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अंबिकापुर की रानी सोनी ने यूट्यूब से सीखकर शुरू किया 'स्वाद स्टेशन', बेटे के साथ मिलकर खड़ा किया कारोबारछत्तीसगढ़
18 सित॰ 2026, 7:00 am (7 दिन पहले)· 3

अंबिकापुर की रानी सोनी ने यूट्यूब से सीखकर शुरू किया 'स्वाद स्टेशन', बेटे के साथ मिलकर खड़ा किया कारोबार

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में गृहिणी रानी सोनी ने अपने बेटे के साथ मिलकर ढाई लाख रुपये की लागत से 'स्वाद स्टेशन' नाम से एक नया स्टार्टअप शुरू किया है, जहां वे डोसा, मोमोज और सैंडविच बेच रही हैं।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के नवापारा इलाके में 'स्वाद स्टेशन' नाम से एक नया फूड स्टार्टअप शुरू किया गया है। इस अनोखे उद्यम की शुरुआत एक गृहिणी रानी सोनी ने अपने बेटे के साथ मिलकर की है, जहां ग्राहकों को डोसा, मोमोज और सैंडविच जैसे लजीज व्यंजन परोसे जा रहे हैं। रानी सोनी ने अपने अब तक के जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वह लंबे समय से एक गृहणी के रूप में घर संभालती आ रही हैं और उनके दो बच्चे हैं। परिवार में पति की पेंशन से गुजर-बसर होती है, लेकिन दिनभर के खाली समय में घर पर बैठे रहना उन्हें बोरियत भरा लगता था। ऐसे में उनके बेटे ने उन्हें जीवन में कुछ नया करने और खुद का काम शुरू करने की सलाह दी, जिसके बाद उन्होंने इस खाली पड़ी दुकान में खान-पान का व्यवसाय जमाने का पक्का इरादा कर लिया।

ढाई लाख रुपये की शुरुआती लागत

इस नए स्टार्टअप को जमीन पर उतारने के लिए रानी सोनी और उनके परिवार ने करीब 2 से 2.5 लाख रुपये का निवेश किया है। इस शुरुआती बजट से दुकान की रूपरेखा तैयार की गई है और फिलहाल ग्राहकों के लिए डोसा, मोमोज, सैंडविच और तरह-तरह के शेक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। संचालकों का कहना है कि यह तो बस शुरुआत है और आने वाले दिनों में ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए मेन्यू में कई नए व्यंजनों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि लोगों को और अधिक विकल्प मिल सकें।

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यूट्यूब वीडियो से हासिल किया हुनर

सबसे दिलचस्प बात यह है कि डोसा और अन्य फूड आइटम्स तैयार करने की कोई व्यावसायिक ट्रेनिंग रानी ने नहीं ली है। उन्होंने यह पूरा हुनर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म यूट्यूब और मोबाइल पर मौजूद वीडियो देखकर खुद ही सीखा है। वह पहले भी अपने घर पर तरह-तरह के व्यंजन बनाने के नए-नए प्रयोग करती रहती थीं, और इसी घरेलू अनुभव और अभ्यास को उन्होंने अब अपने इस व्यावसायिक सफर में पूरी मेहनत के साथ इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

मेन्यू में शामिल हैं ये खास व्यंजन

फिलहाल उनकी इस दुकान पर ग्राहकों को सादा डोसा, मसाला डोसा और पनीर डोसा के अलावा स्वादिष्ट मोमोज, सैंडविच और रिफ्रेशिंग शेक परोसे जा रहे हैं। रानी का मानना है कि चूंकि उन्होंने अभी इस काम की शुरुआत ही की है, इसलिए वह धीरे-धीरे अपने काम को विस्तार देंगी और खाने-पीने की वस्तुओं की रेंज को और बढ़ाएंगी।

बेटे का मिल रहा है पूरा साथ

इस कारोबार को आगे बढ़ाने में रानी के बेटे उनका पूरा हाथ बंटा रहे हैं। उनके बेटे ने दुकान के कामकाज और डोसा बनाने की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा कि वह अपनी मां के साथ मिलकर दुकान संभालते हैं। डोसा तैयार करने की विधि के बारे में उन्होंने बताया कि इसके लिए सबसे पहले चावल और दाल को पानी में भिगोकर अच्छी तरह पीसा जाता है, जिसके बाद उस तैयार घोल को कुछ घंटों के लिए रख दिया जाता है ताकि वह फर्मेंट हो सके। इसके बाद उसमें तय मात्रा में नमक मिलाया जाता है और तवे को पूरी तरह गर्म कर उस पर करीने से डोसा तैयार किया जाता है। बेटे ने यह भी जानकारी दी कि ग्राहकों की मांग को देखते हुए दुकान के मेन्यू में बहुत जल्द इडली को भी शामिल किया जाएगा।

