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31 सीट की मंजूरी और बस में भरे 168 यात्री: यूपी से पंजाब जा रही गाड़ी रुद्रपुर में सीज, गिनती में लगे 4 घंटेभारत
12 अग॰ 2026, 11:45 pm (77 दिन पहले)· 1

31 सीट की मंजूरी और बस में भरे 168 यात्री: यूपी से पंजाब जा रही गाड़ी रुद्रपुर में सीज, गिनती में लगे 4 घंटे

लखीमपुर खीरी से पंजाब जा रही एक निजी स्लीपर बस में क्षमता से पांच गुना से भी अधिक यात्री पाए गए। रुद्रपुर में चेकिंग के दौरान परिवहन विभाग ने बस को सीज कर दिया, जिससे बेबस यात्रियों को रातभर परेशानी का सामना करना पड़ा।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से पंजाब के विभिन्न शहरों के लिए रवाना हुई एक निजी स्लीपर बस को उत्तराखंड के रुद्रपुर क्षेत्र में परिवहन विभाग की टीम ने देर रात जांच के दौरान पकड़ा। चेकिंग के दौरान इस बस में स्वीकृत क्षमता से कई गुना ज्यादा सवारियां भरी हुई पाई गईं। महज 30 स्लीपर और एक ड्राइवर सीट यानी कुल 31 यात्रियों की मंजूरी वाली इस गाड़ी में कुल 168 लोग ठंस-ठंसकर सफर कर रहे थे। इस गैर-कानूनी संचालन का पर्दाफाश होते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और अधिकारियों को बस के अंदर से सभी लोगों को उतारकर उनकी गिनती पूरी करने में ही लगभग चार घंटे का वक्त लग गया।

रूद्रपुर के लालपुर में देर रात परिवहन विभाग की बड़ी कार्रवाई

यह पूरी घटना रुद्रपुर के पास स्थित लालपुर क्षेत्र की है, जहां परिवहन कर अधिकारी और एआरटीओ जितेंद्र सिंगवान के नेतृत्व में प्रभारी सुतैया सचल दल गश्त पर था। देर रात करीब एक बजे जब इस निजी बस को जांच के लिए रोका गया, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। बस के भीतर का नजारा किसी खचाखच भरी जनरल बोगी की तरह दिख रहा था। चेकिंग में यह बात सामने आई कि बस बिना वैध परमिट और बिना रोड टैक्स चुकाए सड़कों पर दौड़ रही थी। इसके अलावा गाड़ी में क्षमता की तुलना में अत्यधिक ओवरलोडिंग की गई थी। नियमों के गंभीर उल्लंघन को देखते हुए परिवहन विभाग की टीम ने ओवरलोडिंग, बिना परमिट और बिना टैक्स भुगतान समेत विभिन्न धाराओं के तहत वाहन का चालान काटा और उसे रुद्रपुर स्थित रोडवेज डिपो परिसर में ले जाकर सीज कर दिया।

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31 सीट की स्वीकृत क्षमता पर 168 यात्रियों का जोखिमभरा सफर

नियमों के अनुसार इस स्लीपर बस में केवल 30 स्लीपर बर्थ और एक सीट दर्ज थी, जिस पर अधिकतम 31 लोग ही यात्रा कर सकते थे। हालांकि, जब चेकिंग टीम ने बस के अंदर मौजूद लोगों की संख्या जांचना शुरू किया, तो कुल 168 यात्री सवार मिले। इनमें 138 वयस्क नागरिक और 30 छोटे बच्चे शामिल थे। स्लीपर केबिनों, गलियारे और हर खाली जगह पर यात्रियों को बिठाया और लिटाया गया था। इतने बड़े पैमाने पर यात्रियों को बस में ठूंसकर लंबी दूरी के सफर पर भेजना न सिर्फ ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाना है, बल्कि यात्रियों की जान को सीधे तौर पर खतरे में डालने जैसा गंभीर अपराध है।

4 घंटे चला यात्रियों का गिनती अभियान और वीडियो रिकॉर्डिंग

बस में यात्रियों की अत्यधिक संख्या होने के कारण चेकिंग दस्ता भी हैरान रह गया। परिवहन विभाग के कर्मचारियों को रात के अंधेरे में बस से एक-एक यात्री को बाहर निकालने और उनकी पारदर्शी तरीके से गिनती करने में चार घंटे से अधिक का समय लग गया। पूरी प्रशासनिक कार्रवाई को पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए इसकी बाकायदा वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। आधी रात को यात्रियों और बच्चों की असुविधा को ध्यान में रखते हुए सीज की गई बस को रोडवेज स्टेशन परिसर के सुरक्षित स्थान पर खड़ा कराया गया, ताकि यात्री पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का उपयोग कर सकें।

