ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था ने विपरीत परिस्थितियों के बीच लगातार लचीलापन दिखाया है, जिससे वैश्विक मुद्रा विनिमय बाजार में ब्रिटिश पाउंड को उल्लेखनीय मजबूती मिली है। अगस्त महीने के सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों ने लगातार चौथे महीने विश्लेषकों के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। इस आर्थिक मजबूती ने केंद्रीय बैंक यानी बैंक ऑफ इंग्लैंड को अर्थव्यवस्था को बिना किसी बड़े झटके के ब्याज दरों में वृद्धि जारी रखने का जरूरी अवसर प्रदान किया है। इसके साथ ही सरकार के राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की योजनाओं पर बना दबाव भी काफी हद तक हल्का हुआ है।
सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों से केंद्रीय बैंक को मिली राहत
आर्थिक वृद्धि के हालिया आंकड़े यह संकेत देते हैं कि ब्रिटेन का उत्पादन ढांचा मंदी की गंभीर आशंकाओं के बीच भी स्थिर बना हुआ है। लगातार चार महीनों तक अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन करने के कारण वित्तीय बाजार में यह विश्वास जागा है कि नीति निर्माता सख्त मौद्रिक रुख बनाए रख सकते हैं। आमतौर पर जब अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही होती है, तब केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरें बढ़ाना जोखिम भरा माना जाता है क्योंकि इससे मंदी का खतरा गहरा जाता है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक स्थिरता बैंक ऑफ इंग्लैंड को यह सुविधा देती है कि वह मंदी को न्योता दिए बिना महंगाई पर लगाम लगाने के लिए कदम उठा सके।
कॉमर्ज बैंक की विश्लेषक थू लैन गुयेन का मानना है कि अर्थव्यवस्था की यह मजबूती कई मायनों में काफी उत्साहजनक है। उनके अनुसार, इससे केंद्रीय बैंक के पास पहले से लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना दरों को बढ़ाने की गुंजाइश बन गई है। इसके अलावा, बजट घाटे को कम करने की दिशा में प्रयासरत चांसलर को भी इन आंकड़ों से जरूरी राहत मिली है। सरकार को अब ऊर्जा संकट और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन तलाशने के लिए कुछ अतिरिक्त समय और अनुकूल माहौल मिल गया है।
ऊर्जा राहत और बजट घाटे के बीच संतुलन की चुनौती
वित्तीय बाजारों की सबसे बड़ी चिंता आगामी बजट को लेकर बनी हुई है, जिसे महीने के अंत में औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया जाना है। चांसलर के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे आम परिवारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को ऊर्जा की अत्यधिक बढ़ती लागत से राहत कैसे प्रदान करते हैं, जबकि साथ ही उन्हें सरकारी राजकोषीय घाटे को भी सीमित रखना है। बाजार ने इस बात पर भरोसा जताया है कि सरकार ऊर्जा सहायता और वित्तीय अनुशासन के बीच एक व्यावहारिक समझौता तैयार कर लेगी। इसी भरोसे के दम पर यूरो के मुकाबले पाउंड का विनिमय अनुपात यानी EUR/GBP फिसलकर इस साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
बाजार में इस सकारात्मक धारणा के बावजूद विश्लेषकों ने आगाह किया है कि राजकोषीय जोखिमों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। महीने के अंत में आने वाले बजट में अगर खर्च और उधारी को लेकर संतुलन नहीं बैठा, तो यह मुद्रा बाजार के लिए नई अनिश्चितता पैदा कर सकता है। ऊर्जा सब्सिडी के भारी भरकम बोझ और राजस्व संग्रह के बीच की खाई को पाटना सरकार के लिए सबसे पेचीदा कार्य बना हुआ है।
अमेरिकी डॉलर में बिकवाली और अन्य मुद्राओं का रुख
वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर को व्यापक बिकवाली के दबाव का सामना करना पड़ रहा है। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष वॉर्श की हालिया टिप्पणियों के बाद अमेरिकी डॉलर सूचकांक कमजोर हुआ है। वॉर्श ने स्पष्ट किया कि वे कीमत स्थिरता बहाल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने ब्याज दरों के भविष्य के रास्ते को लेकर कोई निश्चित संकेत नहीं दिया। इस अनिर्णय भरी टिप्पणी के कारण व्यापारियों ने डॉलर में मुनाफावसूली शुरू कर दी।
इस डॉलर कमजोरी का सीधा लाभ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मिला है। शुक्रवार के एशियाई सत्र के दौरान AUD/USD जोड़ी ने अपनी गति वापस हासिल की और 0.6950 के स्तर की ओर उछाल दर्ज किया। दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY पर भी तेज बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे यह जोड़ी शुक्रवार के एशियाई सत्र में 158.00 का अहम मनोवैज्ञानिक स्तर गंवा बैठी।
सोने में दो दिन की तेजी और सुरक्षित निवेश की मांग
कमजोर होते डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने कीमती धातुओं के बाजार को जोरदार सहारा दिया है। सोना लगातार दूसरे कारोबारी दिन बढ़त दर्ज करते हुए 4,180 डॉलर के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। तकनीकी चार्ट पर तेजी के समर्थक खरीदार अब 4,230 डॉलर के क्षेत्र को लक्षित कर रहे हैं, जो अक्टूबर महीने के कारोबारी दायरे की ऊपरी सीमा है। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की ओर से सप्ताह के दौरान दिए गए नरम रुख वाले बयानों ने सटोरिया डॉलर खरीदारों के आत्मविश्वास को कमजोर किया है, जिसका पूरा फायदा सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर मिला है।
क्रिप्टो बाजार का उतार-चढ़ाव और शेयर बाजारों की सुस्ती
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार के लिए अक्टूबर का महीना अब तक काफी दबाव भरा रहा है। सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन इस सप्ताह की शुरुआत में फिसलकर 80,000 डॉलर के नीचे चली गई थी। हालांकि, शुक्रवार को इसमें कुछ सुधार देखने को मिला और यह सुधरकर लगभग 82,000 डॉलर के स्तर पर आ गई। व्यापक वृहद आर्थिक प्रतिकूलताओं और निवेशकों की घटती मांग ने पूरे क्रिप्टो बाजार पर दबाव बनाए रखा है।
अमेरिकी शेयर बाजार भी इस दौरान संघर्ष करते दिखे हैं, क्योंकि जोखिम से बचने की धारणा के चलते निवेशकों ने अपना ध्यान सरकारी बॉन्ड की ओर मोड़ लिया है। टेक सेक्टर में छाई कमजोरी के बीच निवेशकों की निगाहें आगामी अमेरिकी कंपनियों के नतीजों और मध्यावधि चुनावों पर टिकी हुई हैं। इस बीच, आने वाले दिनों में ब्रिटेन के रोजगार और महंगाई के आंकड़े भी जारी होने हैं, जो बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी से जुड़े मौजूदा अनुमानों को नई चुनौती दे सकते हैं।



















