छत्तीसगढ़ की समृद्ध खानपान परंपरा का स्वाद अब ग्रामीण अंचलों की चौखट लांघकर शहरी बाजारों में अपनी खास जगह बना रहा है। राज्य के पारंपरिक पकवानों की विशिष्ट पहचान उनकी देसी खुशबू, शुद्धता और घरेलू अंदाज में निहित है। इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में शुमार उड़द दाल का बड़ा आज शहरी आबादी के बीच बेहद लोकप्रिय नाश्ता बन चुका है। रायपुर जिले के सिलतरा क्षेत्र की निवासी लक्ष्मी वर्मा इस पारंपरिक जायके को व्यावसायिक मंच प्रदान कर रही हैं और अपनी इस पहल के जरिए अन्य महिलाओं के लिए भी स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।
महिला समूह के जरिए आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत
लक्ष्मी वर्मा एक महिला स्व-सहायता समूह के साथ मिलकर इस कार्य को आगे बढ़ा रही हैं। उनके साथ कई अन्य महिलाएं भी इस उद्यम से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। उनका तैयार किया गया उड़द दाल का बड़ा न केवल बेहद स्वादिष्ट और कुरकुरा होता है, बल्कि इसे तैयार करने में पूरी तरह से घरेलू शुद्धता और पारंपरिक देसी विधियों का पालन किया जाता है। स्थानीय बाजारों और सार्वजनिक मेलों में लगने वाले इनके स्टॉल पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ती है, जहां लोग इस पारंपरिक स्नैक का आनंद लेने खिंचे चले आते हैं।
उड़द दाल का कुरकुरा बड़ा तैयार करने की पूरी विधि
इस पारंपरिक व्यंजन को बनाने की सटीक और सरल विधि साझा करते हुए उन्होंने बताया कि सबसे पहले उड़द दाल को दो से तीन घंटे के लिए साफ पानी में भिगोकर रखा जाता है। भिगोने के बाद दाल को अच्छी तरह धोया जाता है ताकि उसका छिलका पूरी तरह निकल जाए। इसके उपरांत दाल को मिक्सर में बारीक पीस लिया जाता है। पिसे हुए दाल के पेस्ट में बारीक कटी हुई हरी मिर्च, प्याज, ताजा हरी धनिया पत्ती और स्वादानुसार नमक डालकर अच्छी तरह फेंटा जाता है।
सामग्री का मिश्रण पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद, इसे हाथों की मदद से गोल अथवा चपटा आकार दिया जाता है। इसके बाद कड़ाही में गरम तेल के भीतर धीमी आंच पर लगभग 15 से 20 मिनट तक सेका जाता है, जिससे बड़े अंदर तक अच्छी तरह पक सकें और उनमें खास कुरकुरापन आ सके। जब बड़ा सुनहरा और करारा हो जाता है, तब इसे गरमा-गरम टमाटर की तीखी चटनी या हरी धनिया की चटनी के साथ ग्राहकों को परोसा जाता है। स्वाद ऐसा होता है कि एक बार चखने के बाद ग्राहक इसे बार-बार पसंद करते हैं।
किफायती दाम और बाजार में बढ़ती मांग
इस नाश्ते की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहद किफायती कीमत है। मात्र 20 रुपये में 4 नग बड़े की पूरी प्लेट दी जाती है, जो सुबह के नाश्ते अथवा शाम की चाय के साथ एक बेहतरीन और तृप्त करने वाला भोजन साबित होती है। समूह की महिलाएं इन बड़ों को विभिन्न मेलों, ग्रामीण हाट बाजारों और स्थानीय दुकानों में बेचती हैं, जिससे उन्हें नियमित रूप से अच्छी आय प्राप्त हो रही है। लक्ष्मी वर्मा का स्पष्ट कहना है कि उनका ध्येय केवल जायका परोसना ही नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति का प्रसार करना और महिलाओं को स्वावलंबी बनाना भी है।



















