नई दिल्ली स्थित विशेष एनआईए अदालत ने नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (इसाक-मुइवा) यानी एनएससीएन (आईएम) से जुड़े अंतरराष्ट्रीय हथियार खरीद मामले में थाईलैंड के एक तस्कर को छह साल की कैद की सजा सुनाई है। राउज एवेन्यू जिला अदालत स्थित विशेष अदालत ने इस थाई नागरिक, विली नारुएनार्टवानिच (जिसे वुथिकॉर्न नारुएनार्टवानिच या विली के नाम से भी जाना जाता है), पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
विदेशी नेटवर्क और हथियारों की बड़ी डील
अदालत ने विली नारुएनार्टवानिच को 24 सितंबर, 2026 को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120बी और 122 के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 18 के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद बुधवार को अदालत ने सजा का औपचारिक ऐलान किया। यह पूरा मामला एनएससीएन (आईएम) द्वारा विदेशी स्रोतों से घातक हथियारों और गोला-बारूद की एक बड़ी खेप मंगाने की आपराधिक साजिश से जुड़ा है।
जांच के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का मकसद संगठन के सशस्त्र कैडरों को आधुनिक हथियारों से लैस करना, आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना और भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयारी करना था। जांच एजेंसियों ने पाया कि इस हथियार खरीद और उसके ट्रांसशिपमेंट के सौदे की कुल अनुमानित कीमत लगभग 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी।
बैंकॉक से रची गई थी पूरी साजिश
गृह मंत्रालय के आदेश के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 13 जनवरी 2010 को इस मामले में औपचारिक केस दर्ज किया था। विस्तृत जांच में सामने आया कि बैंकॉक में रहने वाला थाई व्यापारी और हथियार तस्कर विली नारुएनार्टवानिच इस नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण साजिशकर्ता और बिचौलिए के तौर पर काम कर रहा था।
विली नारुएनार्टवानिच ने एनएससीएन (आईएम) के मुख्य हथियार खरीददार एंथनी शिमरे के साथ करीबी तालमेल बिठाकर काम किया था। उसने इस प्रतिबंधित संगठन की ओर से एक चीनी हथियार और गोला-बारूद निर्माता कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत और सौदेबाजी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। अदालत का यह फैसला पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठनों द्वारा विदेशों से हथियार जुटाने वाले वैश्विक नेटवर्क के खिलाफ जांच एजेंसियों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।





















