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अरावली की वादियों में बसा श्री सिद्धदाता आश्रम, जानिए फरीदाबाद के इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल का पूरा इतिहासहरियाणा
29 अग॰ 2026, 5:42 pm (24 दिन पहले)· 2

अरावली की वादियों में बसा श्री सिद्धदाता आश्रम, जानिए फरीदाबाद के इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल का पूरा इतिहास

फरीदाबाद की अरावली पहाड़ियों में स्थित श्री सिद्धदाता आश्रम अपनी खास स्थापना और शांत माहौल के लिए जाना जाता है। इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल के निर्माण की शुरुआत साल 1989 में हुई थी और आज यहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

फरीदाबाद में अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसा श्री सिद्धदाता आश्रम आज के समय में देश भर के श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत प्रसिद्ध और आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। इस पवित्र स्थल को लेकर यहां आने वाले हर व्यक्ति के मन में गहरी श्रद्धा और विश्वास देखने को मिलता है। इस बड़े धार्मिक परिसर का इतिहास साल 1989 में इसकी स्थापना के साथ शुरू हुआ था, जब अरावली पर्वतमाला की तलहटी में तव्यास पहाड़ी के पास इस पावन भूमि का चयन किया गया था। आज यह स्थान न केवल अपनी धार्मिक महत्ता के लिए बल्कि अपने शांत, प्राकृतिक और मनमोहक परिवेश के कारण भी दूर-दूर से आने वाले पर्यटकों और भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

चमत्कारिक घटना से जुड़ी है आश्रम की स्थापना की कहानी

इस पावन आश्रम की जमीन मिलने और इसकी स्थापना के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प और अनोखी कहानी जुड़ी हुई है। विवरण के अनुसार, जून के महीने में जब भीषण गर्मी पड़ रही थी, तब महाराज जी फरीदाबाद से दिल्ली की तरफ यात्रा कर रहे थे। सफर के दौरान अचानक उनकी गाड़ी एक खास जगह पर रुक गई। उसी वक्त उन्हें वहां पानी का एक चमकता हुआ स्रोत दिखाई दिया, लेकिन जैसे ही गाड़ी रोककर उस स्थान का मुआयना किया गया, तो वहां कुछ भी नजर नहीं आया। इसके तुरंत बाद एक अव्यक्त वाणी सुनाई देने की बात सामने आई। इसी अलौकिक संकेत को आधार मानकर इस स्थान पर एक भव्य आश्रम के निर्माण का विचार आया और इसकी प्रेरणा मिली।

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कठिनाइयों को पार कर भक्तों के सहयोग से आगे बढ़ा निर्माण

जब एक बार इस स्थान पर आश्रम बनाने का दृढ़ निर्णय ले लिया गया, तो शुरुआती दौर में कई प्रकार की व्यावहारिक परेशानियों और बाधाओं का सामना करना पड़ा। हालांकि, इन चुनौतियों के आगे झुकने या काम रोकने के बजाय इसे पूरी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाया गया। धीरे-धीरे समय के साथ रास्ते की तमाम मुश्किलें अपने आप दूर होती गईं और निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली। इस महाअभियान में महाराज जी के साथ उनके समर्पित भक्तों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर पूरा सहयोग प्रदान किया। अनुयायियों ने कार सेवा के माध्यम से इस पावन निर्माण में अपना श्रमदान किया। आम लोगों की इस अथक मेहनत औरसच्चे सहयोग के परिणामस्वरूप ही धीरे-धीरे यहां एक विशाल धार्मिक परिसर का आकार लेना शुरू हुआ, जिसे आज आने वाले लोग अपनी आंखों से देख सकते हैं।

