हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर एक मूक-बधिर और चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ दिव्यांग किशोरी नजमा जब अपनी पीड़ा लेकर पहुंची, तो प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक बेहद राहत भरी तस्वीर सामने आई। नजमा काफी लंबे समय से अपना आधार कार्ड बनवाने की जद्दोजहद में लगी थी, लेकिन शारीरिक अक्षमता और कागजी औपचारिकताओं के चलते उसका आधार नहीं बन पा रहा था। थक-हारकर उसके बुजुर्ग नाना हाकम अली उसे लेकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। पैरों से लाचार इस बच्ची को उसके नाना जमीन के सहारे घसीटते हुए कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर तक लाए, जिसे देखकर वहां मौजूद लोगों और अधिकारियों का दिल पसीज गया।
कलेक्ट्रेट में अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लिया
कलेक्ट्रेट परिसर में बुजुर्ग हाकम अली ने जब अपनी नातिन नजमा की बेबसी और पहचान पत्र न बन पाने की बात रखी, तो अतिरिक्त जिला कलेक्टर उम्मेदी लाल मीणा ने उनकी फरियाद को गंभीरता से सुना। मामले की जानकारी मिलते ही जिला कलेक्टर खुशाल यादव ने स्थिति की नजाकत को समझा और आधार पंजीयन से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों को सीधे कलेक्ट्रेट में ही तलब कर लिया। जिस आधार कार्ड के लिए यह परिवार महीनों से दर-दर भटकने को मजबूर था, उसे अधिकारियों की मौजूदगी में मौके पर ही तैयार करने की पूरी व्यवस्था की गई और किशोरी का कार्ड तुरंत बनवाकर सौंप दिया गया।
रेड क्रॉस सोसायटी की मदद से मिली व्हीलचेयर
प्रशासन ने केवल पहचान पत्र बनाकर ही इतिश्री नहीं की, बल्कि चलने में पूरी तरह अक्षम नजमा की दैनिक कठिनाइयों को दूर करने की पहल भी की। अतिरिक्त जिला कलेक्टर उम्मेदी लाल मीणा ने तुरंत रेड क्रॉस सोसायटी से समन्वय स्थापित किया और नजमा के लिए एक नई व्हीलचेयर मंगवाई। कलेक्ट्रेट तक घिसटते हुए आने वाली इस बेबस किशोरी को जब अधिकारियों ने अपने हाथों से व्हीलचेयर सौंपी, तो उसके और उसके बुजुर्ग नाना के चेहरे पर वर्षों की तकलीफ़ के बाद सुकून और खुशी साफ देखी जा सकती थी। अब इस सहायता के बाद उसे आने-जाने में भारी सहूलियत मिलेगी।
पेंशन और खाद्य सुरक्षा से जोड़ने की प्रक्रिया प्रारंभ
अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि पहचान पत्र बन जाने के बाद नजमा को अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों से भी वंचित न रहना पड़े। दरअसल आधार कार्ड न होने की वजह से ही वह राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में असमर्थ हो रही थी। जिला प्रशासन ने अब नजमा को दिव्यांग पेंशन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना से जोड़ने की कागजी प्रक्रिया भी तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी है। पहचान का संकट हल होते ही इन योजनाओं की औपचारिकताएं भी जल्द पूरी कर ली जाएंगी, जिससे उसे नियमित आर्थिक और खाद्यान्न सुरक्षा हासिल हो सकेगी।



















