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आजमगढ़ के प्रमुख चौराहों पर बदहाल हुए सुंदर फव्वारे, नगर पालिका ने संस्थाओं को नोटिस भेजने की तैयारी कीउत्तर प्रदेश
7 अक्तू॰ 2026, 8:01 pm (21 दिन पहले)· 2

आजमगढ़ के प्रमुख चौराहों पर बदहाल हुए सुंदर फव्वारे, नगर पालिका ने संस्थाओं को नोटिस भेजने की तैयारी की

आजमगढ़ में पीपीपी मॉडल के तहत सजाए गए चौराहे देखरेख न होने से कचरे और विज्ञापनों के ढेर में तब्दील हो गए हैं, जिसके बाद नगर पालिका ने सर्वे करवाकर जिम्मेदार संस्थाओं को नोटिस जारी करने का फैसला लिया है।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ शहर को एक नया और आधुनिक रूप देने के मकसद से प्रमुख चौराहों व तिराहों के सुंदरीकरण का काम शुरू किया गया था। इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल का सहारा लिया गया था, जिसके अंतर्गत निजी संस्थाओं और व्यक्तियों के सहयोग से भव्य फव्वारे और आकर्षक कलात्मक ढांचे तैयार कराए गए थे। शुरुआती दिनों में शहर के प्रवेश और मुख्य मार्गों पर बने ये चौराहे लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे, लेकिन नियमित देखरेख के अभाव में अब इनकी स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। जिन फव्वारों से कभी पानी की खूबसूरत फुहारें निकलनी चाहिए थीं, वे अब केवल सूखे ढांचे बनकर रह गए हैं और उनमें गंदा पानी तथा कूड़े के ढेर जमा हो रहे हैं।

बावली मोड़ और करतालपुर तिराहे पर पसरी गंदगी और अव्यवस्था

शहर के सबसे व्यस्त रास्तों में शामिल बावली मोड़ चौराहे की मौजूदा हालत इस प्रशासनिक और प्रबंधकीय लापरवाही की सीधी गवाही देती है। यहां सुंदरीकरण योजना के तहत तैयार किया गया ढांचा और फव्वारा अब धूल की मोटी परतों से पूरी तरह ढका हुआ है। इसके चारों तरफ विभिन्न प्रचार अभियानों के पर्चे, बैनर और पोस्टर चिपका दिए गए हैं, जिसके चलते यह आकर्षक ढांचा अब केवल एक विज्ञापन बोर्ड बनकर सिमट गया है। फव्वारे की मूल खूबसूरती इन पोस्टरों के पीछे पूरी तरह दब चुकी है और इसकी बनावट पहचान में भी नहीं आती।

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इसी तरह की खराब स्थिति शहर के करतालपुर तिराहे पर भी देखने को मिल रही है। करतालपुर तिराहे पर स्थापित किए गए मॉडल और फव्वारे के निचले हिस्से में बारिश और नालियों का बदबूदार गंदा पानी भरा हुआ है। पानी की उचित निकासी न होने के कारण यहां जमा यह गंदा पानी न सिर्फ आने-जाने वाले लोगों के लिए भारी दुर्गंध पैदा कर रहा है, बल्कि मच्छरों के पनपने की एक बड़ी वजह भी बन गया है। इससे आसपास के रहवासियों और राहगीरों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

शहर के अन्य चौराहों पर टूटी दीवारें और गायब लाइटें

आजमगढ़ के अन्य चौराहों और तिराहों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। रख-रखाव की उचित व्यवस्था न होने से कई जगहों पर चौराहों की सुरक्षात्मक चारदीवारी टूटकर बिखर रही है। फुटपाथ और चौराहों पर लगाई गई खूबसूरत टाइल्स उखड़ चुकी हैं और रात के समय रोशनी बिखेरने वाली सजावटी लाइटें या तो पूरी तरह खराब हो गई हैं या गायब हो चुकी हैं। जिन स्थानों को शहर की पहचान और शान बढ़ाने के लिए विकसित किया गया था, वे आज अनधिकृत होर्डिंग्स और अवैध पोस्टरों के जंगल में तब्दील होकर अपनी पहचान खो चुके हैं।

नगर पालिका ने दोनों जूनियर इंजीनियरों को दिया सर्वे का जिम्मा

शहर के चौराहों की इस खस्ताहाली को संज्ञान में लेते हुए नगर पालिका प्रशासन ने अब सक्रिय कदम उठाने की बात कही है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी बृजेश कुमार ने स्वीकार किया है कि चौराहों की वर्तमान दशा वास्तव में चिंताजनक और बदहाल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर पालिका क्षेत्र के ज्यादातर चौराहों के सुंदरीकरण और निर्माण का काम पीपीपी मॉडल के अंतर्गत अलग-अलग सामाजिक संस्थाओं, व्यक्तियों अथवा व्यापारिक समूहों को सौंपा गया था। उन्हीं संस्थाओं ने अपने संसाधनों से इनका निर्माण कराया था, लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने के बाद नियमित मरम्मत और सफाई न होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।

