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अखिल गोगोई ने ऊपरी असम बाढ़ राहत की मांग को लेकर खत्म किया उपवासअसम
17 सित॰ 2026, 6:19 pm (14 दिन पहले)· 2

अखिल गोगोई ने ऊपरी असम बाढ़ राहत की मांग को लेकर खत्म किया उपवास

रायजोर दल के अध्यक्ष और विधायक अखिल गोगोई ने ऊपरी असम में बाढ़ पीड़ितों के लिए बेहतर मुआवजे और राहत की मांग को लेकर गुवाहाटी में अपना एक दिवसीय उपवास समाप्त कर दिया।

रायजोर दल के अध्यक्ष और शिवसागर विधायक अखिल गोगोई ने गुरुवार को गुवाहाटी में अपना एक दिवसीय उपवास समाप्त कर दिया। उनका यह विरोध प्रदर्शन ऊपरी असम में हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए पर्याप्त राहत और मुआवजे की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन के दौरान बाढ़ से हुई तबाही की तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया था, ताकि स्थिति की गंभीरता को उजागर किया जा सके।

विरोध प्रदर्शन का स्थान बदला और पुलिस की भूमिका

अखिल गोगोई ने शुरुआत में दिसपुर में एक निश्चित स्थल पर बैठकर अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। हालांकि, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद इस प्रदर्शन के स्थल को बदलकर गणेश मंदिर के पास स्थानांतरित कर दिया गया। यह पूरा आंदोलन रायजोर दल के उस व्यापक अभियान का हिस्सा था, जिसके जरिए बाढ़ के प्रभाव के संबंध में अधिक वित्तीय सहायता, पुनर्वास और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।

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सरकार पर नाकामी और अनदेखी का आरोप

प्रदर्शन के दौरान विधायक ने असम सरकार और केंद्र सरकार दोनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ही सरकारें बाढ़ से हुई भारी तबाही से निपटने में पूरी तरह विफल साबित हुई हैं। अखिल गोगोई का यह भी कहना था कि कई प्रभावित परिवारों को अब तक वादा की गई सहायता नहीं मिल पाई है, या फिर नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें बहुत अधिक वित्तीय मदद की आवश्यकता है ताकि वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें।

प्रधानमंत्री और चुनावी प्राथमिकताओं पर सवाल

अखिल गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन जलप्रलय के बाद प्रधानमंत्री ने ऊपरी असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा नहीं किया और न ही दूरदराज के क्षेत्रों में जाकर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने न तो प्रभावित समुदायों के लिए किसी विशेष सहायता की घोषणा की और न ही इस आपदा पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कोई संदेश जारी किया।

राजनीतिक प्राथमिकताओं और उपचुनाव का मुद्दा

रायजोर दल के नेता ने आरोप लगाया कि राज्य के मंत्री, सत्ताधारी पार्टी के नेता और विधायक इस समय केवल आगामी नगांव लोकसभा उपचुनाव पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। दूसरी ओर, बाढ़ से प्रभावित आम परिवार सरकारी सहायता पाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

पार्टी की प्रमुख मांगें और भविष्य की चेतावनी

रायजोर दल ने सरकार के सामने कई स्पष्ट मांगें रखी हैं। पार्टी चाहती है कि बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक परिवार को तत्काल 15,000 रुपये से 25,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाए। इसके अलावा, जिन परिवारों के घर या संपत्ति पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की गई है। इसी प्रकार के मुआवजे की मांग प्रभावित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए भी की गई है।

सीबीआई जांच की मांग और आगामी आंदोलन की चेतावनी

अखिल गोगोई ने ऊपरी असम में आई बाढ़ के कारणों की गहराई से जांच करने और इसके लिए जिम्मेदारी तय करने के लिए सीबीआई जांच कराए जाने की भी मांग उठाई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने रायजोर दल द्वारा उठाई गई इन मांगों को पूरा नहीं किया, तो इस आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। पार्टी ने पहले ही यह घोषणा कर दी है कि यदि मांगें अनसुनी रह जाती हैं, तो आगामी 23 सितंबर को गुवाहाटी में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