श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम के निर्माण का सफर

इस शुरुआती दौर के बाद, इसी परिसर के भीतर श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम के निर्माण का पवित्र कार्य भी आरंभ किया गया। इस भव्य धाम के निर्माण की शुरुआत वर्ष 1996 में विजयादशमी के अति पावन और शुभ दिन पर की गई थी। इस पूरे प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए महाराज जी ने लगातार कठिन परिश्रम किया और उनके साथ देश-विदेश से आए भक्तों ने भी बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया। दिन और रात की कड़ी मेहनत के बाद लगभग चार साल के अंतराल में यह अत्यंत सुंदर धार्मिक स्थल पूरी तरह बनकर तैयार हो गया। आज यह दिव्यधाम इस पूरे आश्रम परिसर की सबसे खास पहचान बन चुका है, जहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मुख्य मंदिर और पूरे प्रांगण के दर्शन करके खुद को धन्य महसूस करते हैं।

साल भर श्रद्धालुओं का तांता और साप्ताहिक भीड़

श्री सिद्धदाता आश्रम में केवल फरीदाबाद शहर से ही नहीं, बल्कि इसके आसपास के तमाम इलाकों और देश के दूर-दराज के कोनों से भी भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। यहां आने वाले भक्त मंदिर में माथा टेकते हैं, विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आम दिनों के मुकाबले मंगलवार और शनिवार के दिन इस परिसर में खासी भीड़ देखने को मिलती है, क्योंकि इन दोनों दिनों को धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा, कई परिवार अपनी नई गाड़ी खरीदने के बाद सीधे इस आश्रम में पहुंचते हैं और उसकी विशेष पूजा करवाते हैं। लोगों में इस स्थान को लेकर गहरी मान्यता है कि यहां आकर दर्शन करने से जीवन में हमेशा सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

मनोकामनाओं की पूर्ति का केंद्र और अरावली की प्राकृतिक सुंदरता

आश्रम में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की अपनी व्यक्तिगत आस्था, विश्वास और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। कई लोगों का ऐसा पक्का विश्वास है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से इस दरबार में आता है और प्रार्थना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं। लोग अपनी जीवन की विभिन्न परेशानियों, दुखों और इच्छाओं को लेकर यहां आते हैं और ईश्वर से मार्गदर्शन मांगते हैं। कई लोग तो अपने जीवन के किसी भी नए काम की शुरुआत करने से पहले भी यहां आकर आशीर्वाद लेना नहीं भूलते। आज श्री सिद्धदाता आश्रम एक बहुत ही विस्तृत भूभाग पर फैला हुआ है और इसकी भव्यता देखते ही बनती है। अरावली की पहाड़ियों के बीच इसकी स्थिति और चारों तरफ फैली हरियाली आने वाले हर शख्स को मानसिक शांति और एक अलग प्रकार का सुकून प्रदान करती है।

सवाल-जवाब

श्री सिद्धदाता आश्रम की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
श्री सिद्धदाता आश्रम का निर्माण कार्य वर्ष 1989 में शुरू हुआ था।
यह आश्रम कहाँ स्थित है?
यह आश्रम फरीदाबाद में अरावली की पहाड़ियों के बीच तव्यास पहाड़ी के पास स्थित है।
श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम का निर्माण कब शुरू हुआ था?
श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम के निर्माण की शुरुआत वर्ष 1996 में विजयादशमी के पावन दिन हुई थी।
आश्रम में सबसे ज्यादा भीड़ किस दिन होती है?
आश्रम में आम दिनों की तुलना में मंगलवार और शनिवार के दिन सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है।
आश्रम की जमीन मिलने के पीछे क्या कहानी बताई जाती है?
जून की गर्मी में यात्रा के दौरान गाड़ी रुकने पर पानी का स्रोत दिखने और एक अव्यक्त वाणी सुनाई देने को इस जगह की प्रेरणा माना जाता है।
श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम को बनने में कितना समय लगा था?
दिन-रात की मेहनत के बाद इस दिव्यधाम को तैयार होने में करीब चार साल का समय लगा था।
आश्रम में लोग नई गाड़ियों के साथ क्यों आते हैं?
कई परिवार अपनी नई गाड़ी खरीदने के बाद आश्रम में आते हैं और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उसकी पूजा करवाते हैं।
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