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आईआईटी बॉम्बे छात्र मौत मामले में प्रोफेसर के समर्थन पर कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद की खिंचाईबिहार
21 सित॰ 2026, 3:26 pm (4 दिन पहले)· 0

आईआईटी बॉम्बे छात्र मौत मामले में प्रोफेसर के समर्थन पर कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद की खिंचाई

आईआईटी बॉम्बे में बीटेक छात्र की मौत के बाद कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने आरोपी प्रोफेसर का समर्थन किया और छात्रों की सहनशीलता पर सवाल उठाए, जिससे विवाद खड़ा हो गया है.

आईआईटी बॉम्बे में बीटेक के एक छात्र की संदिग्ध मौत के बाद उपजा विवाद अब गंभीर सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का रूप ले चुका है. एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहे इस छात्र ने 18 सितंबर की शाम कथित तौर पर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी. इस दुखद घटना के बाद मृतक के परिजनों ने सीधे तौर पर परीक्षा निरीक्षक और प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. पिता का सीधा आरोप है कि उनके बेटे को पिछले तीन महीनों से लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था और उस पर अपमानजनक जातिसूचक टिप्पणियां की जा रही थीं. पिता की आधिकारिक शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और जांच का जिम्मा मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है.

शमा मोहम्मद के बयान से भड़का असंतोष

इस संवेदनशील माहौल में कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद की ओर से आए एक बयान ने पूरे मामले में नया विवाद छेड़ दिया है. उन्होंने मामले के आरोपी प्रोफेसर का पक्ष लेते हुए वर्तमान दौर के विद्यार्थियों की सहनशक्ति और मानसिक क्षमता पर ही टिप्पणी कर दी. उन्होंने यह दलील रखी कि उनके दौर की पीढ़ी मानसिक तौर पर काफी सुदृढ़ हुआ करती थी. छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके इस रुख को बेहद असंवेदनशील करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है.

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परीक्षा हॉल का घटनाक्रम और परिजनों का रुख

जांच के शुरुआती विवरण के अनुसार, शुक्रवार के दिन आयोजित मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान छात्र के पास कथित रूप से एक मोबाइल फोन पाया गया था. इस विषय पर संस्थान का कहना है कि छात्र परीक्षा कक्ष में फोन के साथ पकड़ा गया था और उसने सवालों के हल तलाशने के मकसद से प्रश्न पत्र को चैटजीपीटी पर अपलोड किया था. संस्थान के मुताबिक उस समय छात्र के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ नहीं की गई थी.

दूसरी ओर, पीड़ित छात्र के पिता का स्पष्ट दावा है कि मोबाइल फोन से जुड़ी बात महज एक बहाना बनाकर पेश की जा रही है. उनका कहना है कि प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला काफी समय से छात्र को जानबूझकर प्रताड़ित कर रहे थे और जाति से जुड़े अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर रहे थे. घटना के संवेदनशील स्वरूप और लगाए गए गंभीर आरोपों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मामले की पूरी केस डायरी मुंबई क्राइम ब्रांच को हस्तांतरित कर दी है.

सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता का तर्क

विवाद बढ़ने पर शमा मोहम्मद ने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि वह इस घटनाक्रम में प्रोफेसर के साथ खड़ी हैं. उन्होंने अपनी राय रखते हुए कहा कि अगर कोई परीक्षार्थी परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग करते हुए पाया जाता है तो शिक्षक द्वारा उसे फटकार लगाना या परीक्षा कक्ष से बाहर भेजना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यदि छात्र को किसी भी स्तर पर जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ रहा था तो उसे संस्थान के अनुसूचित जाति और जनजाति विभाग में शिकायत दर्ज करानी चाहिए थी.

उन्होंने पुरानी पीढ़ी का हवाला देते हुए आगे कहा कि उनके बचपन के दिनों में भी गलतियां करने पर शिक्षक और माता-पिता कड़ी डांट लगाते थे, लेकिन उस समय की पीढ़ी मानसिक रूप से कहीं अधिक मजबूत हुआ करती थी. इसके साथ ही उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता जताई और कॉलेजों से आग्रह किया कि वे परिसर में प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य थेरेपिस्ट की नियुक्ति सुनिश्चित करें.

संस्थानों में जवाबदेही और उत्पीड़न पर उठते सवाल

देश के शीर्ष तकनीकी संस्थान में एक होनहार युवा की असमय मृत्यु ने जहां उसके परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया है, वहीं राजनीतिक नेताओं द्वारा आरोपी का बचाव किए जाने पर तीखी बहस शुरू हो गई है. छात्र समुदाय और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या मानसिक मजबूती का हवाला देकर परिसरों में होने वाले कथित जातिगत भेदभाव और शिक्षकों के व्यवहार को नजरअंदाज किया जा सकता है. इस बीच मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी परिसर में मौजूद अन्य विद्यार्थियों और संबंधित प्रोफेसर से पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में लगे हैं.