सवाल-जवाब

अखिल गोगोई ने अपना उपवास कहाँ समाप्त किया?
अखिल गोगोई ने गुवाहाटी में अपना एक दिवसीय उपवास समाप्त किया।
रायजोर दल द्वारा प्रत्येक बाढ़ पीड़ित परिवार के लिए कितनी वित्तीय सहायता की मांग की गई है?
पार्टी ने प्रत्येक प्रभावित परिवार के लिए 15,000 रुपये से 25,000 रुपये की तत्काल सहायता की मांग की है।
घर और संपत्ति नष्ट होने पर कितने मुआवजे की मांग की गई है?
जिन परिवारों के घर या संपत्ति नष्ट हुए हैं, उनके लिए 10 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की गई है।
अखिल गोगोई ने किस केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की है?
उन्होंने ऊपरी असम बाढ़ के कारणों की जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग उठाई है।
यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो अगला बड़ा प्रदर्शन कब और कहाँ होगा?
मांगें पूरी न होने पर आगामी 23 सितंबर को गुवाहाटी में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की गई है।
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टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·13 दिन पहले

अखिल गोगोई का यह उपवास और ऊपरी असम बाढ़ राहत पर प्रशासनिक जवाबदेही की मांग ऐसे समय में आई है जब क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन और राजनीतिक प्राथमिकताओं के बीच टकराव तेज हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों पर चुनावी व्यस्तता के कारण अनदेखी के आरोप और सीबीआई जांच की मांग इस बात का संकेत देते हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा क्षेत्रीय राजनीति और उपचुनावों में एक बड़ा हथियार बन सकता है, जिससे प्रशासनिक नीतियों पर दबाव बढ़ेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·13 दिन पहले

अखिल गोगोई का यह उपवास और आगामी उपचुनाव का मुद्दा यह स्पष्ट करता है कि असम में बाढ़ प्रबंधन और राजनीतिक प्राथमिकताएं आमने-सामने आ गई हैं। जब तक सरकार पुनर्वास और वित्तीय मुआवजे की मांग पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक क्षेत्रीय दलों को राज्य और केंद्र सरकार को घेरने का एक प्रभावी राजनीतिक हथियार मिल गया है, जिसका असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।

Meera Joshi@meera-joshi·13 दिन पहले

अखिल गोगोई के इस विरोध प्रदर्शन से यह साफ है कि बाढ़ से उपजी यह आपदा सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि जनता के स्तर पर गहरे मनोवैज्ञानिक आघात और अविश्वास का कारण बन गई है। जब प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता नहीं मिलती, तो उनके भीतर उपजा यह रोष और निराशा जनप्रतिनिधियों के प्रति भरोसे को पूरी तरह तोड़ देता है, जिससे सामुदायिक स्तर पर मानसिक तनाव और सामाजिक असंतोष तेजी से बढ़ता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·13 दिन पहले

अखिल गोगोई द्वारा उपवास समाप्त करने के बाद इस मामले में प्रशासनिक और कानूनी जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है। ऊपरी असम बाढ़ पर सीबीआई जांच की उनकी मांग और मुआवजे के आंकड़े सरकार पर बड़ा राजनीतिक दबाव बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कानून-व्यवस्था और राजनीतिक गतिरोध का एक बड़ा केंद्र बन सकता है, खासकर आगामी उपचुनाव के माहौल में प्रशासन के लिए स्थिति संभालना चुनौतीपूर्ण होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·13 दिन पहले

अखिल गोगोई के इस आंदोलन और सीबीआई जांच की मांग से असम के वित्तीय संसाधनों और राज्य के बुनियादी ढांचे पर पुनर्निर्माण का भारी आर्थिक दबाव बढ़ गया है। 10 लाख रुपये प्रति परिवार के मुआवजे और नकद सहायता की मांग से राज्य के राजकोषीय घाटे पर असर पड़ना तय है, जिससे आगामी उपचुनावों के बीच कॉर्पोरेट निवेश और स्थानीय व्यापारिक माहौल में भी अनिश्चितता का एक नया आर्थिक पहलू जुड़ गया है।

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