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आईआईटी जोधपुर में विकसित हो रहा स्मार्ट एआई सहायक, चिकित्सा से लेकर उद्योगों तक बदलेगी कार्यप्रणालीराजस्थान
16 सित॰ 2026, 10:03 pm (8 दिन पहले)· 1

आईआईटी जोधपुर में विकसित हो रहा स्मार्ट एआई सहायक, चिकित्सा से लेकर उद्योगों तक बदलेगी कार्यप्रणाली

आईआईटी जोधपुर में एक ऐसे स्मार्ट एआई सहायक पर शोध चल रहा है जो टेक्स्ट, आवाज, तस्वीरें और सेंसर डेटा को एक साथ समझ सकेगा। यह तकनीक भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल होगी और कम संसाधनों में तेजी से काम करेगी।

जोधपुर में भविष्य की तकनीक को आकार देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। एक ऐसी व्यवस्था की कल्पना कीजिए जहां किसी चिकित्सक के सामने मरीज की तमाम पुरानी मेडिकल रिपोर्ट, जांच से जुड़ी तस्वीरें और अन्य जानकारियां स्वतः उपलब्ध हों, और सिस्टम उन सबका विश्लेषण कर सटीक निष्कर्ष सामने रख दे। इसी तरह किसी विनिर्माण संयंत्र में मशीन के भीतर खराबी आने से ठीक पहले उसके शुरुआती संकेतों को भांपकर चेतावनी मिल जाए। इन सभी संभावनाओं को जमीन पर उतारने के लिए आईआईटी जोधपुर के परिसर में गहन शोध कार्य जारी है। संस्थान की ओर से एक ऐसा उन्नत स्मार्ट सहायक विकसित किया जा रहा है जो एक साथ तस्वीर, दस्तावेज, ध्वनि, मेडिकल रिपोर्ट और विभिन्न सेंसर्स से मिलने वाले डेटा को सहजता से समझ सकेगा। इस पूरी तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे पूरी तरह से भारतीय परिस्थितियों, प्राथमिकताओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है, ताकि यह आकार में छोटा होने के साथ-साथ तेज और किफायती भी साबित हो सके।

मल्टीमॉडल लर्निंग और कम संसाधनों पर जोर

आईआईटी जोधपुर की मशीन इंटेलिजेंस लैब के भीतर कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. दिव्या सक्सेना के मार्गदर्शन में यह पूरा शोध आगे बढ़ रहा है। इस पूरी तकनीक को मुख्य रूप से तीन मजबूत स्तंभों पर खड़ा किया जा रहा है, जिसमें मल्टीमॉडल लर्निंग, कुशल कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्मार्ट एजेंट्स शामिल हैं। इस परियोजना का मूल उद्देश्य बड़े और अत्यधिक महंगे सिस्टम्स पर से निर्भरता को कम करना है, जिनके संचालन के लिए अमूमन बहुत भारी-भरकम कंप्यूटिंग संसाधनों और लगातार हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी की आवश्यकता बनी रहती है। शोधकर्ताओं का पूरा ध्यान इस बात पर है कि इस तकनीक को कम से कम संसाधनों के बीच भी बेहद प्रभावी और सुगम तरीके से काम करने योग्य बनाया जा सके, जिससे यह व्यापक स्तर पर आसानी से उपलब्ध हो सके।

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स्वास्थ्य और औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े बदलाव की उम्मीद

स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में यह स्मार्ट प्रणाली क्रांतिकारी साबित हो सकती है। यह मरीज की पुरानी फाइलों, मेडिकल स्कैन और चिकित्सकों के नोट्स को एक साथ समझकर डॉक्टरों को सटीक निर्णय लेने में बहुमूल्य सहायता प्रदान कर सकती है। दूसरी ओर, औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों में यह तकनीक मशीनों की तस्वीरों, सेंसर से मिलने वाले डेटा, लॉग फाइलों और तकनीकी दस्तावेजों का गहराई से विश्लेषण करने में सक्षम होगी। इसके जरिए किसी भी मशीन में खराबी आने के संकेत समय से पहले ही पहचाने जा सकेंगे। इससे फैक्ट्रियों में मशीनों के अचानक ठप हो जाने के कारण होने वाले भारी नुकसान को रोकने और समय बचाने में काफी मदद मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

शिक्षा जगत और शोध के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं

केवल चिकित्सा और उद्योग तक ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी इस तकनीक के उपयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। जटिल शैक्षणिक दस्तावेजों, भारी-भरकम शोध पत्रों और विभिन्न अध्ययन सामग्रियों को आसानी से समझकर विद्यार्थियों के लिए उपयोगी और सरल निष्कर्ष तैयार किए जा सकेंगे। भारत जैसे विशाल देश में इसके उपयोग का दायरा बहुत व्यापक है। यूडीआईएसई प्लस 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, देश के भीतर कुल 14.71 लाख स्कूल संचालित हो रहे हैं और इनमें 24.69 करोड़ विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जबकि उच्च शिक्षा के स्तर पर विद्यार्थियों की संख्या 4.46 करोड़ तक पहुंचती है। डॉ. दिव्या सक्सेना का यही कहना है कि उनका मुख्य लक्ष्य एक ऐसा व्यावहारिक और सक्षम सहायता तंत्र तैयार करना है, जो केवल कोरी जानकारी न परोसे, बल्कि आम लोगों और विभिन्न संस्थानों के वास्तविक कामकाज को गहराई से समझकर उनके लिए उपयोगी समाधान सुनिश्चित कर सके।

