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1857 की क्रांति का साक्षी बना आजमगढ़ का वेस्ली इंटर कॉलेज, लाइब्रेरी में लगी आग का इतिहासउत्तर प्रदेश
23 अग॰ 2026, 1:39 pm (67 दिन पहले)· 2

1857 की क्रांति का साक्षी बना आजमगढ़ का वेस्ली इंटर कॉलेज, लाइब्रेरी में लगी आग का इतिहास

1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आजमगढ़ में क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाना कब्जाने के बाद वेस्ली इंटर कॉलेज की लाइब्रेरी को आग के हवाले कर दिया था।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले का 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अत्यंत महत्वपूर्ण और साहसिक योगदान रहा है। ब्रिटिश शासन के खिलाफ उभरी क्रांति की ज्वाला इस क्षेत्र में केवल फौजी छावनियों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के प्रशासनिक और संस्थागत प्रतीकों को निशाना बनाया। आजमगढ़ शहर में स्थित कुंवर सिंह उद्यान और शहीद द्वार जहां देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीरों की गाथा बयां करते हैं, वहीं जिले का सबसे पुराना शैक्षणिक संस्थान वेस्ली इंटर कॉलेज उस दौर की कई ऐतिहासिक घटनाओं का प्रत्यक्षदर्शी रहा है। कॉलेज की ऐतिहासिक लाइब्रेरी और परिसर का पिछला हिस्सा 1857 के गदर के दौरान हुए विद्रोह की गवाही आज भी देता है।

सरकारी खजाने पर कब्जे के बाद मिशनरी स्कूल पर धावा

विद्रोह के दौरान आजमगढ़ के स्वतंत्रता सेनानियों ने योजनाबद्ध तरीके से अंग्रेजी सत्ता के प्रशासनिक तंत्र को ठप करने की रणनीति बनाई थी। कॉलेज में कार्यरत लेक्चरर विश्वजीत विक्टर के अनुसार, 1857 के आंदोलन के समय क्रांतिकारियों ने सबसे पहले आजमगढ़ स्थित अंग्रेजी हुकूमत के सरकारी खजाने पर धावा बोलकर उसे अपने पूर्ण नियंत्रण में ले लिया। खजाने पर कब्जा करने के बाद विद्रोहियों का ध्यान विदेशी ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित किए जा रहे वेस्ली इंटर कॉलेज की ओर गया। ब्रिटिश प्रभाव और मिशनरी गतिविधियों का केंद्र समझे जाने के कारण क्रांतिकारियों ने इस ऐतिहासिक शैक्षणिक परिसर को घेर लिया और वहां व्यापक विरोध दर्ज कराया।

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दुर्लभ किताबों और हाथ से बनी एटलस का नुकसान

आंदोलन की लपटें वेस्ली इंटर कॉलेज परिसर तक पहुंचने के बाद क्रांतिकारियों ने विद्यालय के पिछले हिस्से में स्थित लाइब्रेरी को आग के हवाले कर दिया था। इस भीषण आगजनी में लाइब्रेरी की इमारत समेत कॉलेज परिसर के कई कमरे और हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। विश्वजीत विक्टर ने बताया कि उस दौर में वेस्ली इंटर कॉलेज आजमगढ़ का सबसे प्रतिष्ठित और प्रमुख शिक्षण संस्थान माना जाता था। कॉलेज की लाइब्रेरी में उच्च स्तरीय अध्ययन सामग्री का अमूल्य संग्रह मौजूद था। इसमें गणित, विज्ञान और भूगोल जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पांडुलिपियों व किताबों के साथ ही हाथ से तैयार की गई एक दुर्लभ रंगीन एटलस भी रखी हुई थी, जो आग की भेंट चढ़कर पूरी तरह राख में बदल गई।

मरम्मत से लेकर दीमक और उपेक्षा का शिकार बनी धरोहर

1857 की क्रांति का दौर बीत जाने और स्थिति सामान्य होने के पश्चात ब्रिटिश प्रशासन तथा संस्थान प्रबंधन ने विद्यालय परिसर के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराई। पठन-पाठन की प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने के लिए लाइब्रेरी में नई और प्रासंगिक किताबें मंगवाकर रखी गईं। हालांकि, समय बीतने के साथ इस ऐतिहासिक धरोहर की उचित देखरेख और प्रभावी संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। दशकों तक प्रशासनिक उपेक्षा के कारण जहां एक ओर ऐतिहासिक विद्यालय भवन धीरे-धीरे जर्जर होकर खंडहर जैसी स्थिति में पहुंच गया, वहीं दूसरी ओर लाइब्रेरी में रखी पुरानी दुर्लभ किताबें घुन और दीमक का शिकार होकर नष्ट हो गईं। आज भी विद्यालय परिसर में मौजूद ऐतिहासिक अवशेष 1857 के उस संघर्ष की अमिट यादें संजोए हुए हैं।

सवाल-जवाब

1857 की क्रांति के दौरान आजमगढ़ में क्रांतिकारियों ने किस शैक्षणिक संस्थान को निशाना बनाया था?
क्रांतिकारियों ने आजमगढ़ में विदेशी ईसाई मिशनरी द्वारा संचालित वेस्ली इंटर कॉलेज को निशाना बनाया था।
वेस्ली इंटर कॉलेज पर हमले से पहले क्रांतिकारियों ने क्या कार्रवाई की थी?
कॉलेज पर कार्रवाई करने से पहले क्रांतिकारियों ने आजमगढ़ स्थित अंग्रेजी हुकूमत के सरकारी खजाने पर धावा बोलकर उस पर कब्जा कर लिया था।
आगजनी में वेस्ली इंटर कॉलेज की लाइब्रेरी को क्या नुकसान हुआ था?
आगजनी में लाइब्रेरी की इमारत और कमरे क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिसमें गणित, विज्ञान, भूगोल की उच्च स्तरीय किताबें और हाथ से बनी एक दुर्लभ रंगीन एटलस जलकर खाक हो गई थी।
क्रांति समाप्त होने के बाद लाइब्रेरी की किताबों का क्या हुआ?
मरम्मत के बाद लाइब्रेरी में दोबारा नई किताबें लाई गईं, लेकिन समय के साथ उचित रखरखाव के अभाव में इमारत जर्जर हो गई और किताबें दीमक व घुन का शिकार बन गईं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Karan Malhotra@karan-malhotra·66 दिन पहले

1857 के गदर के दौरान सरकारी खजाने पर कब्जे और वेस्ली इंटर कॉलेज की लाइब्रेरी में आगजनी की यह घटना बताती है कि क्रांतिकारी केवल सैन्य छावनियों तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे ब्रिटिश प्रशासनिक व संस्थागत प्रतीकों को भी नेस्तनाबूद करना चाहते थे। इस ऐतिहासिक धरोहर का दीमक और उपेक्षा का शिकार होना हमारे पुरातात्विक और शैक्षणिक संरक्षण तंत्र पर एक गंभीर सवालिया निशान लगाता है। यदि समय रहते प्रशासन ने इस प्राचीन पुस्तकालय और क्षतिग्रस्त हिस्से का जीर्णोद्धार नहीं किया, तो हम अपनी स्वतंत्रता संग्राम की एक और अमूल्य कड़ी हमेशा के लिए खो देंगे।

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