208 किलोमीटर की निर्बाध यात्रा पर खड़े हुए गंभीर सवाल

इस पूरे मामले ने राज्यों की सीमा सुरक्षा और ट्रैफिक चेकिंग व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। लखीमपुर खीरी से रुद्रपुर तक की दूरी लगभग 208 किलोमीटर है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि 208 किलोमीटर के इस लंबे रास्ते में किसी भी जिले, पुलिस चौकी या परिवहन विभाग के चेकिंग पिकेट ने इस बस को रोकने या जांचने की कोशिश क्यों नहीं की। यह बस पंजाब के लुधियाना, खन्ना, जालंधर और अंबाला जैसे शहरों तक जाने वाली थी। रास्ते में पड़ने वाले अंतरराज्यीय चेकिंग प्वाइंट्स और सुरक्षा तंत्र की नजरों से इतनी भीषण ओवरलोडिंग का बच निकलना कई तरह के संदेह पैदा करता है। आखिर किसकी शह पर ऐसी बसें बिना परमिट सैकड़ों जिंदगियों को दांव पर लगाकर फर्राटा भर रही हैं, यह एक बड़ा प्रश्न बना हुआ है।

किराए के रिफंड पर फंसा पेंच और स्टेशन पर भटके यात्री

बस सीज होने के बाद सबसे ज्यादा मुसीबत उन बेबस यात्रियों पर टूटी, जो अपने छोटे-छोटे बच्चों और सामान के साथ सफर कर रहे थे। यात्रियों ने बताया कि निजी बस के ऑपरेटर ने लखीमपुर से चढ़ते समय ही उनसे प्रति व्यक्ति 700 रुपये से लेकर 800 रुपये तक का किराया एडवांस में वसूल लिया था। बस सीज हो जाने के बाद ऑपरेटर या उसके स्टाफ ने यात्रियों के पैसे वापस करने से साफ इनकार कर दिया। जब परिवहन विभाग ने यात्रियों को आगे भेजने के लिए सरकारी रोडवेज बसों का विकल्प तलाशने की कोशिश की, तो किराए का मुद्दा आड़े आ गया।

परिवहन निगम और एआरटीओ के बीच तालमेल की कमी

यात्रियों की दयनीय स्थिति को देखते हुए परिवहन विभाग की टीम ने उन्हें रुद्रपुर रोडवेज डिपो पहुंचाया और निगम प्रबंधन से उन्हें आगे की मंजिल तक भेजने का अनुरोध किया। हालांकि, रोडवेज के सहायक महाप्रबंधक मधुसूदन मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यात्रियों से जब बातचीत की गई, तो उन्होंने दोबारा सरकारी बस का टिकट लेने या किराया देने में असमर्थता जताई। रोडवेज प्रशासन का कहना था कि बिना किराए के नि:शुल्क बस सेवा उपलब्ध कराना उनके नियमों के दायरे में संभव नहीं है। नतीजा यह हुआ कि रात के वक्त महिलाओं और बच्चों के साथ यात्री स्टेशन पर ही फंसे रहे और उन्हें अपने रिश्तेदारों से पैसे मंगवाकर या अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा लेकर आगे जाने के लिए विवश होना पड़ा।

तीन दिनों में ओवरलोडिंग का दूसरा बड़ा मामला

क्षेत्र में निजी बस संचालकों की मनमानी और नियमों के उल्लंघन का यह पहला मामला नहीं है। महज तीन दिनों के भीतर रुद्रपुर और आसपास के इलाकों में यह दूसरा बड़ा मामला सामने आया है। इससे पहले शनिवार रात को किच्छा क्षेत्र में परिवहन विभाग ने जगदंबा ट्रैवल्स की एक बस को पकड़ा था। वह बस टनकपुर से लुधियाना की ओर जा रही थी और उसकी स्वीकृत क्षमता केवल 50 सवारियों की थी, लेकिन चेकिंग के दौरान उसमें 110 यात्री ठंसकर भरे हुए पाए गए थे। उस मामले में भी कड़ी कार्रवाई करते हुए बस का परमिट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया था।

ओवरलोडिंग के खिलाफ चलेगा कड़ा अभियान

कार्रवाई के संबंध में एआरटीओ परिवहन कर अधिकारी जितेंद्र सिंगवान ने बताया कि बिना टैक्स, बिना परमिट और क्षमता से कई गुना अधिक ओवरलोडिंग के गंभीर आरोपों में बस का चालान काटकर उसे रुद्रपुर डिपो में सीज किया गया है। उन्होंने कहा कि यात्रियों की आगे की यात्रा के सिलसिले में रोडवेज अधिकारियों के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। वहीं विभाग ने स्पष्ट किया है कि सड़कों पर यात्रियों की जान जोखिम में डालने वाले वाहनों के खिलाफ यह विशेष चेकिंग अभियान लगातार जारी रहेगा। इसके साथ ही आम जनता से भी अपील की गई है कि वे ऐसे नियम तोड़ने वाले वाहनों में सफर न करें और ओवरलोडिंग की सूचना तत्काल संबंधित विभाग को दें।

