अमेरिकी चुनाव 2028: चुनावी नतीजों को नकारने वाले कई रिपब्लिकन नेता अटॉर्नी जनरल की दौड़ में शामिलफीफा अंडर-15 विश्व कप में अफगानिस्तान से हारा भारत, अब कजाकिस्तान से टक्करकक्षा में दांव-पेंच और लंबी उड़ान से चौकन्ना हुआ वॉशिंगटन, ड्रैगन के गुप्त स्पेसप्लेन की पहली स्पष्ट झलक आई सामनेआर्मेनिया की संसद में चुनावी वादे पर भिड़े नेता, लाइव प्रसारण के दौरान चले लात-घूंसे और फटे कपड़ेफर्जी हेल्थ कैंप के बहाने ग्रामीणों के आधार जुटाकर ई-सिम रैकेट चलाने वाले दो जालसाज मथुरा से पकड़े गएचीन के रहस्यमयी स्पेसप्लेन की तस्वीर ने खोली गुप्त अंतरिक्ष अभियानों की पोल, अमेरिकी रक्षा रिपोर्ट में बड़े खुलासेगुवाहाटी के ओडीआईएन एक्सपीरियंसेज ने जीता पूर्वी भारत के सर्वश्रेष्ठ नाइटक्लब का राष्ट्रीय खिताबभागलपुर के 12वीं के छात्र प्रिंस का पंचक सिलाट में अंतरराष्ट्रीय चयन, 33 देशों के मुकाबले में उतरेंगेउत्तर प्रदेश सिपाही भर्ती परीक्षा की शहर पर्ची जारी, जानिए तारीखें और डाउनलोड प्रक्रियाऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में बैंक की चूक पर ग्राहकों को पूरा हर्जाना मिले: शीर्ष अदालत
सरायपाली में समोसा बेचकर रमेश बेहरा ने खड़ा किया कामयाब कारोबार, रोज बिकते हैं 700 समोसेमनी
4 अक्तू॰ 2026, 10:33 pm (25 दिन पहले)· 2

सरायपाली में समोसा बेचकर रमेश बेहरा ने खड़ा किया कामयाब कारोबार, रोज बिकते हैं 700 समोसे

महासमुंद के कुटेला चौक पर ठेला लगाने वाले रमेश बेहरा पिछले 10 वर्षों से समोसे बेच रहे हैं और अपनी खास तकनीक के दम पर रोजाना कुछ ही घंटों में 700 समोसे बेच लेते हैं।

सड़क किनारे लगने वाला एक सामान्य ठेला भी अगर स्वाद और अनुशासन के साथ संचालित किया जाए, तो वह बड़े मुनाफे वाले व्यापार में तब्दील हो सकता है। खानपान से जुड़े छोटे उद्यमों में कम लागत और सरल कार्यप्रणाली के बावजूद ग्राहकों का भरोसा जीतना सबसे अहम माना जाता है। गुणवत्ता, सही तकनीक और लगातार की गई मेहनत से सीमित संसाधनों में भी किस तरह बड़ा ग्राहक वर्ग तैयार किया जा सकता है, इसका उदाहरण छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में देखने को मिलता है।

कुटेला चौक पर रोज उमड़ती है ग्राहकों की भीड़

महासमुंद जिले के अंतर्गत आने वाले सरायपाली क्षेत्र के कुटेला चौक पर रमेश बेहरा पिछले 10 सालों से अपना ठेला संचालित कर रहे हैं। इलाके में उनकी पहचान समोसा किंग के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनके ठेले पर सुबह से लेकर शाम तक लोगों का आना-जाना बना रहता है। स्थिति यह है कि रोजाना करीब 700 समोसे महज कुछ ही घंटों के भीतर बिक जाते हैं। नाश्ते की तलाश में आने वाले स्थानीय निवासियों के लिए यह ठेला एक भरोसेमंद ठिकाना बन चुका है।

ये भी पढ़ें

धीमी आंच पर 20 मिनट तक तलने का अनोखा तरीका

रमेश बेहरा के अनुसार, उनके समोसों की लोकप्रियता किसी गोपनीय फार्मूले की बजाय पकाने की सही पद्धति पर टिकी है। उनका मानना है कि समोसा तैयार करना सरल दिख सकता है, लेकिन सही बनावट हासिल करना एक हुनर है। अत्यधिक गर्म तेल में डालने पर समोसा ऊपर से जल जाता है और भीतर से कच्चा रह जाता है। इस समस्या से बचने के लिए वे हर समोसे को मध्यम आंच पर लगभग 20 मिनट तक तलते हैं।

