवेशित रहने में मदद करता है। दूसरी ओर, इसमें स्मॉल-कैप के कारण आने वाली अस्थिरता और लिक्विडिटी का जोखिम शामिल है। साथ ही, नियम के कारण बाजार की अस्थिरता के दौरान फंड मैनेजर लार्ज-कैप में अपना हिस्सा मनमुताबिक नहीं बढ़ा सकते, जो कभी-कभी रिटर्न पर असर डाल सकता है।













