दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में हाल ही में आए चक्रवाती तूफान अर्नब की तबाही से अभी लोग उबर भी नहीं पाए थे कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक नया मौसमी संकट गहराने लगा है। समुद्र के ऊपर मौसमी हलचल बहुत तेज हो चुकी है और वहां बना कम दबाव का क्षेत्र लगातार अपनी ताकत बढ़ा रहा है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, यह मौसमी तंत्र रविवार तक एक पूर्ण चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है। इसके बाद इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए सोमवार शाम तक आंध्र प्रदेश के समुद्री किनारे की तरफ बढ़ने की पूरी आशंका है। यदि यह मौसमी प्रणाली पूरी तरह चक्रवात का रूप धारण करती है, तो इसका नामकरण 'मुरसु' किया जाएगा। अर्नब तूफान के कारण हाल ही में आंध्र प्रदेश के हजारों नागरिक बेघर हो गए थे और अब इस नए सिस्टम के बनने से राज्य में एक बार फिर मूसलाधार बारिश और समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों का खतरा मंडरा रहा है।
दक्षिण-पूर्वी खाड़ी में दबाव और आगे बढ़ने की दिशा
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने शनिवार को जानकारी दी कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर यह कम दबाव का क्षेत्र विकसित हुआ है। वायुमंडलीय परिस्थितियों के अनुकूल होने की वजह से यह प्रणाली पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रही है। शनिवार शाम तक इसके और अधिक मजबूत होकर एक गहरे दबाव के क्षेत्र में बदलने का अनुमान लगाया गया है। इसके बाद समुद्र की सतह से लगातार नमी सोखते हुए यह प्रणाली रविवार तक चक्रवाती तूफान का आकार ले सकती है। इस चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के विस्तृत तटीय क्षेत्रों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के यानम एन्क्लेव में अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। केवल आंध्र प्रदेश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी तमिलनाडु और केरल के भी कई इलाकों में अगले कुछ दिनों के दौरान व्यापक बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
चक्रवात का रूप लेने का पूरा घटनाक्रम
मौसम विज्ञानियों के विश्लेषण के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर वर्तमान में सक्रिय यह मौसमी ढांचा अभी प्रारंभिक कम दबाव का क्षेत्र है। अनुमान है कि शनिवार शाम तक इसकी गति और सघनता बढ़कर गहरे दबाव वाले क्षेत्र के रूप में स्थापित हो जाएगी। इसके पश्चात रविवार तक यह चक्रवाती तूफान की शक्ति हासिल कर लेगा। इस प्रणाली के सीधे आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ने का रुख दिख रहा है। वर्तमान मौसमी अनुमान के मुताबिक, सोमवार 2 नवंबर की शाम तक यह चक्रवाती तूफान तट को पार कर सकता है। हालांकि, मौसम विभाग इस संभावित तूफान की दिशा, इसके आगे बढ़ने की गति और इसकी तीव्रता पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह के बदलाव की स्थिति में समय रहते सटीक सूचना दी जा सके।
तूफान के नामकरण के पीछे की प्रक्रिया
इस संभावित चक्रवाती तूफान का नाम 'मुरसु' तय किया गया है, जिसका प्रस्ताव भारत ने अंतरराष्ट्रीय मौसम संगठन की नामकरण सूची में दिया था। तमिल भाषा के शब्दकोश में 'मुरसु' का शाब्दिक अर्थ एक पारंपरिक नगाड़ा या ढोल होता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन और बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर क्षेत्र के देशों द्वारा चक्रवातों के नामकरण के लिए पहले से ही एक तयशुदा सूची तैयार की जाती है। जैसे ही यह निम्न दबाव वाला तंत्र औपचारिक रूप से चक्रवाती तूफान का स्तर हासिल करेगा, आधिकारिक रूप से इसे मुरसु नाम से पुकारा जाएगा।
कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों के साथ-साथ पुडुचेरी के यानम क्षेत्र में भी भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के विभिन्न इलाकों में 5 नवंबर तक लगातार भारी बारिश होने का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। वहीं पश्चिमी तट पर केरल और माहे के हिस्सों में 4 नवंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है। इन अनुमानों से स्पष्ट है कि इस मौसमी तंत्र का प्रभाव केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे दक्षिण भारत के एक बड़े भूभाग के मौसम को प्रभावित करेगा।
समुद्र में तेज हवाएं और मछुआरों के लिए चेतावनी
मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश के तटवर्ती समुद्र में स्थिति बेहद प्रतिकूल और अशांत रहने की कड़ी चेतावनी जारी की है। 1 नवंबर तक तटीय आंध्र प्रदेश, यानम और रायलसीमा के क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। कुछ संवेदनशील स्थानों पर हवा के तेज झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति को भी छू सकते हैं। समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों और तूफानी हवाओं को देखते हुए समुद्र में जाने वाले मछुआरों और तटवर्ती बस्तियों में रहने वाले निवासियों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर पूरी तरह अमल करने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है।


