लंबे समय तक धीमी आंच पर पकने के कारण समोसे बाहर से बेहद खस्ता और अंदर से पूरी तरह पककर तैयार होते हैं। भरावन के लिए आलू के मिश्रण में अमचूर, हल्का गरम मसाला और धनिया पाउडर का संतुलित तड़का लगाया जाता है। यही स्वाद और निरंतरता ग्राहकों को बार-बार उनके पास खींच लाती है।

20 रुपए की प्लेट और पारिवारिक हुनर की विरासत

रमेश अपने ग्राहकों को 20 रुपए की प्लेट में तीन बड़े समोसे परोसते हैं। इस थाली में समोसों के साथ छोले, तीखी और मीठी चटनी के अलावा मिर्च और लहसुन से बनी विशेष झटपट चटनी भी शामिल होती है। ग्राहकों का मानना है कि इस स्वाद के पीछे मसालों के सही अनुपात के साथ-साथ ईमानदारी और अपनापन भी शामिल है।

समोसा बनाने का यह हुनर रमेश को अपने पिता से विरासत में मिला, जो पहले इसी जगह पर ठेला लगाते थे। पिता द्वारा शुरू किए गए इस काम को रमेश ने आधुनिक व्यावसायिक समझ और स्वच्छता के साथ आगे बढ़ाया है। एक दशक की निरंतरता के बाद आज उनका ठेला सिर्फ एक नाश्ते की दुकान न रहकर सरायपाली का एक लोकप्रिय स्थानीय ब्रांड बन चुका है।

सवाल-जवाब

रमेश बेहरा का समोसा ठेला कहां स्थित है?
रमेश बेहरा का समोसा ठेला छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सरायपाली के कुटेला चौक पर स्थित है।
रमेश बेहरा को स्थानीय लोग किस नाम से जानते हैं?
सरायपाली के स्थानीय लोग रमेश बेहरा को 'समोसा किंग' के नाम से जानते हैं।
रमेश बेहरा के ठेले पर रोजाना कितने समोसे बिकते हैं?
उनके ठेले से रोजाना कुछ ही घंटों के भीतर करीब 700 समोसे बिक जाते हैं।
समोसे को खस्ता बनाने के लिए रमेश कौन सी तकनीक अपनाते हैं?
वे समोसों को तेज आंच पर तलने के बजाय मध्यम आंच पर करीब 20 मिनट तक धीमी गति से तलते हैं।
रमेश बेहरा के यहां समोसे की एक प्लेट की क्या कीमत है?
एक प्लेट की कीमत 20 रुपए है, जिसमें तीन बड़े समोसे, छोले, तीखी-मीठी चटनी और मिर्च-लहसुन की चटनी दी जाती है।
रमेश बेहरा यह समोसा व्यवसाय कितने समय से चला रहे हैं?
रमेश बेहरा पिछले 10 सालों से कुटेला चौक पर यह समोसा ठेला संचालित कर रहे हैं।
रमेश ने समोसा बनाने का हुनर किससे सीखा?
रमेश ने समोसा बनाने का हुनर अपने पिता से सीखा, जो पहले इसी स्थान पर ठेला लगाते थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·24 दिन पहले

सिर्फ बीस रुपए में तीन बड़े समोसे और साथ में इतनी सारी चटनियाँ! सच में कमाल है।

Michael Anderson@michael-anderson·24 दिन पहले

सिर्फ बीस रुपए में तीन बड़े समोसे, साथ में छोले और तरह-तरह की चटनियाँ! इस मँहगाई के दौर में ऐसा स्वाद और ऐसी कीमत देखकर सच में हैरानी होती है।

Nyra Kaif@nyra-kaif·24 दिन पहले

माइकल, सच में! बीस रुपये में तीन समोसे और वो भी छोले और इतनी सारी चटनियों के साथ, आज के समय में वाकई यकीन नहीं होता।

Rohan Gupta@rohan-gupta·24 दिन पहले

धीमी आंच पर 20 मिनट तलना थोड़ा अजीब लगा। इतने तेल में समोसा पकेगा या सारा तेल सोख लेगा, यही सोच रहा हूँ।

Amit Patel@amit-patel·24 दिन पहले

रोहन भाई, धीमी आंच का ही तो कमाल है, तभी तो समोसा अंदर से क्रिस्पी और तेल से बाहर निकलता है!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp