शारीरिक चोटें और गंभीर मेडिकल परेशानियां अक्सर किसी भी इंसान के हौसले को तोड़ देती हैं, लेकिन राजस्थान के कोटा शहर की रहने वाली समाजसेवी श्रद्धा ठाकुर ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प के आगे हर रुकावट कमजोर पड़ जाती है। हाथ और पैर में गंभीर फ्रैक्चर का सामना करने और उसके बाद एक बड़ी मेजर सर्जरी से गुजरने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और आज वे एक बार फिर स्विमिंग पूल में पूरी ऊर्जा के साथ तैराकी कर रही हैं। शारीरिक पीड़ा और लंबे इलाज के दौर को पीछे छोड़ते हुए उनकी यह वापसी स्थानीय महिलाओं और युवाओं के लिए एक मजबूत प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।
साल 2009-10 में शुरू हुआ तैराकी का सफर
श्रद्धा ठाकुर के तैराकी सीखने की कहानी काफी दिलचस्प और स्वाभाविक रही है। इस सफर की शुरुआत साल 2009-10 में हुई थी, जब वे अपने बेटे को स्विमिंग सिखाने के लिए कोटा के नयापुरा इलाके में बने तरणताल ले जाया करती थीं। उस समय वे केवल बेटे को अभ्यास करते देखा करती थीं। इसी दौरान उनके पति अमित ठाकुर ने उन्हें प्रेरित किया कि वे भी खुद पानी में उतरें और तैराकी सीखें। पति के प्रोत्साहन और बेटे के साथ के बाद श्रद्धा ने पूल में कदम रखा। शुरुआत में समय बिताने और सीखने के मकसद से शुरू हुई यह गतिविधि धीरे-धीरे उनका गहरा शौक बनी और आगे चलकर एक बड़े जुनून में तब्दील हो गई।
ओलंपिक पूल में बेहतरीन टाइमिंग और फिटनेस
नयापुरा स्थित इस तरणताल का आकार 50 मीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ा है, जो एक मानक ओलंपिक पूल का माप है। श्रद्धा ठाकुर इस 50 मीटर लंबे पूल में फ्रीस्टाइल तैराकी की दूरी को महज़ 1 मिनट 40 सेकंड में पूरी कर लेती हैं। अपनी इस टाइमिंग और स्टेमिना के बारे में बात करते हुए वे बताती हैं कि उनकी उम्र की बहुत सी महिलाएं 25 मीटर की दूरी तैरने में ही करीब एक मिनट का समय लगा देती हैं। उनके मुताबिक तैराकी उनके लिए केवल एक शारीरिक कसरत या खेल नहीं है, बल्कि यह एक तरह का मेडिटेशन है। पानी में उतरने के बाद उन्हें मानसिक शांति और गहरा सुकून मिलता है, साथ ही उनके खाली समय का सही और सकारात्मक उपयोग भी हो पाता है।
चोटों का सिलसिला और 5 अप्रैल की बड़ी सर्जरी
पूल में शानदार प्रदर्शन तक पहुंचने की यह राह श्रद्धा के लिए कभी भी आसान नहीं रही। उनके सामने लगातार गंभीर शारीरिक रुकावटें आईं। सबसे पहले मार्च के महीने में हुए एक हादसे के दौरान उनके पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में तैराकी बंद करनी पड़ी। दो से तीन महीने के आराम और इलाज के बाद जब स्थिति में सुधार हुआ, तो मई-जून में उन्होंने दोबारा पूल का रुख किया। हालांकि किस्मत ने फिर इम्तिहान लिया और अगस्त के महीने में उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया, जिससे उनका तैराकी अभ्यास एक बार फिर पूरी तरह ठप हो गया। इसके बाद 5 अप्रैल को उन्हें एक बहुत बड़ी मेजर सर्जरी से भी गुजरना पड़ा।
डॉक्टर की सलाह और मई से दोबारा वापसी
5 अप्रैल की उस गंभीर सर्जरी के बाद का समय श्रद्धा के लिए मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। उस दौर में उन्हें खुद यह लगने लगा था कि शायद अब वे आने वाले कई सालों तक कभी तैराकी नहीं कर पाएंगी। लेकिन उन्होंने मन ही मन हिम्मत जुटाई और लगभग तीन महीने के इंतजार के बाद अपने डॉक्टर से सीधा सवाल किया कि क्या वे दोबारा तैर सकती हैं। डॉक्टर ने बिना किसी संकोच के उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा, “हाँ, बिल्कुल, आप क्यों नहीं कर सकतीं?” डॉक्टर की इस हरी झंडी और भरोसे ने श्रद्धा के भीतर नया जोश भर दिया। इसके बाद उन्होंने मई के महीने से दोबारा नियमित रूप से स्विमिंग पूल में उतरना शुरू कर दिया। वे रेखांकित करती हैं कि जहां ऐसी जटिल सर्जरी के बाद ज्यादातर लोग कई सालों तक बेडरेस्ट करते हैं, वहीं उन्होंने डॉक्टरों के मार्गदर्शन में इस चुनौती को स्वीकार किया और आज लगातार सक्रिय बनी हुई हैं।
























