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आपदा के बीच 490 नागरिकों की सुरक्षा को लेकर हलचल तेज, विदेश मंत्रालय ने नेपाल और तिब्बत में बचाव अभियान झोंकाभारत
28 अग॰ 2026, 12:03 am (34 दिन पहले)· 3

आपदा के बीच 490 नागरिकों की सुरक्षा को लेकर हलचल तेज, विदेश मंत्रालय ने नेपाल और तिब्बत में बचाव अभियान झोंका

पहाड़ी इलाकों में आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल में 290 भारतीय नागरिक संपर्क से बाहर हो गए हैं, जबकि चीन सीमा के पास तिब्बत क्षेत्र में 200 नागरिक फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय दोनों पड़ोसी देशों के प्रशासन और दूतावासों के साथ मिलकर राहत व बचाव कार्यों में जुटा है।

नेपाल तथा भारत-चीन सीमा से सटे तिब्बत के पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार बारिश के बाद आई भीषण बाढ़ और भयावह भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण सैकड़ों भारतीय नागरिक सीमावर्ती क्षेत्रों में फंस गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान शुरू कर दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक नेपाल के अलग-अलग दुर्गम हिस्सों में फिलहाल लगभग 290 भारतीय नागरिकों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसके साथ ही चीन के नियंत्रण वाले तिब्बत क्षेत्र में भी लगभग 200 भारतीय फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित स्थान पर लाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय दोनों पड़ोसी देशों में स्थित भारतीय दूतावासों, स्थानीय प्रशासन और टूर ऑपरेटरों के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है।

नेपाल में संपर्क से बाहर 290 भारतीयों का विवरण

नेपाल के आपदा प्रभावित इलाकों में फंसे नागरिकों का पता लगाने के लिए भारतीय मिशन हर संभव कदम उठा रहा है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, संपर्क से बाहर हुए 290 नागरिकों को मुख्य रूप से पांच अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत किया गया है। अधिकारियों की प्राथमिक चुनौती इन सभी समूहों के सटीक स्थान की पुष्टि करना है ताकि राहत सामग्री पहुंचाई जा सके और उन्हें सुरक्षित निकाला जा सके।

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इनमें पहला प्रमुख समूह बुनियादी ढांचा परियोजना से जुड़ा हुआ है। त्रिशूली-I पावर प्रोजेक्ट में कुल 73 भारतीय नागरिक कार्यरत हैं। राहत की बात यह है कि इस परियोजना के प्रमुख से भारतीय अधिकारियों का संपर्क लगातार बना हुआ है। वहां तैनात सभी कर्मचारियों की सुरक्षा और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

इसके अलावा तमिलनाडु राज्य से नेपाल यात्रा पर गए दो अलग-अलग दल भी वर्तमान में संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। इन दो समूहों में क्रमशः 37 और 49 नागरिक शामिल हैं, जिनकी कुल संख्या 86 होती है। ये सभी नागरिक निजी ट्रैवल एजेंसियों 'सम्राट ट्रैवल्स' और 'फ्लाई एवरेस्ट ट्रैवल्स' के माध्यम से नेपाल की यात्रा पर निकले थे। स्थानीय स्तर पर इन दोनों ट्रैवल एजेंसियों के प्रतिनिधियों से संपर्क साधकर यात्रियों की अंतिम लोकेशन का पता लगाया जा रहा है।

पूर्वी और दक्षिणी राज्यों के अन्य समूह भी इस प्राकृतिक आपदा के चलते विभिन्न स्थानों पर अटके हुए हैं। पश्चिम बंगाल से गए 32 नागरिकों का एक दल 'सम्राट ट्रैवल्स' के जरिए रसुवा जिले के तिमुरे क्षेत्र में गया था, जिनसे बाढ़ के बाद से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसी प्रकार, देश के विभिन्न राज्यों के 61 नागरिकों का एक संयुक्त दल 'रिचा टूर्स' एजेंसी के माध्यम से क्योंग क्षेत्र की ओर गया था और वह भी पूरी तरह संपर्क से बाहर है। इसके साथ ही केरल राज्य से नेपाल पहुंचे 33 भारतीय नागरिकों से भी फिलहाल कोई संपर्क स्थापित नहीं हो सका है। इन सभी क्षेत्रों में संचार व्यवस्था ठप होने के कारण ट्रेसिंग कार्य में चुनौतियां आ रही हैं।

