क्रेडिट कार्ड अब हर महीने की जरूरत बन गया है. खरीदारी हो, बाहर खाना हो या अचानक आ पड़ा कोई खर्च, यह पलक झपकते राहत दे देता है. लेकिन यही सुविधा आपको बरसों तक चलने वाले कर्ज में भी डुबो सकती है. महीने के आखिर में मोटा बिल देखकर ज्यादातर लोग घबराते हैं और सबसे आसान रास्ता चुन लेते हैं, यानी सिर्फ 'मिनिमम ड्यू' भर देना. अगर आप भी बार-बार यही कर रहे हैं तो थोड़ा ठहरिए, क्योंकि अनजाने में आप एक ऐसे जाल में फंसते जा रहे हैं जहां सालाना 40% तक ब्याज आपकी जेब काट सकता है.
बिल आते ही कार्ड पर दो विकल्प नजर आते हैं, एक 'टोटल अमाउंट ड्यू' और दूसरा 'मिनिमम अमाउंट ड्यू'. आमतौर पर मिनिमम ड्यू पूरे बिल का सिर्फ 5% होता है. कई लोग मान बैठते हैं कि इतना भर देने भर से वे डिफॉल्टर होने से बच जाएंगे और सिर पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा.
आसानी के पीछे छिपी असली कीमत
यह बात सही है कि मिनिमम ड्यू चुकाने पर बैंक लेट पेमेंट फीस नहीं लगाता और आपका क्रेडिट स्कोर भी फौरन बिगड़ने से बच जाता है. लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि बाकी बचा कर्ज माफ हो गया या उस पर ब्याज नहीं चढ़ेगा. जैसे ही आप सिर्फ मिनिमम रकम भरते हैं, बचे हुए 95% हिस्से पर उसी वक्त से ब्याज की गिनती शुरू हो जाती है.
यह ब्याज कोई मामूली ब्याज नहीं होता. बैंक बची हुई रकम पर हर महीने 3% से 4% तक वसूलते हैं, जो सालाना हिसाब से 36% से 45% तक पहुंच जाता है. किसी भी पर्सनल लोन या दूसरे कर्ज के मुकाबले यह कहीं ज्यादा महंगा और खतरनाक सौदा है.
एक उदाहरण से समझिए पूरा गणित
मान लीजिए आपका कार्ड बिल 50,000 रुपये का आया और आपने सिर्फ 2,500 रुपये का मिनिमम ड्यू भरा. अब जो 47,500 रुपये बचे हैं, उन पर सालाना 40% की दर से ब्याज जुड़ना शुरू हो जाएगा. हर महीने यह रकम चुपचाप बढ़ती रहती है और देखते ही देखते कर्ज पहाड़ बन जाता है.
खत्म हो जाता है इंटरेस्ट फ्री पीरियड
मिनिमम ड्यू भरने का सबसे बड़ा नुकसान यह भी है कि आपका 'इंटरेस्ट फ्री पीरियड' तुरंत खत्म हो जाता है. सामान्य हालात में कार्ड कंपनियां नए खर्च पर 45 से 50 दिन तक बिना ब्याज की मोहलत देती हैं. लेकिन अगर पिछला बैलेंस बकाया पड़ा है, तो उसके बाद कार्ड से किया गया हर नया खर्च, चाहे वह 100 रुपये की चाय ही क्यों न हो, पहले ही दिन से भारी ब्याज खाने लगता है. इस तरह पुराना और नया खर्च मिलकर ऐसा बोझ बना देते हैं, जिसे आम बजट में चुका पाना मुश्किल हो जाता है.