सवाल-जवाब

रुद्रपुर में पकड़ी गई बस में कुल कितने यात्री सवार थे?
31 सीटों की स्वीकृत क्षमता वाली इस बस में कुल 168 यात्री सवार थे, जिनमें 138 वयस्क और 30 बच्चे शामिल थे।
यह बस कहां से कहां जा रही थी?
यह निजी स्लीपर बस उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से रवाना होकर पंजाब के लुधियाना, खन्ना, जालंधर और अंबाला जा रही थी।
परिवहन विभाग ने इस बस पर क्या कार्रवाई की?
बिना परमिट, बिना टैक्स भुगतान और अत्यधिक ओवरलोडिंग के आरोप में बस का चालान काटकर उसे रुद्रपुर रोडवेज स्टेशन में सीज कर दिया गया।
यात्रियों को आगे की यात्रा में परेशानी क्यों हुई?
निजी बस संचालक ने यात्रियों का 700 से 800 रुपये का किराया वापस नहीं किया, और यात्री दोबारा रोडवेज बस का टिकट लेने में असमर्थ थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Karan Malhotra@karan-malhotra·76 दिन पहले

लखीमपुर से पंजाब तक का यह सफर मात्र ओवरलोडिंग नहीं, बल्कि संभावित बड़ी आपदा थी। इतनी लंबी दूरी तय करने के दौरान यदि कोई दुर्घटना होती, तो 168 जिंदगियों को बचाना असंभव होता। बिना परमिट और टैक्स के चल रहे ऐसे वाहनों पर परिवहन विभाग की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन राज्यों की सीमा चौकियों पर ऐसी अवैध गाड़ियों की आवाजाही रोकने के लिए और अधिक सख्त प्रवर्तन तंत्र की आवश्यकता है, ताकि माफिया बिना खौफ के यात्रियों की जान दांव पर न लगा सकें।

Rohan Verma@rohan-verma·76 दिन पहले

यह घटना उत्तर प्रदेश से पंजाब और अन्य राज्यों के बीच चलने वाले अवैध परिवहन सिंडिकेट्स की पोल खोलती है। लखीमपुर खीरी से बिना परमिट और टैक्स चुकाए इतनी लंबी दूरी की यात्रा कराना यह साबित करता है कि प्रवर्तन तंत्र की मिलीभगत या ढिलाई के बिना ऐसा जोखिम भरा ओवरलोडिंग संभव नहीं है। इस कार्रवाई के बाद अब परिवहन विभाग को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमाओं पर संयुक्त जांच अभियान और सख्त करने होंगे, ताकि अंतर-राज्यीय मार्गों पर यात्रियों की जान से खिलवाड़ कर रहे ऐसे माफियाओं पर स्थायी लगाम लगाई जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·76 दिन पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह समझना आवश्यक है कि 31 सीटों वाली बस में 168 लोगों का सफर महज एक ट्रैफिक चालान का मामला नहीं है, बल्कि यह अंतर-राज्यीय मार्गों पर सक्रिय संगठित माफिया की कार्यप्रणाली को बेनकाब करता है। बिना वैध परमिट और कर के इस तरह का संचालन तब तक जारी रह सकता है जब तक प्रवर्तन एजेंसियों के जमीनी स्तर के तंत्र पर सख्त प्रशासनिक निगरानी न रखी जाए। यदि समय रहते लखीमपुर खीरी और रुद्रपुर के बीच की इस पूरी परिवहन श्रृंखला की उच्च स्तरीय जाँच नहीं की गई, तो ऐसे वाहन गरीब यात्रियों की जान के लिए बड़ा खतरा बने रहेंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·76 दिन पहले

यह घटना उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्यों के बीच चलने वाले निजी यात्री वाहनों में व्याप्त भारी भ्रष्टाचार और प्रवर्तन तंत्र की विफलता को उजागर करती है। 31 लोगों की क्षमता वाली बस में 168 यात्रियों का सफर करना यह दर्शाता है कि अवैध परिवहन माफिया बिना किसी डर के लंबी दूरी के मार्गों पर बेखौफ संचालन कर रहे हैं। परिवहन और पुलिस विभागों को ऐसे अनधिकृत एजेंटों और बस मालिकों के खिलाफ केवल चालान तक सीमित न रहकर सख्त आपराधिक कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता।

Karan Malhotra@karan-malhotra·76 दिन पहले

यह मामला महज़ मोटर व्हीकल एक्ट के उल्लंघन का नहीं, बल्कि मानव जीवन को दांव पर लगाने वाला गंभीर आपराधिक कृत्य है। 31 की क्षमता पर 168 लोगों को ठूंसना इस बात का प्रमाण है कि अंतर-राज्यीय मार्गों पर टैक्स चोरी और नियमों की अनदेखी संगठित रूप से चल रही है। यदि इस मामले में बस मालिकों और परमिट धारकों पर भारतीय न्याय संहिता के तहत गैर-इरादतन हत्या की कोशिश या आपराधिक षड्यंत्र का मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता, तो ऐसे माफियाओं के हौसले बुलंद रहेंगे और नियमों की यह धज्जियां उड़ती रहेंगी।

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