भारतीय वायुसेना के उच्च स्तरीय अभियान कक्ष में 10 मई 2025 की सुबह अत्यधिक तनाव और तत्परता का माहौल था। सीमा पार पाकिस्तान का भोलारी एयरबेस भारतीय लड़ाकू विमानों के निशाने पर था। इस रणनीतिक मिशन के तहत उस विशिष्ट हैंगर को नष्ट करना था जिसके भीतर पाकिस्तान वायुसेना का अत्यंत महत्वपूर्ण साब एरीआई एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल जेट मौजूद था। भारतीय फाइटर जेट्स के कॉकपिट में पायलट पूरी तरह तैयार बैठे थे, हथियारों की लोडिंग पूरी हो चुकी थी, ईंधन भरा जा चुका था और सभी तकनीकी प्रणालियों की जांच संपन्न हो गई थी।
साब एरीआई जेट और भोलारी एयरबेस की घेराबंदी
अभियान का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के हवाई निगरानी तंत्र को पंगु बनाना था। भोलारी एयरबेस पर मौजूद साब एरीआई विमान पाकिस्तान की हवाई गश्त और चेतावनी प्रणाली का प्रमुख हिस्सा था। भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमानों को इस महत्वपूर्ण संपत्ति पर सटीक निशाना साधने का दायित्व सौंपा गया था। ऑप्स रूम में मौजूद अधिकारी हर सेकंड की गतिविधि पर नजर बनाए हुए थे और अंतिम टेकऑफ के आदेश का इंतजार कर रहे थे।
वायुसेना प्रमुख का फोन और समय प्रबंधन का फैसला
उसी नाजुक मोड़ पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अभियान कक्ष में सीधे संपर्क कर विमानों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी मांगी। साउथ वेस्ट एयर कमान के तत्कालीन प्रमुख एयर मार्शल नागेश कपूर इस बात से भलीभांति अवगत थे कि उनके पायलटों ने उस क्षण तक उड़ान नहीं भरी थी। हालांकि, मिशन की गतिशीलता और पूर्व निर्धारित योजना को बिना किसी भ्रम के आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने प्रस्थान के सटीक समय को लेकर वायुसेना प्रमुख से पूरी बात साझा नहीं की।
एक बाद के साक्षात्कार के दौरान एयर मार्शल नागेश कपूर ने इस घटनाक्रम पर बात करते हुए स्पष्ट किया कि इसे सीधा झूठ कहना उचित नहीं होगा, बल्कि उन्होंने उस तात्कालिक परिस्थिति में पूरा सच नहीं बताने का रणनीतिक विकल्प चुना था। यह रणनीतिक फैसला ऑपरेशन सिंदूर के सबसे निर्णायक क्षणों में से एक बन गया।
सुखोई-30 MKI का प्रहार और सैटेलाइट साक्ष्य
इस महत्वपूर्ण बातचीत के तुरंत बाद भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 MKI विमानों ने अपने बेस से उड़ान भरी और भोलारी एयरबेस की ओर प्रस्थान किया। लड़ाकू विमानों ने पूर्व निर्धारित रणनीति के अनुसार भोलारी एयरबेस के उसी लक्षित हैंगर पर सटीक हमला किया। हमले के बाद प्राप्त हुई उपग्रह तस्वीरों ने मिशन की पूर्ण सफलता की पुष्टि की। सैटेलाइट इमेजरी में हैंगर की छत पर एक बड़ा विवर साफ नजर आया और आसपास के परिसर में मलबे के अवशेष बिखरे हुए दिखाई दिए, जिससे सिद्ध हुआ कि लक्षित संपत्ति को भारी क्षति पहुंची है।



















