अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की रफ्तार सुस्त पड़ने और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी आने से सिंगापुर डॉलर को नया सहारा मिला है। मजबूत अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) और उम्मीद से बेहतर खुदरा बिक्री आंकड़ों के बावजूद अमेरिकी डॉलर अपनी बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रहा है। ओसीबीसी के रणनीतिकारों सिम मोह सियोंग और क्रिस्टोफर वोंग के अनुसार, मुद्रा जोड़ी यूएसडी/एसजीडी में हालिया तेजी अब फीकी पड़ रही है और इस उछाल के एक 'फॉल्स ब्रेक' यानी झूठे ब्रेकआउट में तब्दील होने की संभावना बढ़ गई है। बाजार में दैनिक गति मंद पड़ने लगी है और रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) भी जरूरत से ज्यादा खरीदारी वाले ओवरबॉट क्षेत्र से नीचे फिसल गया है।
तकनीकी स्तरों पर बढ़ता दबाव और समर्थन स्तर
मुद्रा जोड़ी यूएसडी/एसजीडी हाल के कारोबारी घंटों में 1.2820 के आसपास देखी गई, जबकि लाइव सत्र में भाव 1.28 के स्तर पर बना हुआ है, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 0.15 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। 52 हफ्तों के दौरान इस जोड़ी का दायरा 1.26 से 1.31 के बीच रहा है। दैनिक तकनीकी चार्ट पर गौर करें तो शुरुआती स्तर पर बनी तेजी की रफ्तार अब स्पष्ट रूप से कमजोर हो रही है। दैनिक आरएसआई 53 के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे संकेत मिलता है कि खरीदारी का आक्रामक दबाव अब शांत हो रहा है। इसके साथ ही मूविंग एवरेज की स्थिति देखें तो 50-दिवसीय ईएमए 200-दिवसीय ईएमए से नीचे रहते हुए डेथ क्रॉस की स्थिति दर्शा रहा है, जो दीर्घकालिक मंदी की प्रवृत्ति का समर्थन करता है।
ओसीबीसी विश्लेषकों ने ट्रेडर्स के लिए प्रमुख स्तरों को रेखांकित किया है। नीचे की तरफ पहला मजबूत समर्थन 1.2790 पर स्थित है, जहां 21-दिवसीय और 200-दिवसीय डेली मूविंग एवरेज (डीएमए) मौजूद हैं। यदि यह स्तर टूटता है, तो अगला महत्वपूर्ण सहारा 1.2750 पर देखा जाएगा, जो 50-दिवसीय मूविंग एवरेज से मेल खाता है। दूसरी ओर, यदि मुद्रा जोड़ी में कोई सुधारात्मक बढ़त आती है, तो उसे 1.2840 पर तात्कालिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। इस स्तर से ऊपर निकलने पर जोड़ी को अपने हालिया उच्च स्तर 1.2870 की कड़ी बाधा को पार करना होगा। हफ्ते के अंत तक की क्लोजिंग यह तय करने में निर्णायक साबित होगी कि हालिया उछाल महज एक अस्थायी हलचल थी या आगे गिरावट बढ़ेगी।
फेडरल रिजर्व का रुख और प्रमुख मुद्राओं में हलचल
अमेरिकी डॉलर पर ताजा दबाव केवल सिंगापुर डॉलर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक मुद्रा बाजार पर चौतरफा देखा जा रहा है। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष वॉर्श की हालिया टिप्पणियों ने डॉलर पर बिकवाली के दबाव को और बढ़ा दिया। वॉर्श ने स्पष्ट किया कि वे अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने आने वाले समय में ब्याज दरों के मार्ग पर कोई ठोस संकेत देने से परहेज किया। इस अनिर्णायक और सतर्क रुख के बाद डॉलर में मुनाफावसूली का दौर तेज हो गया।
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले अपनी बढ़त को तेज किया और एयूडी/यूएसडी उछलकर 0.6950 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं दूसरी ओर, डॉलर की भारी बिकवाली के चलते यूएसडी/जेपीवाई पर भी जबर्दस्त दबाव देखने को मिला और यह जोड़ी गिरकर 158.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गई। ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की संभावनाओं के अभाव में ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड्स नीचे आई हैं, जिससे डॉलर इंडेक्स कमजोर हुआ है।
सोने में तेजी, इक्विटी और क्रिप्टो पर दबाव
डॉलर के कमजोर पड़ने और अमेरिकी यील्ड में आई गिरावट का सीधा फायदा बहुमूल्य धातुओं को मिला है। सोना लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज करते हुए 4,180 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। सोने के खरीदारों की नजर अब अक्टूबर के ऊपरी ट्रेडिंग रेंज 4,230 डॉलर के लक्ष्य पर टिकी है। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की ओर से दिए गए नरम बयानों ने ग्रीनबैक के प्रति सट्टेबाजी वाले समर्थन को काफी नुकसान पहुंचाया है, जिससे सोने में सुरक्षित निवेश प्रवाह बढ़ा है।
इसके विपरीत, जोखिम वाली संपत्तियों के लिए माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अमेरिकी शेयर बाजार संघर्ष कर रहे हैं क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक जोखिम भरी इक्विटी से निकलकर सरकारी सॉवरेन बॉन्ड का रुख कर रहे हैं। अमेरिकी कंपनियों के नतीजों और मध्यावधि चुनावों पर बाजार की पैनी नजर है, विशेषकर तकनीकी क्षेत्र में कमजोरी देखी जा रही है। ब्रिटेन में भी आगामी नौकरियों और मुद्रास्फीति के आंकड़े बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों को चुनौती दे सकते हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार भी अक्टूबर महीने में दबाव से उबरने की कोशिश कर रहा है। व्यापक आर्थिक प्रतिकूलताओं और ठंडी पड़ती मांग के कारण बिटकॉइन (बीटीसी) इस सप्ताह की शुरुआत में 80,000 डॉलर से नीचे गिर गया था। हालांकि, बाद में इसमें सीमित सुधार हुआ और यह 82,000 डॉलर के आसपास आ गया। कुल मिलाकर, वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय केंद्रीय बैंकों की भविष्य की नीतियों और घटती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स के आधार पर मुद्राओं का पुनर्मूल्यांकन हो रहा है।


