सवाल-जवाब

आईआईटी जोधपुर में किस नई तकनीक पर शोध चल रहा है?
आईआईटी जोधपुर में एक ऐसा स्मार्ट एआई सहायक विकसित किया जा रहा है जो टेक्स्ट, आवाज, तस्वीरें, दस्तावेज और सेंसर डेटा को एक साथ समझ सकता है।
यह शोध किस प्रयोगशाला में और किसके नेतृत्व में हो रहा है?
यह शोध कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. दिव्या सक्सेना के नेतृत्व में मशीन इंटेलिजेंस लैब में किया जा रहा है।
इस नई तकनीक के प्रमुख आधार क्या हैं?
इस तकनीक को मुख्य रूप से तीन आधारों मल्टीमॉडल लर्निंग, कुशल कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्मार्ट एजेंट्स पर विकसित किया जा रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में यह तकनीक किस प्रकार मददगार होगी?
यह प्रणाली मरीज की पुरानी रिपोर्ट, मेडिकल तस्वीरों और डॉक्टर के नोट्स को एक साथ समझकर चिकित्सकों को सटीक निर्णय लेने में सहायता करेगी।
औद्योगिक क्षेत्र में इस प्रणाली का क्या उपयोग है?
यह मशीन की तस्वीर, सेंसर डेटा और तकनीकी जानकारी का विश्लेषण कर खराबी के संकेत पहले ही पहचान सकती है, जिससे मशीनें अचानक बंद होने से बच सकेंगी।
शिक्षा क्षेत्र के संदर्भ में रिपोर्ट में कौन से आंकड़े दिए गए हैं?
यूडीआईएसई प्लस 2024-25 के अनुसार देश में 14.71 लाख स्कूल और 24.69 करोड़ विद्यार्थी हैं, जबकि उच्च शिक्षा में 4.46 करोड़ विद्यार्थी पंजीकृत हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·7 दिन पहले

आईआईटी जोधपुर का यह शोध यूरोप के उन रणनीतिक प्रयासों के समान है जहाँ स्वायत्त और कम संसाधन वाले एआई सिस्टम्स पर जोर दिया जा रहा है। चिकित्सा और उद्योगों में मल्टीमॉडल लर्निंग का यह भारतीय मॉडल भविष्य में वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए किफायती तकनीक का नया पैमाना बन सकता है, बशर्ते इसे डेटा सुरक्षा के सख्त मानकों के साथ लागू किया जाए।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

आईआईटी जोधपुर की यह पहल केवल घरेलू एआई मॉडल तैयार करने की दिशा में ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह देश के इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और हेल्थकेयर सेक्टर में कंप्यूटेशनल लागत को भी भारी स्तर पर घटा सकती है। जब मल्टीमॉडल तकनीक कम संसाधनों और एज डिवाइस पर काम करेगी, तो भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों के अस्पतालों और विनिर्माण इकाइयों में डेटा प्रोसेसिंग की गति तेज होगी और विदेशी साॅफ्टवेयर पर निर्भरता घटेगी। भविष्य में यह तकनीक स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा कर सकती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

आईआईटी जोधपुर की यह शोध पहल भारत की तकनीकी संप्रभुता को मजबूत करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। जब स्थानीय प्राथमिकताओं और कम संसाधनों के अनुकूल एआई मॉडल तैयार होंगे, तो देश की डेटा सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा। यह नवाचार नीति निर्माताओं के लिए ऐसे स्वदेशी डिजिटल ढांचे तैयार करने का मार्ग प्रशस्त करता है जो वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में भारत को आत्मनिर्भर बना सकते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

आईआईटी जोधपुर की यह पहल स्वदेशी तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कम संसाधनों और भारतीय प्राथमिकताओं के अनुकूल इस मल्टीमॉडल एआई प्रणाली से स्वास्थ्य और औद्योगिक विनिर्माण क्षेत्रों में डेटा आधारित निर्णय लेने की क्षमता तेजी से बढ़ेगी। आगे चलकर यदि इस शोध को स्थानीय एमएसएमई और ग्रामीण चिकित्सा बुनियादी ढांचे से जोड़ा जा सके, तो यह देश के दूरदराज के इलाकों में लागत प्रभावी और त्वरित समाधान उपलब्ध कराने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

आईआईटी जोधपुर द्वारा विकसित किया जा रहा यह स्मार्ट एआई सहायक तकनीक और डेटा सुरक्षा के मोर्चे पर भी बेहद अहम है। जब संवेदनशील मेडिकल रिकॉर्ड और औद्योगिक सेंसर डेटा बाहरी महंगे क्लाउड सिस्टम के बजाय स्थानीय स्तर पर और कम संसाधनों में संसाधित होंगे, तो डेटा संप्रभुता और सुरक्षा का जोखिम स्वतः कम हो जाएगा। इस स्वदेशी तकनीक से देश के भीतर ही क्रिटिकल डेटा सुरक्षित रखने की क्षमता मजबूत होगी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण से एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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