दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम को एक बड़ी कामयाबी मिली है, जिसमें पिछले 29 वर्षों से पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहे एक इनामी और कुख्यात अपराधी को गिरफ्तार कर लिया गया है। हत्या और हत्या के प्रयास सहित आठ गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित यह आरोपी पुलिस की आंखों में धूल झोंककर अपनी पहचान बदल चुका था। हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की पुलिस जिस शख्स की तलाश लगभग तीन दशकों से कर रही थी, वह मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में 'डॉ. झटका' के नाम से फर्जी डॉक्टरी कर रहा था और हजारों मरीजों का इलाज भी कर चुका था। 53 वर्षीय इस आरोपी का वास्तविक नाम राजिंदर बैरागी उर्फ राजिंदर यादव है, जिसे अब दिल्ली लाकर आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
1998 में पुलिस जवान की हत्या और गाजियाबाद से फरारी
इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 1998 से होती है, जब हरियाणा के सोनीपत जिले में आयोजित एक विवाह समारोह के दौरान राजिंदर यादव ने हरियाणा पुलिस के जवान जय भगवान की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड के अलावा उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी हत्या के प्रयास, चोरी और आर्म्स एक्ट के तहत कई मामले दर्ज थे। वर्ष 1999 में जब उत्तर प्रदेश पुलिस की टीम आरोपी राजिंदर को हथकड़ी लगाकर गाजियाबाद जेल से पेशी के लिए हरियाणा की अदालत ले जा रही थी, तब वह चालाकी से पुलिस हिरासत से फरार होने में कामयाब हो गया। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कई राज्यों में संभावित ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला, जिसके बाद अदालत द्वारा उसे भगोड़ा यानी प्रोकलेम्ड ऑफेंडर घोषित कर दिया गया।
महाराष्ट्र में शिक्षक से मध्य प्रदेश में फर्जी डॉक्टर बनने का सफर
पुलिस की हिरासत से भागने के बाद राजिंदर बैरागी ने अपनी पुरानी जिंदगी और पहचान को पूरी तरह से मिटा दिया। उसने अपना नाम, रहने का स्थान, काम और परिवार सब कुछ नया बना लिया ताकि किसी को उस पर संदेह न हो। अपनी फरारी के शुरुआती दौर में वह महाराष्ट्र चला गया, जहां उसने एक केंद्रीय विद्यालय में शारीरिक शिक्षा शिक्षक के रूप में नौकरी की। कुछ समय वहां बिताने के बाद वह मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित मुंगाओली कस्बे में आकर बस गया। यहां उसने अपना नाम राजेंद्र सिंह यादव रख लिया और बिना किसी चिकित्सकीय डिग्री या रजिस्ट्रेशन के स्थानीय लोगों का इलाज करना शुरू कर दिया। उसकी अनोखी इलाज शैली और तौर-तरीकों के कारण स्थानीय निवासियों ने उसे 'डॉ. झटका' का नाम दे दिया। डॉक्टरी के अलावा वह क्षेत्र में प्रॉपर्टी डीलिंग और निर्माण ठेकेदारी का काम भी देखने लगा।
सरकारी अस्पताल की कर्मचारी से शादी और फर्जी दस्तावेजों का जाल
मुंगाओली में अपनी नई पहचान स्थापित करने के बाद वर्ष 2003 में आरोपी ने वहां के स्थानीय सरकारी अस्पताल में कार्यरत एक एएनएम (ऑक्जिलरी नर्स मिडवाइफ) महिला से विवाह कर लिया। शादी के बाद दोनों वहां आराम से जीवन यापन करने लगे। इस शादी से उनके दो बच्चे हुए, जिनमें वर्तमान में एक 17 वर्ष का बेटा और 16 वर्ष की बेटी है। पुलिस जांच में बचने और कानून की नजरों में एक सामान्य नागरिक बने रहने के लिए आरोपी ने फर्जी पहचान के आधार पर सभी जरूरी सरकारी दस्तावेज भी तैयार करवा लिए थे। उसने अपने नए नाम से आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस और निवास प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बनवा लिए थे, जिससे किसी को भी उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि पर रत्ती भर शक न हो।
29 साल बाद क्राइम ब्रांच का छापा और गिरफ्तारी
दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम आरोपी को पकड़ने के लिए कई वर्षों से मल्टी-स्टेट ऑपरेशन चला रही थी और लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। हाल ही में पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली कि 29 साल से फरार चल रहा कुख्यात अपराधी मध्य प्रदेश के मुंगाओली कस्बे में फर्जी नाम से रह रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मुंगाओली स्थित उसके मकान पर अचानक छापा मारा और उसे दबोच लिया। पुलिस के अनुसार राजिंदर के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में हत्या, जानलेवा हमला, चोरी, आर्म्स एक्ट और पुलिस हिरासत से भागने सहित कुल 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं। 53 साल के इस आरोपी को गिरफ्तार करके दिल्ली लाया गया है, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है।



