सवाल-जवाब

स्वाद स्टेशन की शुरुआत किसने की है?
इस स्टार्टअप की शुरुआत गृहिणी रानी सोनी ने अपने बेटे के साथ मिलकर की है।
यह दुकान कहां पर स्थित है?
यह दुकान छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के नवापारा इलाके में है।
इस स्टार्टअप को शुरू करने में कितनी लागत आई है?
इस स्टार्टअप को शुरू करने में लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये की लागत आई है।
रानी सोनी ने डोसा बनाना कहां से सीखा?
उन्होंने डोसा और अन्य व्यंजन बनाने की जानकारी यूट्यूब और मोबाइल वीडियो से सीखी है।
फिलहाल दुकान पर कौन-कौन से व्यंजन मिल रहे हैं?
दुकान पर सादा डोसा, मसाला डोसा, पनीर डोसा, मोमोज, सैंडविच और शेक उपलब्ध हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·6 दिन पहले

अंबिकापुर की रानी सोनी का 'स्वाद स्टेशन' स्टार्टअप इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे इंटरनेट और डिजिटल माध्यम अब महानगरों तक सीमित न रहकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी सूक्ष्म उद्यमों की तस्वीर बदल रहे हैं। यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म से बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के स्किल सीखना और ढाई लाख के कम बजट में पारिवारिक सहयोग से इसे कमर्शियल रूप देना डिजिटल इंडिया के जमीनी प्रभाव को दर्शाता है। आने वाले समय में ऐसे हाइपरलोकल टेक-इनेबल वेंचर्स टियर-2 शहरों में महिला आंत्रप्रेन्योरशिप और गिग इकॉनमी के दायरे को तेजी से और व्यापक बनाएंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·6 दिन पहले

अंबिकापुर की रानी सोनी का ढाई लाख रुपये के निवेश से शुरू किया गया 'स्वाद स्टेशन' स्टार्टअप भारत में टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ती सूक्ष्म-उद्यमिता का सटीक उदाहरण है। बिना किसी औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण के केवल डिजिटल माध्यमों और यूट्यूब के जरिए कौशल हासिल कर स्वरोजगार अपनाना यह साबित करता है कि आज का भारत तकनीकी पहुंच के बल पर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। आने वाले समय में यदि ये स्थानीय स्टार्टअप अपने संचालन को डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स से जोड़ते हैं, तो इनका दायरा और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर इनका प्रभाव काफ़ी व्यापक हो सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

रानी सोनी जैसे छोटे स्तर के घरेलू उद्यम भारत के सेवा क्षेत्र और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को मज़बूती देते हैं। जब गृहणियां न्यूनतम पूंजी और डिजिटल स्व-शिक्षण से आजीविका शुरू करती हैं, तो यह स्थानीय स्तर पर वित्तीय समावेशन और महिला भागीदारी का एक सशक्त मॉडल बनता है। हालांकि, दीर्घकालिक स्थिरता के लिए इन्हें आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा मानकों और आसान ऋण तक पहुंच जैसे नीतिगत समर्थन की आवश्यकता होती है, ताकि ऐसे उद्यम क्षेत्रीय विकास के स्थायी इंजन बन सकें।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

अंबिकापुर की इस खबर से महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का एक मजबूत संदेश मिलता है, जहाँ सीमित पारिवारिक आय और पति की पेंशन के सहारे के बीच महज़ ढाई लाख रुपये के निवेश से एक गृहणी ने अपने बेटे के साथ व्यावसायिक सफर की शुरुआत की है। कानूनी और प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो इस तरह के छोटे उद्यमों के बढ़ने से स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधन बढ़ते हैं, बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलता है और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। आने वाले समय में, जैसे-जैसे यह स्टार्टअप विस्तार लेगा, इसका प्रभाव स्थानीय रोजगार सृजन और महिला उद्यमियों को प्रेरित करने के रूप में देखा जा सकेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

यह स्टार्टअप दर्शाता है कि कैसे डिजिटल माध्यम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म गृहिणियों को बिना किसी औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण के आत्मनिर्भर बना रहे हैं। केवल ढाई लाख रुपये के छोटे से निवेश से शुरू हुआ यह उद्यम स्थानीय स्तर पर अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ अन्य महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार का एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करता है।

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