व्यावसायिक पोल्ट्री फार्मिंग में लगे पशुपालकों के लिए सबसे अहम फैसला उपयुक्त पक्षी नस्ल का चयन करना होता है। सही नस्ल चुनने से न केवल अंडों का दैनिक उत्पादन बढ़ता है, बल्कि दाने की खपत और रख-रखाव पर होने वाला खर्च भी काफी घट जाता है। आज बाजार में कुछ ऐसी खास नस्लें मौजूद हैं जो साल भर नियमित अंतराल पर भारी मात्रा में अंडे देती हैं, जिससे किसानों को निरंतर आय मिलती रहती है।
सफेद अंडों की चैंपियन लेगहॉर्न
सफेद अंडों की श्रेणी में लेगहॉर्न को दुनिया भर में सबसे अव्वल उत्पादक माना गया है। यह पक्षी प्रति वर्ष 280 से लेकर 320 या उससे भी अधिक अंडे देने में पूरी तरह सक्षम है। इसकी शारीरिक संरचना हल्की होती है, जिस वजह से इसे काफी कम चारे की आवश्यकता पड़ती है। न्यूनतम देखभाल और तेज विकास दर के चलते बड़े पैमाने पर अंडा उत्पादन करने वाले फार्म मालिक इसे पहली पसंद मानते हैं।
लगातार आपूर्ति देने वाली लोहमैन ब्राउन
बाजार में भूरे रंग के अंडों की मांग लगातार बनी रहती है और इसी मांग को पूरा करने के लिए लोहमैन ब्राउन नस्ल सबसे मुफीद साबित होती है। व्यावसायिक पोल्ट्री सेटअप में यह नस्ल अपनी निरंतरता के लिए जानी जाती है, जिससे बाजार में आपूर्ति की कोई कमी नहीं होती। प्रीमियम बिक्री मूल्य मिलने के कारण फार्म संचालकों को इससे काफी अच्छा आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।
ईसा ब्राउन: जलवायु बदलाव झेलने वाली हाइब्रिड वैरायटी
बलिया स्थित श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पशुपालन और दुग्ध विज्ञान विभाग के प्रोफेसर धर्मेंद्र सिंह ने ईसा ब्राउन के गुणों की जानकारी दी है। उनके मुताबिक, यह हाइब्रिड किस्म बहुत ही कम आयु में अंडा उत्पादन शुरू कर देती है। इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब 300 अंडों की आंकी गई है। बदलते मौसम के प्रति अनुकूलन क्षमता बेहतर होने के कारण छोटे स्तर के ग्रामीण पशुपालक और बड़े कारोबारी दोनों ही इस संकर किस्म को प्राथमिकता देते हैं।
ठंडे मौसम की साथी ऑस्ट्रेलोर्प
काले चमकदार पंखों की बनावट वाली ऑस्ट्रेलोर्प नस्ल भी अंडा उत्पादकों के बीच काफी लोकप्रिय विकल्प है। इस पक्षी की सबसे बड़ी खूबी ठंड को आसानी से बर्दाश्त करने की प्राकृतिक शारीरिक क्षमता है। यह औसतन हर साल 250 या उससे अधिक अंडे दे सकती है। स्वभाव से बेहद शांत और अनुशासित होने की वजह से इसे घर के पिछवाड़े या खुले बाड़े में पालना काफी सुविधाजनक रहता है।
भारतीय परिवेश के अनुकूल रोड आइलैंड रेड
अगर मजबूत शारीरिक गठन और जबरदस्त रोग प्रतिरोधक क्षमता की बात करें, तो रोड आइलैंड रेड सबसे टिकाऊ मानी जाती है। यह नस्ल भारतीय जलवायु और यहां के प्राकृतिक वातावरण में बहुत सरलता से खुद को ढाल लेती है। सालाना 250 से ज्यादा अंडे देने की क्षमता रखने वाली यह किस्म पारंपरिक देसी परिस्थितियों में भी बेहद भरोसेमंद परिणाम देती है।
अन्य सक्षम किस्में और चयन के जरूरी नियम
इन मुख्य पांच वैरायटीज के अतिरिक्त गोल्डन कॉमेट, वायंडोट और ग्रामप्रिया भी अंडा उत्पादन की दृष्टि से काफी प्रभावी विकल्प सिद्ध होती हैं। पोल्ट्री विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी किस्म को अंतिम रूप देने से पूर्व स्थानीय पर्यावरण, चारे की नियमित सुलभता और क्षेत्रीय बाजार की मांग का सटीक आकलन कर लेना चाहिए। सही योजना के साथ चुनी गई नस्ल से उत्पादकता में भारी वृद्धि होती है और पशुपालकों की शुद्ध आय कई गुना बढ़ सकती है।


