सवाल-जवाब

आईआईटी बॉम्बे में किस विभाग के छात्र की मौत हुई?
यह छात्र संस्थान के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में द्वितीय वर्ष का बीटेक विद्यार्थी था.
छात्र की मौत कब हुई?
छात्र ने 18 सितंबर की शाम को कथित तौर पर अपनी जीवनलीला समाप्त की थी.
पिता ने आरोपी प्रोफेसर पर क्या गंभीर आरोप लगाए हैं?
पिता ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर पिछले तीन महीनों से उनके बेटे के साथ जातिसूचक टिप्पणी और मानसिक उत्पीड़न कर रहे थे.
कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने इस मामले पर क्या कहा?
उन्होंने आरोपी प्रोफेसर का समर्थन किया और कहा कि पुरानी पीढ़ी के छात्र अधिक मानसिक रूप से मजबूत हुआ करते थे.
संस्थान के अनुसार परीक्षा हॉल में क्या हुआ था?
संस्थान के मुताबिक छात्र परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के साथ पाया गया था और उसने प्रश्न पत्र चैटजीपीटी पर अपलोड किया था.
मामले की जांच कौन सी एजेंसी कर रही है?
मुंबई पुलिस ने इस संवेदनशील मामले की विस्तृत जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

आईआईटी बॉम्बे के छात्र की दुखद मृत्यु और राजनीतिक बयानों से उपजा यह विवाद अब कॉर्पोरेट और शैक्षणिक संस्थानों की मानसिक स्वास्थ्य नीतियों पर गहरा सवाल खड़ा करता है। इस घटना से कॉर्पोरेट और उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्यस्थल के तनाव, संस्थागत दबाव और अनुपालन तंत्र की समीक्षा अनिवार्य हो गई है, जिससे निवेशकों और हितधारकों के बीच भी संवेदनशीलता और जवाबदेही की मांग तेज होगी।

Rohan Gupta@rohan-gupta·3 दिन पहले

रविकेश के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह प्रकरण इस बात को रेखांकित करता है कि जब शैक्षणिक और उच्च-तकनीकी मूल्यांकन प्रणालियों में जनरेटिव एआई और डिजिटल टूल्स का उपयोग बढ़ता है, तब संस्थानों को केवल तकनीकी नियंत्रण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। एआई-संचालित परीक्षाओं और प्रॉक्टरिंग के इस दौर में मानसिक स्वास्थ्य और अनुशासनात्मक दबाव के बीच का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे कार्यस्थलों और परिसरों में एथिकल गवर्नेंस और मानवीय संवेदनाओं की एक नई रूपरेखा तैयार करने की सख्त आवश्यकता महसूस हो रही है।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

आईआईटी बॉम्बे के इस छात्र मौत मामले में राजनीतिक बयानों का आना यह दर्शाता है कि अब उच्च शिक्षण संस्थानों के गंभीर मुद्दे भी तुरंत राजनीतिक बहस का हिस्सा बन जाते हैं। जब एक तरफ परिवार जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगा रहा है और मामला क्राइम ब्रांच के पास है, ऐसे में राष्ट्रीय प्रवक्ताओं के गैर-जिम्मेदाराना बयान छात्रों के बीच आक्रोश को और बढ़ाते हैं। इस संवेदनशीलता के दौर में संस्थानों और नेताओं दोनों को बेहद संयम बरतने की आवश्यकता है ताकि निष्पक्ष जांच प्रभावित न हो।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह घटना उच्च शिक्षण संस्थानों में संस्थागत जवाबदेही और पुलिस-क्राइम ब्रांच की चल रही निष्पक्ष जांच के बीच एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले चुकी है। जब एक तरफ गंभीर जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना के आरोप एफआईआर में दर्ज हैं, तब राजनीतिक दलों के गैर-संवेदनशील बयानों से कैंपस की राजनीति और ध्रुवीकरण के और तेज होने की पूरी आशंका है। यदि राजनीतिक नेतृत्व ने इस संवेदनशीलता को नहीं समझा, तो यह मामला केवल एक संस्थान की त्रासदी तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत सुधारों और छात्र सुरक्षा का एक बड़ा ज्वलंत राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

इस मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच को जांच सौंपे जाने के बाद अब कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा है। एक तरफ़ प्रोफेसर पर गंभीर आपराधिक धाराओं और एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोपों की जांच चल रही है, वहीं राजनेताओं के इस तरह के बयानों से न्याय प्रक्रिया प्रभावित होने का ख़तरा रहता है। आगे की फोरेंसिक जांच और चैटजीपीटी के इस्तेमाल से जुड़े तकनीकी साक्ष्य ही यह तय करेंगे कि संस्थान के भीतर मानसिक प्रताड़ना की बात कितनी सही थी।

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