स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने वाले लोगों के लिए आज कई ऐसे छोटे उद्योग मौजूद हैं, जिन्हें बेहद सीमित पूंजी से शुरू किया जा सकता है। खास बात यह है कि केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से भी इन उद्यमों को वित्तीय सहायता और सब्सिडी के जरिए लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे पांच चुनिंदा व्यवसायों पर नजर डालते हैं जो कम समय में स्थिर और बड़ा मुनाफा देने की पूरी क्षमता रखते हैं।
अचार और मुरब्बा निर्माण में भारी मुनाफा
पारंपरिक खानपान से जुड़े उत्पाद हमेशा बाजार में मांग में बने रहते हैं। अचार और मुरब्बा बनाने की इकाई आप महज 10 हजार रुपये की शुरुआती पूंजी से लगा सकते हैं। इसे सूक्ष्म उद्योग श्रेणी के तहत पंजीकृत कराकर सरकार से 25 प्रतिशत तक की सब्सिडी हासिल की जा सकती है। गुणवत्ता और स्वाद पर ध्यान दिया जाए तो स्थानीय खुदरा दुकानों से लेकर थोक मंडियों तक इसे बेचकर हर महीने लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं।
मुर्गी पालन पर पचास फीसदी से ज्यादा अनुदान
पशुपालन और पोल्ट्री का क्षेत्र ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में लगातार तेजी से बढ़ रहा है। मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक लोगों को सरकार 50 प्रतिशत से भी अधिक का अनुदान प्रदान करती है। इस काम में पूंजी की वापसी तेजी से होती है और कुछ ही महीनों के चक्र में चूजों की देखभाल और बिक्री से लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है।
दैनिक उपयोग के झाड़ू बनाने का काम
सफाई सामग्री हर घर, दफ्तर और संस्थान की बुनियादी जरूरत है। झाड़ू तैयार करने का काम घर के किसी छोटे हिस्से से भी आसानी से शुरू किया जा सकता है। एक झाड़ू के निर्माण में आमतौर पर 10 से 15 रुपये की लागत आती है, जबकि बाजार में इसकी बिक्री 25 से 30 रुपये में होती है। इस तरह प्रत्येक झाड़ू पर 10 से 15 रुपये की सीधी बचत होती है। अगर कोई व्यक्ति प्रतिदिन केवल 50 झाड़ू भी तैयार कर लेता है, तो उसकी दैनिक आय 500 रुपये और मासिक आमदनी 15 से 20 हजार रुपये के बीच आराम से पहुंच जाती है।
दोना पत्तल मेकिंग में निशुल्क मशीन की सुविधा
डिस्पोजेबल कटलरी की मांग शादी-ब्याह, सामाजिक आयोजनों और खानपान के ठेलों पर पूरे साल बनी रहती है। दोना पत्तल निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए जिला खादी ग्राम उद्योग विभाग द्वारा निशुल्क मशीनरी उपलब्ध कराई जाती है। गांव और शहर दोनों स्तरों पर मजबूत मांग के चलते उद्यमी इस मशीन के संचालन से हर महीने 40 से 50 हजार रुपये की नियमित कमाई कर सकते हैं।
पोषाहार उत्पादन इकाई और बाल विकास विभाग
आंगनबाड़ी केंद्रों और पोषण अभियानों के कारण पोषाहार निर्माण का क्षेत्र काफी बड़ा अवसर बनकर उभरा है। इस उद्योग की सरकारी शाखा संचालित करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग में संपर्क कर आवेदन देना होता है। इस इकाई के तहत गेहूं का आटा, दलिया, चावल और पारंपरिक पंजीरी जैसे पौष्टिक आहार तैयार किए जाते हैं। सरकारी खरीद और बड़े पैमाने पर आपूर्ति सुनिश्चित होने से इस व्यवसाय में लाखों रुपये का बड़ा मुनाफा अर्जित किया जा सकता है।

