तिब्बत सीमा पर फंसे 200 भारतीयों की स्थिति और स्थान

नेपाल के साथ-साथ चीन सीमा से सटे तिब्बत के इलाकों में भी भारतीय नागरिकों के फंसे होने की खबर है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि चीन सीमा के पास मौजूद करीब 200 भारतीय नागरिक पूरी तरह सुरक्षित हैं। हालांकि, भौगोलिक परिस्थितियों और रास्ते बंद होने के कारण उन्हें भारत वापस लाने के लिए तत्काल निकासी सहायता और राहत अभियानों की जरूरत है।

विदेश मंत्रालय ने तिब्बत क्षेत्र के विभिन्न स्थानों में फंसे नागरिकों की लोकेशन का विस्तृत ब्योरा जारी किया है। दारचेन नामक स्थान पर करीब 95 भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जबकि जिलोन्ग शहर में 4 नागरिक फंसे हुए हैं। इसके अतिरिक्त जुतुलफुक इलाके में लगभग 30 भारतीय नागरिकों का एक समूह मौजूद है, जो सागा क्षेत्र की तरफ आगे बढ़ रहा है। इसी मार्ग पर 60 से 70 अन्य नागरिकों का एक और दल भी सागा की ओर पैदल व अन्य माध्यमों से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। इन सभी समूहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजनयिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय की 24 घंटे निगरानी और निकासी योजना

आपदा के इस कठिन समय में फंसे हुए सभी नागरिकों की सुरक्षित वतन वापसी के लिए विदेश मंत्रालय ने बहुस्तरीय समन्वय तंत्र सक्रिय कर दिया है। नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय का नियंत्रण कक्ष नेपाल सरकार, वहां के स्थानीय नागरिक प्रशासन, संबंधित भारतीय राज्य सरकारों और टूर एजेंसियों के साथ 24 घंटे निर्बाध संपर्क बनाए हुए है।

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास की सर्वोच्च प्राथमिकता संपर्क से बाहर चल रहे सभी 290 नागरिकों के सटीक लोकेशन को जल्द से जल्द ट्रैक करना है। स्थानीय बचाव दलों और हेलीकॉप्टर सेवाओं की मदद से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने के रास्ते खोजे जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही मौसम में सुधार होता है और रास्ते साफ होते हैं, सभी फंसे हुए भारतीयों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित निकालकर भारत वापस लाया जाएगा।

सवाल-जवाब

नेपाल और तिब्बत सीमा पर कुल कितने भारतीय नागरिक प्रभावित हैं?
नेपाल में लगभग 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जबकि चीन सीमा से सटे तिब्बत इलाके में करीब 200 नागरिक फंसे हुए हैं।
त्रिशूली-I पावर प्रोजेक्ट में कितने भारतीय काम कर रहे हैं और उनकी स्थिति क्या है?
त्रिशूली-I पावर प्रोजेक्ट में 73 भारतीय नागरिक कार्यरत हैं। परियोजना प्रमुख से लगातार संपर्क बना हुआ है और उनकी स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।
तिब्बत क्षेत्र में फंसे 200 भारतीयों की लोकेशन क्या है?
दारचेन में लगभग 95, जिलोन्ग में 4, और जुतुलफुक तथा सागा की ओर बढ़ रहे समूहों में लगभग 90 से 100 भारतीय मौजूद हैं।
दक्षिण और पूर्वी भारत के कौन-कौन से राज्य के समूह नेपाल में संपर्क से बाहर हैं?
तमिलनाडु से 86 नागरिक (दो समूहों में), पश्चिम बंगाल से 32 नागरिक, और केरल से 33 नागरिक संपर्क से बाहर हैं।
फंसे हुए नागरिकों को वापस लाने के लिए विदेश मंत्रालय क्या कदम उठा रहा है?
विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, भारतीय दूतावास 24 घंटे नेपाल सरकार, स्थानीय प्रशासन और टूर ऑपरेटरों के साथ समन्वय बनाकर सभी नागरिकों की लोकेशन ट्रैक कर निकासी में लगा है।
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टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·34 दिन पहले

