भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (आईआईबीएक्स) पर स्पेशल कैटेगरी क्लाइंट के रूप में सोने का अपना पहला लेनदेन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। देश के सर्राफा आयात तंत्र में इसे एक बड़े और व्यावहारिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस कदम का सीधा मकसद कीमती धातुओं के आयात को ज्यादा पारदर्शी, कुशल और आसान बनाना है, जिससे विशेष रूप से छोटे और मध्यम वर्ग के आभूषण निर्माताओं (एमएसएमई ज्वेलर्स) को सीधा लाभ मिल सके।
सर्राफा आयात को आधुनिक बनाने की दिशा में रणनीतिक कदम
सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक का आईआईबीएक्स मंच से जुड़ना वित्तीय नवाचार और वित्तीय समावेशन के प्रति उसके रुख को दर्शाता है। पारंपरिक तरीकों पर निर्भरता घटाने के लिए बैंक इस अंतरराष्ट्रीय मंच के आधुनिक बुनियादी ढांचे का उपयोग कर रहा है। सोने की खरीद और आयात प्रक्रिया को सरल बनाकर बैंक देश भर के ज्वेलर्स, बुलियन डीलर्स और अन्य संबंधित कारोबारियों को बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने में सहयोग प्रदान करेगा।
साल 2024 में एसबीआई ट्रेडिंग-कम-क्लियरिंग मेंबर के रूप में आईआईबीएक्स से जुड़ने वाला पहला बैंक बना था। यह कदम गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) को एक वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना गया। साथ ही यह कदम भारत में सर्राफा कारोबार को आधुनिक और पूरी तरह औपचारिक रूप देने के सरकारी प्रयासों से भी मेल खाता है।
लागत में कमी और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन
एसबीआई के चेयरमैन सी एस सेट्टी ने कहा कि यह साझेदारी वित्तीय सेवाओं में बैंक की अग्रणी भूमिका को मजबूत करती है और बुलियन आयात को लागत के लिहाज से अधिक किफायती बनाती है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस व्यवस्था से आयातकों से लेकर आभूषण उद्योग के अंतिम उपभोक्ताओं तक सभी हितधारकों को सीधा लाभ पहुंचेगा, क्योंकि पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संचालित होती है।
एक्सचेंज के जरिए प्रत्यक्ष खरीदारी की सुविधा मिलने से बाजार में लिक्विडिटी में सुधार होगा और कारोबारियों को प्रतिस्पर्धी मूल्य मिल सकेंगे। इससे भारत के सर्राफा और रत्न-आभूषण उद्योग के सतत विकास को भी मजबूती मिलेगी। बाजार जानकारों का मानना है कि एसबीआई की इस पहल के बाद अन्य नामांकित बैंक भी आईआईबीएक्स से स्पेशल कैटेगरी क्लाइंट्स के रूप में जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे इस पूरे क्षेत्र की आपूर्ति संबंधी जरूरतें तेजी से पूरी की जा सकेंगी।


















