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कब्जा मिलने के बाद भी बिल्डर से हर्जाना मांग सकते हैं घर खरीदार, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसलामनी
27 जून 2026, 8:04 am (46 दिन पहले)· 4

कब्जा मिलने के बाद भी बिल्डर से हर्जाना मांग सकते हैं घर खरीदार, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि फ्लैट का कब्जा मिलने के बाद भी घर खरीदार पजेशन में देरी या सेवाओं में कमी के लिए उपभोक्ता फोरम में बिल्डर के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं और हर्जाना मांग सकते हैं।

देशभर के महानगरों में फ्लैट या मकान खरीदने वाले लोगों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर आई है। दिल्ली-एनसीआर समेत भारत के तमाम बड़े शहरों में घर खरीदारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय पर फ्लैट का कब्जा न मिलना रही है। अपनी गाढ़ी कमाई लगाने के बाद भी लोगों को सालों तक मकान के लिए भटकना पड़ता है। ऐसे अनगिनत मामले RERA, उपभोक्ता अदालतों और विभिन्न न्यायालयों में लंबित पड़े हैं। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों के अधिकारों की रक्षा करते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी खरीदार को उसके मकान का कब्जा मिल भी जाता है, तो भी वह बिल्डर के खिलाफ शिकायत करने के अपने कानूनी अधिकार से वंचित नहीं होता। कब्जा मिलने के बाद भी देरी या सेवाओं में कमी के लिए बिल्डर के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

उपभोक्ता फोरम से हर्जाना मांगने का अधिकार बरकरार

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में साफ किया है कि डेवलपर्स द्वारा कब्जा सौंपने में की गई देरी के खिलाफ घर खरीदार उपभोक्ता फोरम का रुख कर सकते हैं और हर्जाने की मांग कर सकते हैं। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के पुराने फैसले को पूरी तरह पलट दिया है। NCDRC ने पहले यह व्यवस्था दी थी कि एक बार यदि खरीदार फ्लैट या मकान का कब्जा ले लेता है, तो वह बाद में पजेशन में हुई देरी के लिए किसी भी तरह की शिकायत या मुआवजे की मांग नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि खरीदार और विक्रेता के बीच हस्ताक्षरित ऐसा कोई भी समझौता या एग्रीमेंट उपभोक्ताओं के अधिकारों और हितों को सीमित या समाप्त नहीं कर सकता है।

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22 साल के लंबे इंतजार के बाद आया फैसला

यह महत्वपूर्ण निर्णय सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे पीड़ित घर खरीदार के मामले की सुनवाई के दौरान दिया, जिसे बिल्डर ने फ्लैट की बुकिंग के पूरे 22 साल बाद पजेशन दिया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी माहना की खंडपीठ ने इस मामले में उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पजेशन मिलने के बावजूद देरी के लिए मुआवजे की मांग करने के अधिकार को सुरक्षित रखा। इस मामले के तहत खरीदार ने दिल्ली-एनसीआर के द्वारका इलाके में एक फ्लैट खरीदा था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि NCDRC की ओर से बनाया गया कोई भी तकनीकी नियम या प्रतिबंध उपभोक्ता के व्यापक हितों के आड़े नहीं आ सकता।

NCDRC के पुराने नियम को कोर्ट ने किया खारिज

सुप्रीम कोर्ट के इस नए फैसले से पहले तक, NCDRC का नियम खरीदारों के लिए बड़ी मुसीबत बना हुआ था। इस नियम के अनुसार, यदि किसी खरीदार ने मकान का कब्जा लेने से पहले देरी के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी, तो कब्जा मिलने के बाद वह शिकायत दर्ज कराने या हर्जाना हासिल करने के अयोग्य हो जाता था। इस मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो पीड़ित घर खरीदार ने साल 2005 में जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष अपनी पहली शिकायत दर्ज कराई थी। एक लंबी कानूनी लड़ाई और आखिरकार फ्लैट का कब्जा मिलने के बाद भी उन्होंने न्याय और राहत के लिए अपनी अपील जारी रखी, जिसे अब सर्वोच्च न्यायालय ने पूरी तरह से सही ठहराया है।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला घर खरीदारों के बारे में क्या कहता है?
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि फ्लैट या मकान का कब्जा मिलने के बाद भी खरीदार पजेशन में हुई देरी या खराब सेवाओं के लिए बिल्डर के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं और हर्जाने की मांग कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने NCDRC के किस नियम को उलट दिया है?
कोर्ट ने NCDRC के उस नियम को रद्द कर दिया जिसके तहत कब्जा मिलने के बाद देरी के लिए शिकायत करने या मुआवजे की मांग करने पर रोक थी।
क्या बिल्डर और खरीदार के बीच हुआ कोई एग्रीमेंट इस अधिकार को रोक सकता है?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि खरीदार और विक्रेता के बीच का कोई भी समझौता या एग्रीमेंट उपभोक्ताओं के अधिकारों और हितों को सीमित नहीं कर सकता।
यह ऐतिहासिक फैसला किस मामले की सुनवाई के दौरान आया?
यह फैसला दिल्ली-एनसीआर के द्वारका में एक फ्लैट के मामले में आया, जहां बिल्डर ने खरीदार को बुकिंग के 22 साल बाद पजेशन दिया था।
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