नागालैंड बार एसोसिएशन ने राज्य के एडवोकेट जनरल के.एन. बालगोपाल के इस्तीफे की मांग पर सरकार की ओर से कोई ठोस कदम न उठाए जाने के विरोध में 25 सितंबर को अदालती कार्यवाही से अलग रहने का फैसला किया है। बार एसोसिएशन द्वारा पारित एक आधिकारिक प्रस्ताव के अनुसार, अधिवक्ताओं ने मौजूदा एडवोकेट जनरल को पद से हटाने की मांग पर राज्य सरकार की निष्क्रियता के खिलाफ यह विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है।
जिला अदालतों में बिना कोट और बैंड के पहुंचेंगे वकील
इस आंदोलन की कार्ययोजना के तहत जिला अदालतों में पेश होने वाले वकीलों को 25 सितंबर को एक खास तरीके से विरोध जताने का निर्देश दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, संबंधित अदालतों में वकील मौजूद तो रहेंगे, लेकिन वे अपनी निर्धारित पोशाक जैसे कोट और बैंड नहीं पहनेंगे। बार एसोसिएशन का कहना है कि 25 सितंबर की इस सांकेतिक कार्रवाई के बाद परिस्थितियों की समीक्षा की जाएगी और उसी आधार पर भविष्य के कदमों पर फैसला लिया जाएगा।
स्थानीय एडवोकेट जनरल की मांग और तीन महीने की समयसीमा
बार एसोसिएशन ने अपने इस लंबे विरोध प्रदर्शन के पीछे दो मुख्य वजहें बताई हैं। पहली बड़ी मांग यह है कि राज्य के एडवोकेट जनरल पद पर नागालैंड के ही किसी स्थानीय वकील को नियुक्त किया जाए। एसोसिएशन का तर्क है कि 1963 में नागालैंड को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद से अब तक वहां का कोई भी स्थानीय वकील इस संवैधानिक पद पर आसीन नहीं हो सका है। इस मांग को पूरा करने के लिए वकीलों ने राज्य सरकार को तीन महीने का समय दिया था, जिसकी समयसीमा 13 सितंबर को समाप्त हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट में कथित टिप्पणी को लेकर उपजा विवाद
विरोध का दूसरा बड़ा कारण एडवोकेट जनरल के.एन. बालगोपाल द्वारा 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में की गई कथित टिप्पणी है। उन पर आरोप है कि उन्होंने शीर्ष अदालत की कार्यवाही के दौरान कहा था कि नागालैंड में केवल दो तरह के रोजगार हैं, सरकारी नौकरी और अंडरग्राउंड काम। एसोसिएशन ने इस कथित बयान को नागालैंड के लोगों का अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी से एडवोकेट जनरल का नैतिक अधिकार समाप्त हो गया है, जिसके चलते सरकार की बेरुखी और विवादित बयान दोनों के खिलाफ 25 सितंबर को अदालती काम का बहिष्कार किया जा रहा है।
