इस समस्या के समाधान के लिए अधिशासी अधिकारी ने नगर पालिका क्षेत्र के दोनों जूनियर इंजीनियरों (जेई) को तुरंत प्रभाव से विस्तृत सर्वेक्षण करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। दोनों इंजीनियरों को मौके पर जाकर हर एक चौराहे की भौतिक स्थिति की विस्तृत जांच करनी होगी। इस सर्वे के दौरान यह दर्ज किया जाएगा कि किस चौराहे पर लाइटें खराब हैं, कहां चारदीवारी टूटी है, किन जगहों से टाइल्स उखड़ी हैं और कहां फव्वारों के भीतर गड्ढे या जलभराव की स्थिति बनी हुई है। मूल निर्माण के समय लगाई गई सामग्रियों में हुए नुकसान का पूरा ब्योरा तैयार किया जाएगा।

लापरवाह संस्थाओं को जारी होगा नोटिस, मरम्मत की अपील

अधिशासी अधिकारी बृजेश कुमार के अनुसार सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट तैयार होते ही संबंधित संस्थाओं और जिम्मेदार व्यक्तियों को नगर पालिका की तरफ से औपचारिक लिखित नोटिस भेजा जाएगा। इस नोटिस के जरिए उन्हें इन चौराहों की तत्काल मरम्मत और रंग-रोगन कराने का निर्देश दिया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि चूंकि इन ढांचों का निर्माण उन संस्थाओं ने अपने नाम और प्रतिष्ठा के तहत कराया था, इसलिए इनके दैनिक रख-रखाव और सुरक्षा की व्यावहारिक जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।

अधिकारी ने यह भी रेखांकित किया कि यदि ये चौराहे साफ-सुथरे और व्यवस्थित रहेंगे तो इससे शहर की छवि तो सुधरेगी ही, साथ ही इन संस्थाओं और उनके पूर्वजों का सम्मान भी समाज में बना रहेगा। इसी वजह से प्रशासन ने संस्थाओं से स्वयं आगे आकर अपने गोद लिए चौराहों का निरीक्षण करने और उन्हें पुन: व्यवस्थित करने की अपील की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर पालिका के इस सर्वे और नोटिस के बाद चौराहों की सूरत बदलती है या फिर ये फव्वारे लंबे समय तक धूल, गंदगी और विज्ञापनों के तले दबे रहते हैं।

सवाल-जवाब

आजमगढ़ के चौराहों पर फव्वारे किस मॉडल के तहत बनाए गए थे?
ये फव्वारे और सुंदरीकरण के ढांचे पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत निजी संस्थाओं, समूहों और व्यक्तियों के सहयोग से बनाए गए थे।
बावली मोड़ चौराहे की वर्तमान स्थिति कैसी है?
बावली मोड़ पर बना फव्वारा और ढांचा धूल की मोटी परतों से ढका हुआ है और चारों तरफ पर्चे-बैनर चिपकाए जाने के कारण यह महज एक विज्ञापन बोर्ड बन चुका है।
करतालपुर तिराहे पर किस प्रकार की समस्या बनी हुई है?
करतालपुर तिराहे के फव्वारे के गड्ढे में बदबूदार गंदा पानी जमा है, जिससे गंदगी फैल रही है और मच्छरों के पनपने से बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने क्या कदम उठाए हैं?
अधिशासी अधिकारी बृजेश कुमार ने नगर पालिका क्षेत्र के दोनों जूनियर इंजीनियरों को चौराहों का विस्तृत सर्वे करने और नुकसान की सूची बनाने के निर्देश दिए हैं।
सर्वे के बाद नगर पालिका प्रशासन क्या करेगा?
सर्वे रिपोर्ट पूरी होने के बाद निर्माण कराने वाली संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों को लिखित नोटिस भेजकर चौराहों की मरम्मत कराने का निर्देश दिया जाएगा।
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टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·21 दिन पहले

शहर को सुंदर बनाने के लिए पीपीपी मॉडल पर काम तो शुरू कर दिया, लेकिन क्या किसी ने यह नहीं सोचा था कि इतने बड़े प्रोजेक्ट की लगातार देखभाल कौन करेगा? जब प्राइवेट संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी भूल गईं, तो प्रशासन की नजर इन पर इतने दिनों तक क्यों नहीं पड़ी?

Ravikash Gupta@ravikash·21 दिन पहले

सिर्फ संस्थाओं को नोटिस भेजने से क्या होगा, नगर पालिका खुद भी तो सोती रही इतने दिन।

Arjun Mehta@arjun-mehta·21 दिन पहले

बृजेश कुमार जी को नोटिस देने से पहले अपने दोनों जूनियर इंजीनियरों से पूछना चाहिए कि सर्वे का काम इतने दिन से रुका क्यों था।

Rohan Verma@rohan-verma·21 दिन पहले

चौराहों की ये हालत देख कर दुख होता है। पीपीपी मॉडल के नाम पर सिर्फ बोर्ड लगा दिए जाते हैं, देखरेख करने कोई नहीं आता। नगर पालिका को पहले ही नोटिस भेज देना चाहिए था।

Karan Malhotra@karan-malhotra·21 दिन पहले

रोhan, बात सही है आपकी, पर मुझे लगता है सारा दोष सिर्फ़ संस्थाओं पर डालना ठीक नहीं है। नगर पालिका की भी तो कोई जिम्मेदारी बनती थी कि समय पर चेकिंग करती।

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