उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में पुलिस और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की संयुक्त टीम ने प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। खुफिया सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने 5,57,760 प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल बरामद किए हैं। पीलीभीत के पूरनपुर थाना क्षेत्र में स्थित मंडी समिति के पास घेराबंदी करके पुलिस ने बाइक सवार एक युवक को दबोचा, जिसके पास से नशीली दवाओं का पहला डिब्बा बरामद हुआ। इसके बाद गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर एक गुप्त गोदाम पर छापा मारा गया, जहाँ से 42 अन्य डिब्बों में भरा दवाओं का भारी भंडार मिला।
बाइक पर परिवहन से खुला गोदाम का राज
पुलिस को सटीक सूचना मिली थी कि माधोटांडा रोड पर मोटरसाइकिल के जरिए प्रतिबंधित नशीली दवाओं की आपूर्ति की जा रही है। इस पर पूरनपुर पुलिस और ड्रग इंस्पेक्टर की संयुक्त टीम ने मंडी समिति के निकट रणनीति बनाकर जाल बिछाया। चेकिंग के दौरान संदिग्ध बाइक सवार को रोककर तलाशी ली गई। आरोपी की पहचान माधोटांडा के मोहल्ला जामा मस्जिद निवासी दानिश के रूप में हुई। बाइक पर बंधे एक गत्ते के कार्टन को खोलने पर उसमें स्पास्मो ब्राउन नाम के प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल बरामद हुए। हिरासत में लेकर की गई कड़ाई से पूछताछ में आरोपी दानिश ने स्वीकार किया कि उसके पास मौजूद नशीली दवाएं केवल एक छोटा सा हिस्सा थीं और बाकी का स्टॉक पास के ही एक अवैध गोदाम में छिपाकर रखा गया है।
गोदाम पर छापेमारी और भारी बरामदगी
पकड़े गए आरोपी दानिश की निशानदेही पर पुलिस और ड्रग विभाग की टीम तुरंत संबंधित ठिकाने पर पहुँची। मंडी समिति के समीप स्थित इस अवैध गोदाम के दरवाजे खोलते ही अधिकारियों के होश उड़ गए। गोदाम के भीतर 42 अन्य बड़े कार्टन रखे हुए थे, जिनमें वही प्रतिबंधित दवाएं ठसाठस भरी हुई थीं। कुल मिलाकर 43 कार्टन जब्त किए गए, जिनमें कुल 5,57,760 कैप्सूल मौजूद थे। पुलिस के अनुसार बरामद दवाओं में ट्रामाडोल घटक मौजूद है, जो NDPS एक्ट के तहत एक कड़ाई से नियंत्रित और प्रतिबंधित पदार्थ है। बाजार में इन दवाओं का इस्तेमाल नशे के विकल्प के रूप में अवैध रूप से किया जा रहा था।
मेडिकल स्टोर की आड़ में नशीली दवाओं का कारोबार
जांच में सामने आया कि आरोपी दानिश का सगा भाई तारिक खान माधोटांडा में एक मेडिकल स्टोर चलाता है। दानिश ने पूछताछ में खुलासा किया कि मेडिकल स्टोर की आड़ में दोनों भाई लंबे समय से प्रतिबंधित दवाओं का अवैध भंडारण और बिक्री कर रहे थे। दुकान से इतर गुप्त गोदाम बनाकर वे इन दवाओं का विशाल स्टॉक रखते थे और क्षेत्रीय स्तर पर नशे के कारोबारियों को सप्लाई करते थे। पुलिस ने बताया कि तारिक खान फिलहाल फरार है और उसकी धरपकड़ के लिए कई टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में सिर्फ ये दो भाई ही शामिल नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे एक अंतरराज्यीय या क्षेत्रीय गिरोह सक्रिय हो सकता है।
एसपी का बयान और वित्तीय जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीलीभीत के पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने पूरी कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा साझा किया। उन्होंने बताया कि 28 अक्टूबर को पूरनपुर थाने में विशिष्ट इनपुट के आधार पर यह कार्रवाई की गई। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि गिरफ्तार दानिश से मिली जानकारी के आधार पर अवैध गोदाम का भंडाफोड़ किया गया, जहाँ से 43 कार्टन में लगभग 5.58 लाख नशीले कैप्सूल जब्त किए गए। इस संबंध में पूरनपुर थाने में NDPS अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत FIR संख्या 446/24 दर्ज की गई है।
पुलिस कप्तान ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच केवल जब्ती तक सीमित नहीं रहेगी। पुलिस अब इस अवैध कारोबार के वित्तीय नेटवर्क की गहन पड़ताल कर रही है। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं कहाँ से खरीदी गई थीं, इस अवैध व्यापार में कौन-कौन लोग साझेदार हैं और इस काले कारोबार से भाइयों ने कितनी चल-अचल संपत्ति अर्जित की है। पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों की अवैध संपत्तियों को कुर्क करने और कड़े कानून के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है।



















