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अनिरुद्धाचार्य की कथा में इंटरकास्ट मैरिज पर सवाल, बोले- आधार कार्ड देखकर करना चाहिए प्रेमहरियाणा
8 सित॰ 2026, 9:28 am (14 दिन पहले)· 4

अनिरुद्धाचार्य की कथा में इंटरकास्ट मैरिज पर सवाल, बोले- आधार कार्ड देखकर करना चाहिए प्रेम

हरियाणा के करनाल में एक कथा के दौरान अनिरुद्धाचार्य ने इंटरकास्ट मैरिज और प्रेम संबंधों को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रेम केवल वासना बनकर रह गया है और शादी से पहले परिवार तथा संस्कारों पर विचार करना जरूरी है।

हरियाणा के करनाल जिले के तरावड़ी में आयोजित अनिरुद्धाचार्य की कथा के दौरान एक युवती द्वारा पूछे गए सवाल ने सबका ध्यान खींच लिया। कथा के मंच से युवती ने इंटरकास्ट लव मैरिज को लेकर सवाल किया था, जिसके जवाब में अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि प्रेम करने से पहले व्यक्ति को आधार कार्ड जरूर देखना चाहिए। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोग हैरान रह गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल भावनाओं में बहकर निर्णय नहीं लेना चाहिए, क्योंकि विवाह केवल दो लोगों का मिलन नहीं बल्कि भविष्य की पूरी सृष्टि और परिवार से जुड़ा होता है।

युवती के सवाल पर अनिरुद्धाचार्य की दो टूक

जब युवती ने अपनी बात रखते हुए पूछा कि किसी से प्रेम करना क्या कोई गुनाह है, तो इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि प्रेम में पड़ने से पहले व्यक्ति को उसके परिवार, संस्कारों और आने वाले कल के जीवन के बारे में गहराई से सोचना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज के दौर में जिसे लोग प्रेम समझते हैं, असल में वह केवल हवस और वासना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि कोई व्यक्ति सुंदर है, तो उसे चाहने वाले हजारों लोग मिल जाएंगे, लेकिन अगर कोई सांवला या साधारण है, तो उसकी तरफ कोई नहीं देखता, जो इस तथाकथित प्रेम की सच्चाई को उजागर करता है।

मां के प्रेम और त्याग का दिया हवाला

चर्चा के दौरान जब युवती ने यह दावा किया कि उसने उस युवक से बिल्कुल निस्वार्थ प्रेम किया था, तो अनिरुद्धाचार्य ने उससे सवाल किया कि क्या उसे अपनी मां का निस्वार्थ प्रेम नहीं दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि जिस मां ने नौ महीने कोख में रखकर जन्म दिया, उसका पालन-पोषण किया, उसे पढ़ाया-लिखाया और उसके हर सपने को पूरा करने के लिए अपनी पूरी जिंदगी लगा दी, उस मां के त्याग को युवती ने क्यों नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा कि बाहरी रूप-रंग और शारीरिक आकर्षण के आधार पर किसी रिश्ते को सच्चा प्यार मान लेना बड़ी भूल है, जबकि जीवन में धर्म और मर्यादा का बहुत बड़ा स्थान होता है।

मां से बातचीत करने की दी सलाह

बातचीत को आगे बढ़ाते हुए अनिरुद्धाचार्य ने युवती से उसकी मां के दांपत्य जीवन के बारे में सवाल किया। उन्होंने पूछा कि क्या उसकी मां अपने पति के साथ खुश हैं और क्या वे अपने पति से प्रेम करती हैं, जिस पर युवती ने सकारात्मक जवाब दिया। उन्होंने समझाया कि युवती की मां ने भी अपने पति के साथ जीवन बिताया, लेकिन वे अपना घर छोड़कर नहीं भागीं बल्कि परिवार को साथ लेकर चलीं। उन्होंने युवती से यह सवाल भी किया कि जब उसकी मां और पिता ने एक पारंपरिक और जिम्मेदार रास्ता चुना था, तो वह उस मार्ग पर क्यों नहीं चल सकती। इसके साथ ही उन्होंने युवती को घर वापस जाकर अपनी मां से खुलकर बात करने की सलाह दी।

संविधान और धर्म की मर्यादा पर बात

अपनी बात को समाप्त करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने और विवाह करने की पूरी आजादी देता है, लेकिन हमारे धर्म और संस्कृति में विवाह को लेकर अलग मर्यादाएं और नियम तय किए गए हैं। उन्होंने युवती से कहा कि वह अपने जीवन के रास्ते का चुनाव करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन भविष्य के बड़े फैसले हमेशा परिपक्वता, जिम्मेदारी और पूरी सोच-विचार के साथ लिए जाने चाहिए ताकि बाद में पछताना न पड़े।

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सवाल-जवाब

यह घटना कहाँ की है?
यह घटना हरियाणा के करनाल जिले के तरावड़ी में अनिरुद्धाचार्य की कथा के दौरान हुई।
युवती ने मंच से क्या सवाल पूछा था?
युवती ने अनिरुद्धाचार्य से इंटरकास्ट लव मैरिज और प्रेम करने को लेकर सवाल किया था।
अनिरुद्धाचार्य ने प्रेम के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रेम केवल वासना है और प्यार करने से पहले आधार कार्ड व परिवार के संस्कार देखने चाहिए।
अनिरुद्धाचार्य ने युवती को क्या सलाह दी?
उन्होंने युवती को घर वापस जाकर अपनी मां से बात करने और परिवार के बारे में सोचने की सलाह दी।
संविधान और विवाह को लेकर क्या बात कही गई?
उन्होंने कहा कि संविधान व्यक्ति को अपनी पसंद से विवाह की आजादी देता है, जबकि धर्म में विवाह को लेकर अलग मर्यादाएं हैं।
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