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रूसी तेल खरीदारों पर अमेरिकी संसद में कड़ा विधेयक, 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रस्तावमनी
19 सित॰ 2026, 10:14 am (41 दिन पहले)· 0

रूसी तेल खरीदारों पर अमेरिकी संसद में कड़ा विधेयक, 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रूस और ईरान पर पाबंदियों से जुड़ा विधेयक आगे बढ़ गया है, जिससे राष्ट्रपति को रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है।

अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में एक नए विधायी कदम को मंजूरी की दिशा में आगे बढ़ाया गया है, जिससे रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले मुल्कों पर व्यापारिक दबाव काफी बढ़ सकता है। इस विधायी प्रस्ताव के कानून बनने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ऐसे देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का व्यापक अधिकार मिल जाएगा। सदन के भीतर हुई आधिकारिक चर्चा के दौरान भारत का नाम भी उन देशों में शामिल रहा जो रूस से ऊर्जा की खरीद जारी रखे हुए हैं। संसदीय प्रक्रिया से जुड़ी शुरुआती बाधाएं हटने के बाद अब यह मसौदा अंतिम मतदान के बेहद करीब पहुंच चुका है।

संसदीय समिति की मंजूरी और विधायी प्रक्रिया

इस प्रक्रिया के तहत 14 सितंबर को अमेरिकी हाउस रूल्स कमेटी में मतदान कराया गया, जहां इसे 7 के मुकाबले 3 मतों से आगे बढ़ाने का फैसला हुआ। इस विधेयक का आधिकारिक नाम 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' रखा गया है। समिति स्तर पर विचार-विमर्श के दौरान विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा रखे गए कई संशोधनों को खारिज कर दिया गया। इसके अगले दिन यानी 15 सितंबर को दोपहर के आसपास इस नियम पर सदन में व्यापक बहस शुरू हुई, जिसके बाद प्रतिनिधि सभा ने इसे अंतिम पारित करने की तैयारी पूरी की।

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सीनेट से पहले ही मिल चुका है भारी समर्थन

संसद के उच्च सदन यानी अमेरिकी सीनेट ने इस कानून को काफी पहले ही भारी बहुमत से हरी झंडी दे दी थी। सीनेट में 7 अगस्त को हुए मतदान में इस विधेयक के पक्ष में 86 वोट पड़े थे जबकि इसके विरोध में केवल 11 सदस्यों ने मतदान किया था। प्रतिनिधि सभा में यदि यह मसौदा अंतिम रूप से पारित हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए व्हाइट हाउस भेजा जाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर करते ही यह कानून का रूप ले लेगा, जिसके बाद यह पूरी तरह राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर करेगा कि वे किन देशों पर और किस स्तर तक शुल्क लागू करना चाहते हैं। इस प्रस्ताव के तहत किसी भी देश पर सीधे या स्वचालित रूप से 100 प्रतिशत शुल्क नहीं थोपा जाएगा।

रूसी कच्चे तेल का आयात और कूटनीतिक तनाव

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने के बाद से भारत ने बड़े पैमाने पर रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद की है। इस ऊर्जा व्यापार के कारण वॉशिंगटन और नई दिल्ली के कूटनीतिक संबंधों में कुछ तनाव भी देखने को मिला है। सदन में चर्चा के दौरान प्रतिनिधि स्टेनी होयर के नेतृत्व में डेमोक्रेटिक सदस्यों ने एक संशोधन पेश किया था, जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों की एक सूची दी गई थी। इस सूची में भारत के साथ-साथ चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान के नाम शामिल किए गए थे।

भारतीय निर्यात और द्विपक्षीय व्यापार पर असर

यह टैरिफ प्रावधान इसलिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि सीनेट का मूल विधेयक मुख्य रूप से रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े वैश्विक खरीदारों को लक्षित करता है। हालांकि इसमें सूचीबद्ध हर देश पर तुरंत या अनिवार्य रूप से नया कर नहीं लगाया जाएगा, फिर भी भारत के लिए यह जोखिम उसके निर्यात क्षेत्र को सीधे प्रभावित कर सकता है। अमेरिका वर्तमान में भारत के सबसे प्रमुख निर्यात बाजारों में से एक है। यदि किसी भी उत्पाद श्रेणी पर अतिरिक्त सीमा शुल्क लगाया जाता है, तो कई औद्योगिक क्षेत्रों में लागत और कीमतों पर भारी दबाव बन सकता है।

यदि अमेरिका इन व्यापारिक पाबंदियों का इस्तेमाल करता है, तो भारतीय निर्यात के प्रमुख खंडों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वित्तीय और व्यापारिक बाजार अब प्रतिनिधि सभा में होने वाले अंतिम मतदान और उसके बाद व्हाइट हाउस के रुख पर नजर बनाए हुए हैं। इस कानून का मूल उद्देश्य आयात शुल्क तय करने में अमेरिकी राष्ट्रपति के विवेकाधिकार को 100 प्रतिशत तक बढ़ाना है। भारत पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस नए कानूनी अधिकार का उपयोग किस तरह करते हैं, जो आने वाले समय में ऊर्जा कूटनीति और द्विपक्षीय वस्तु व्यापार दोनों की दिशा तय कर सकता है।

सवाल-जवाब

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में किस विधेयक को आगे बढ़ाया गया है?
सदन ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को आगे बढ़ाया है, जिसके तहत 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है।
हाउस रूल्स कमेटी में इस विधेयक पर मतदान का क्या परिणाम रहा?
कमेटी ने 14 सितंबर को 7-3 के मत से इस विधेयक को सदन के पटल पर आगे बढ़ाने की मंजूरी दी।
क्या अमेरिकी सीनेट इस कानून को पहले ही पारित कर चुकी है?
हां, सीनेट ने 7 अगस्त को 86 के मुकाबले 11 मतों से इस विधेयक को मंजूरी दी थी।
क्या इस विधेयक से भारत पर स्वचालित रूप से 100% शुल्क लग जाएगा?
नहीं, यह विधेयक किसी भी देश पर स्वतः शुल्क नहीं लगाता, बल्कि यह निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवेकाधिकार पर छोड़ता है।
सदन में किस डेमोक्रेटिक नेता के संशोधन में भारत का नाम शामिल था?
प्रतिनिधि स्टेनी होयर के नेतृत्व में पेश किए गए संशोधन में भारत, चीन और तुर्किये सहित कई देशों के नाम शामिल थे।
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