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एडवोकेट जनरल के इस्तीफे की मांग पर नागालैंड बार एसोसिएशन 25 सितंबर को अदालती काम से रहेगा दूरनागालैंड
23 सित॰ 2026, 1:44 pm (4 घंटे पहले)· 0

एडवोकेट जनरल के इस्तीफे की मांग पर नागालैंड बार एसोसिएशन 25 सितंबर को अदालती काम से रहेगा दूर

एडवोकेट जनरल के.एन. बालगोपाल के इस्तीफे और स्थानीय वकील की नियुक्ति की मांग को लेकर नागालैंड बार एसोसिएशन ने 25 सितंबर को अदालती कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला लिया है।

नागालैंड बार एसोसिएशन ने राज्य के एडवोकेट जनरल के.एन. बालगोपाल के इस्तीफे की मांग पर सरकार की ओर से कोई ठोस कदम न उठाए जाने के विरोध में 25 सितंबर को अदालती कार्यवाही से अलग रहने का फैसला किया है। बार एसोसिएशन द्वारा पारित एक आधिकारिक प्रस्ताव के अनुसार, अधिवक्ताओं ने मौजूदा एडवोकेट जनरल को पद से हटाने की मांग पर राज्य सरकार की निष्क्रियता के खिलाफ यह विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है।

जिला अदालतों में बिना कोट और बैंड के पहुंचेंगे वकील

इस आंदोलन की कार्ययोजना के तहत जिला अदालतों में पेश होने वाले वकीलों को 25 सितंबर को एक खास तरीके से विरोध जताने का निर्देश दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, संबंधित अदालतों में वकील मौजूद तो रहेंगे, लेकिन वे अपनी निर्धारित पोशाक जैसे कोट और बैंड नहीं पहनेंगे। बार एसोसिएशन का कहना है कि 25 सितंबर की इस सांकेतिक कार्रवाई के बाद परिस्थितियों की समीक्षा की जाएगी और उसी आधार पर भविष्य के कदमों पर फैसला लिया जाएगा।

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स्थानीय एडवोकेट जनरल की मांग और तीन महीने की समयसीमा

बार एसोसिएशन ने अपने इस लंबे विरोध प्रदर्शन के पीछे दो मुख्य वजहें बताई हैं। पहली बड़ी मांग यह है कि राज्य के एडवोकेट जनरल पद पर नागालैंड के ही किसी स्थानीय वकील को नियुक्त किया जाए। एसोसिएशन का तर्क है कि 1963 में नागालैंड को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद से अब तक वहां का कोई भी स्थानीय वकील इस संवैधानिक पद पर आसीन नहीं हो सका है। इस मांग को पूरा करने के लिए वकीलों ने राज्य सरकार को तीन महीने का समय दिया था, जिसकी समयसीमा 13 सितंबर को समाप्त हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट में कथित टिप्पणी को लेकर उपजा विवाद

विरोध का दूसरा बड़ा कारण एडवोकेट जनरल के.एन. बालगोपाल द्वारा 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में की गई कथित टिप्पणी है। उन पर आरोप है कि उन्होंने शीर्ष अदालत की कार्यवाही के दौरान कहा था कि नागालैंड में केवल दो तरह के रोजगार हैं, सरकारी नौकरी और अंडरग्राउंड काम। एसोसिएशन ने इस कथित बयान को नागालैंड के लोगों का अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी से एडवोकेट जनरल का नैतिक अधिकार समाप्त हो गया है, जिसके चलते सरकार की बेरुखी और विवादित बयान दोनों के खिलाफ 25 सितंबर को अदालती काम का बहिष्कार किया जा रहा है।

सवाल-जवाब

नागालैंड बार एसोसिएशन 25 सितंबर को अदालत से क्यों दूर रह रहा है?
एसोसिएशन एडवोकेट जनरल के.एन. बालगोपाल के इस्तीफे और स्थानीय वकील की नियुक्ति की मांग पर सरकार की बेरुखी के विरोध में यह कदम उठा रहा है।
जिला अदालतों में वकील 25 सितंबर को कैसे विरोध दर्ज कराएंगे?
जिला अदालतों के वकील अपनी-अपनी अदालतों में उपस्थित तो रहेंगे, लेकिन वे अपने आधिकारिक कोट और बैंड नहीं पहनेंगे।
एडवोकेट जनरल पद को लेकर बार एसोसिएशन की प्रमुख मांग क्या है?
बार एसोसिएशन की मांग है कि 1963 में राज्य बनने के बाद से इस पद पर कभी किसी स्थानीय वकील की नियुक्ति नहीं हुई है, इसलिए अब नागालैंड के स्थानीय वकील को ही एडवोकेट जनरल बनाया जाए।
एडवोकेट जनरल के खिलाफ किस कथित टिप्पणी पर विवाद हुआ है?
सुप्रीम कोर्ट में 1 सितंबर की कार्यवाही के दौरान उन पर यह कथित बयान देने का आरोप है कि नागालैंड में केवल सरकारी और अंडरग्राउंड, दो ही तरह के रोजगार हैं।
बार एसोसिएशन ने सरकार को क्या समयसीमा दी थी?
एसोसिएशन ने स्थानीय एडवोकेट जनरल नियुक्त करने के लिए तीन महीने का समय दिया था, जो 13 सितंबर को पूरा हो गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·3 घंटे पहले

अदालत के बहिष्कार से नागालैंड के वकीलों का गुस्सा साफ दिख रहा है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 घंटे पहले

1963 से एक भी स्थानीय वकील इस पद पर नहीं, यह बात सचमुच हैरान करने वाली है।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·3 घंटे पहले

अर्जुन जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। जब मैं कुछ साल पहले कोहिमा गई थी, तब एक स्थानीय वकील से बात करते हुए यही अहसास हुआ था कि बाहरी लोगों का ऐसे अहम पदों पर होना वहाँ के लोगों को कितना आहत करता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 घंटे पहले

अदालत के बहिष्कार से वकीलों की मांग कितनी जल्दी पूरी होगी, इस पर थोड़ा शक है। सरकार पर दबाव तो बनेगा, पर फैसला इतनी आसानी से नहीं आएगा।

Ravikash Gupta@ravikash·4 घंटे पहले

करण भाई, आपकी बात सही है कि फैसला आसानी से नहीं आएगा, पर मुझे लगता है कि कोट और बैंड उतारकर अदालत में बैठना सरकार पर बहुत कड़ा संदेश देगा।

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