म्यूचुअल फंड के जरिए सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP करने वाले निवेशकों के बीच अक्सर यह बहस छिड़ी रहती है कि महीने की कौन सी तारीख निवेश के लिए सबसे सटीक है। बहुत से लोग महीने के शुरुआती दिनों को निवेश के लिए उत्तम मानते हैं, तो कुछ लोग मध्य या अंतिम सप्ताह को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, व्हाइटओक कैपिटल द्वारा हाल ही में किए गए एक विस्तृत अध्ययन ने इस अनिश्चितता को काफी हद तक हल कर दिया है। इस शोध का निष्कर्ष यह है कि लंबी अवधि में SIP की तारीख का रिटर्न पर बहुत ही नगण्य प्रभाव पड़ता है, इसलिए सही तारीख की तलाश करने के बजाय नियमित निवेश पर ध्यान केंद्रित करना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
28 साल के डेटा का विस्तृत विश्लेषण
यह विश्लेषण अगस्त 1996 से लेकर मई 2026 तक के BSE Sensex TRI यानी टोटल रिटर्न इंडेक्स के आंकड़ों को आधार बनाकर तैयार किया गया है। इसमें 10 साल के रोलिंग रिटर्न का गहराई से आकलन किया गया है। लगभग तीन दशकों के इन आंकड़ों को देखने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि अलग-अलग तारीखों पर किए गए निवेशों के औसत रिटर्न में कोई बड़ा अंतर नहीं है। इससे यह प्रमाणित होता है कि SIP की तारीख में बदलाव करने से लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता है।
रिटर्न में अंतर की वास्तविकता
अध्ययन के मुताबिक, निवेश के विभिन्न दिनों पर मिलने वाले औसत रिटर्न में केवल 0.06 प्रतिशत का अंतर दर्ज किया गया। इसमें सबसे अधिक औसत रिटर्न 13.42 प्रतिशत रहा, जबकि सबसे कम औसत रिटर्न 13.36 प्रतिशत देखा गया। यदि हम महीने के शुरुआती दिनों की बात करें, तो औसत रिटर्न 13.37 से 13.40 प्रतिशत के दायरे में रहा। इसी तरह, महीने के मध्य की तारीखों में यह आंकड़ा 13.39 से 13.40 प्रतिशत के बीच सिमटा हुआ दिखा। महीने के आखिरी दिनों में रिटर्न का स्तर थोड़ा सा अधिक रहा, लेकिन निवेश के नजरिए से यह अंतर इतना मामूली है कि इसे किसी भी तरह से निर्णायक नहीं माना जा सकता।
F&O एक्सपायरी और बाजार की अस्थिरता
निवेशकों का एक बड़ा वर्ग महीने के अंत में F&O यानी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस की एक्सपायरी के दौरान बाजार में होने वाली हलचल को देखकर अपनी SIP की तारीख चुनता है। उन्हें लगता है कि बाजार की ऐसी अस्थिरता से बचने या उसका लाभ उठाने के लिए सही तारीख का चयन आवश्यक है। हालांकि, शोध से यह स्पष्ट हो गया है कि F&O एक्सपायरी के आसपास किए गए निवेश का भी लॉन्ग टर्म रिटर्न अन्य दिनों के समान ही होता है। दरअसल, 10 साल या इससे अधिक के निवेश में बाजार की छोटी अवधि की उठापटक का प्रभाव अपने आप समाप्त हो जाता है।
क्या SIP को कई हिस्सों में बांटना सही है?
कुछ निवेशक अपनी मासिक निवेश राशि को दो या तीन किस्तों में बांटकर अलग-अलग तारीखों पर निवेश करना बेहतर समझते हैं। उनका तर्क है कि इससे औसत खरीद लागत कम हो सकती है। लेकिन अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति 10,000 रुपये का निवेश एक ही तारीख को करता है और दूसरा उसी रकम को दो तारीखों में बांटकर निवेश करता है, तो भी 10 साल बाद उनके निवेश मूल्य में न के बराबर अंतर होता है। यह अंतर केवल कुछ हजार रुपये का है, जो कुल पोर्टफोलियो के रिटर्न के सामने उपेक्षित किया जा सकता है।
सफलता के लिए सबसे जरूरी कदम
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि SIP में सफलता का असली मंत्र तारीख का चुनाव नहीं, बल्कि अनुशासन है। निवेशकों को जल्द से जल्द शुरुआत करने, बाजार की गिरावट में भी निवेश जारी रखने और समय के साथ अपनी SIP राशि को बढ़ाने पर अधिक जोर देना चाहिए। सबसे उपयुक्त तारीख वही है जिस दिन आपके खाते में वेतन या आय आती है, क्योंकि इससे अनुशासन बना रहता है और पैसा खर्च होने से पहले निवेश हो जाता है। किसी भी बड़े निर्णय से पहले हमेशा SEBI रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श अवश्य करें।