पहाड़ी इलाकों में आई प्राकृतिक आपदा के बीच 490 नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। विदेश मंत्रालय और दूतावासों द्वारा नेपाल के त्रिशूली-आई प्रोजेक्ट और विभिन्न टूर समूहों जैसे कि सम्राट व रिचा टूर्स के संपर्क से बाहर लोगों की सटीक लोकेशन ट्रैक करना इस बचाव अभियान का सबसे अहम चरण है। मौसम की स्थिति सुधरने और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित होने पर ही इन सभी फंसे हुए समूहों की सुरक्षित निकासी और राहत सामग्री की आपूर्ति तेजी से संभव हो पाएगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·34 दिन पहले

नेपाल और तिब्बत के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में फँसे लगभग 490 भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की आपदा कूटनीति और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता की एक बड़ी परीक्षा है। त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट और विभिन्न राज्यों से गए पर्यटकों से संपर्क साधना एक जटिल कार्य है, जिसमें स्थानीय प्रशासन और दूतावासों के बीच उच्च स्तरीय समन्वय की आवश्यकता होगी। यदि मौसम में सुधार नहीं हुआ, तो बचाव अभियानों को और अधिक तीव्र करना पड़ेगा ताकि सभी समूहों को सुरक्षित निकाला जा सके।

Neha Verma@neha-verma·34 दिन पहले

इस कठिन परिस्थिति में, जहाँ त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट के 73 कर्मचारियों और विभिन्न राज्यों से आए 417 पर्यटकों व नागरिकों की सुरक्षा दांव पर है, वहां डिजिटल संचार और लॉजिस्टिक्स का प्रभावी प्रबंधन अत्यंत आवश्यक हो गया है। विदेश मंत्रालय और दूतावासों को स्थानीय टूर ऑपरेटरों की मदद से तत्काल सटीक लोकेशन का पता लगाकर रेस्क्यू टीमों को उतारना होगा, ताकि मौसम और बिगड़ने से पहले सभी 490 नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·34 दिन पहले

इस आपदा में विदेश मंत्रालय और कूटनीतिक मिशनों की यह ज़िम्मेदार भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि नेपाल और तिब्बत के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में फंसे 490 नागरिकों की सटीक लोकेशन का पता लगाना और टूर ऑपरेटरों के जरिए संपर्क साधना इस वक्त सबसे बड़ी प्राथमिकता है। त्रिशूली-I पावर प्रोजेक्ट जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों और विभिन्न राज्यों के दलों के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि समन्वय तंत्र सक्रिय है, हालांकि मौसम की अनिश्चितता और भूस्खलन से बाधित मार्ग राहत कार्यों के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·34 दिन पहले

यह आपदा न केवल मानवीय संकट है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की संवेदनशीलता को भी उजागर करती है। त्रिशूली-I जैसी रणनीतिक परियोजनाओं और विभिन्न राज्यों से गए समूहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कूटनीतिक समन्वय और भू-स्थानिक डेटा का प्रभावी उपयोग बेहद जरूरी है। मौसम की अनिश्चितता और बाधित मार्ग इस पूरी प्रक्रिया को दीर्घकालिक और चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला और प्रशासनिक तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

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