अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला मंगलवार सुबह एशियाई कारोबारी सत्र में थमता नजर आया। अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल सुधरकर 95.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र में बिकवाली के भारी दबाव के चलते भाव गिरकर 94.30 डॉलर प्रति बैरल तक लुढ़क गए थे, जो 16 अक्टूबर के बाद का सबसे निचला स्तर दर्ज किया गया था। बाजार में यह सुधार ऐसे समय देखने को मिला है जब मध्य पूर्व में आठ महीनों से चल रहे संघर्ष को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
कूटनीतिक बातचीत और शांति की उम्मीदों का असर
ऊर्जा बाजारों में हालिया उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह तेहरान और वाशिंगटन के बीच परोक्ष संवाद जारी रहने की पुष्टि है। दोनों देशों के बीच पिछले आठ महीनों से जारी टकराव को समाप्त करने के मकसद से संपर्क बना हुआ है। ईरानी अधिकारियों और कतर के मध्यस्थों के बीच कई दिनों तक चली बातचीत के बाद संशोधित प्रस्ताव तैयार किए गए, हालांकि अभी तक कोई निर्णायक सफलता हाथ नहीं लगी है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वार्ता प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा,
"मध्यस्थों के जरिए विचार-विमर्श काफी तेज गति से चल रहा है।"उन्होंने रेखांकित किया कि तेहरान ने अपनी शर्तें और प्रस्ताव सामने रख दिए हैं तथा आगे की प्रगति वाशिंगटन की राजनीतिक समझदारी पर टिकी है। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी जोर देकर कहा है कि तेहरान मतभेदों और समस्याओं को बातचीत के रास्ते सुलझाना चाहता है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि वह अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पूर्व ईरान पर हमला नहीं करेंगे। इन बयानों से बाजार में यह धारणा मजबूत हुई कि वाशिंगटन कूटनीति को थोड़ा और समय देने का इच्छुक है।
जोखिम प्रीमियम घटने और विश्लेषकों का नजरिया
युद्ध की आशंकाओं के चलते कच्चे तेल में जो अतिरिक्त तेजी बनी हुई थी, उसमें अब आंशिक नरमी देखने को मिल रही है। टीडी सिक्योरिटीज में कमोडिटी रणनीति के निदेशक रयान मैकके ने बाजार की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जंग खत्म होने की उम्मीदों का सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है, क्योंकि हालिया बढ़त का बड़ा हिस्सा संभावित सैन्य टकराव के जोखिम प्रीमियम पर टिका था।
हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शांति वार्ताओं की सुर्खियों से पूरा भू-राजनीतिक प्रीमियम खत्म नहीं हो सकता। टीडी सिक्योरिटीज के अनुसार, जब तक इस टकराव का कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकलता और जहाजों तथा हूती हमलों का खतरा बरकरार रहता है, तब तक केवल कूटनीतिक चर्चाओं के आधार पर बाजार से जोखिम पूरी तरह समाप्त होना मुश्किल है। तेल और पेट्रोलियम उत्पादों में युद्ध का असर काफी गहरा रहा है, इसलिए बातचीत की प्रगति के साथ कीमतों में तेज हलचल जारी रहने का अनुमान है।
इन्वेंट्री आंकड़ों पर कारोबारियों की नजर
कूटनीतिक घटनाक्रमों के अलावा तेल कारोबारी अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी एपीआई के साप्ताहिक स्टॉक आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। मंगलवार को जारी होने वाली यह रिपोर्ट अमेरिकी बाजार में कच्चे तेल की मांग और आपूर्ति का ताजा खाका पेश करेगी। यदि स्टॉक में अनुमान से अधिक कमी आती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होगा और इससे डब्ल्यूटीआई की कीमतों को अतिरिक्त सहारा मिल सकता है। इसके विपरीत, यदि भंडारों में उम्मीद से ज्यादा बढ़ोतरी दिखती है, तो यह कमजोर खपत या अतिरिक्त आपूर्ति का संकेत देगी, जिससे कीमतों पर फिर दबाव बन सकता है।
तेल बाजार में एपीआई और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी ईआईए द्वारा जारी होने वाले साप्ताहिक भंडार आंकड़े काफी अहम माने जाते हैं। एपीआई के आंकड़े मंगलवार को आते हैं जबकि ईआईए अगले दिन अपने आधिकारिक आंकड़े जारी करता है। दोनों संस्थाओं के नतीजों में करीब 75 प्रतिशत मामलों में 1 प्रतिशत से भी कम का अंतर देखा जाता है। सरकारी एजेंसी होने के नाते बाजार में ईआईए के आंकड़ों को अधिक आधिकारिक और विश्वसनीय माना जाता है।
तकनीकी संकेत और प्रमुख कारोबारी स्तर
दैनिक मूल्य चार्ट पर नजर डालें तो डब्ल्यूटीआई अमेरिकी तेल का अल्पकालिक रुझान मजबूती का संकेत दे रहा है। भाव अपने 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए से काफी ऊपर बने हुए हैं और हालिया बोलिंजर बैंड के ऊपरी हिस्से के निकट कारोबार कर रहे हैं। हालांकि भाव बोलिंजर मिडिल बैंड के ठीक नीचे टिके हैं, जो यह दर्शाता है कि किसी नए उच्च स्तर को छूने से पहले तेजी की यह रफ्तार थोड़ी सुस्ता रही है। वहीं 48 के स्तर पर मौजूद रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई यह दर्शाता है कि गति फिलहाल तटस्थ बनी हुई है।
कारोबारी स्तरों की बात करें तो ऊपर की तरफ पहला प्रतिरोध बोलिंजर मिडिल बैंड पर 96.80 डॉलर के पास मौजूद है, जबकि इसके बाद मजबूत अड़चन 104.95 डॉलर के ऊपरी बैंड पर देखी जा रही है। गिरावट की स्थिति में मौजूदा पिवट स्तर के आसपास मांग का दायरा है। इसके बाद बोलिंजर लोअर बैंड का समर्थन 88.70 डॉलर पर और 100-दिवसीय एसएमए 85.85 डॉलर के आसपास स्थित है। विश्लेषकों का मानना है कि किसी बड़ी गिरावट की स्थिति में इन निचले स्तरों पर खरीदार दोबारा सक्रिय हो सकते हैं, जिससे लंबी अवधि का अपट्रेंड सुरक्षित बना रहेगा।
लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, पिछले बंद स्तर 104.12 डॉलर के मुकाबले 7.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ भाव 96.65 डॉलर पर दर्ज किए गए। दैनिक अस्थिरता को दर्शाने वाला एटीआर 4.45 पर है, जिसका इस्तेमाल स्टॉप-लॉस बफर के रूप में किया जाता है। तकनीकी पिवट 96.68 डॉलर पर बना है, जहां पहला प्रतिरोध 97.14 डॉलर और दूसरा 97.64 डॉलर पर आंका गया है। नीचे की ओर पहला समर्थन 96.18 डॉलर तथा दूसरा समर्थन 95.72 डॉलर पर केंद्रित है। 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच फैला हुआ है।
कच्चे तेल के बुनियादी कारक और ओपेक की भूमिका
वैश्विक ऊर्जा बाजार में डब्ल्यूटीआई तेल एक प्रतिष्ठित बेंचमार्क माना जाता है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट के अलावा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में ब्रेंट और दुबई क्रूड अन्य दो प्रमुख प्रकार हैं। डब्ल्यूटीआई को अपनी कम गुरुत्वाकर्षण और कम सल्फर मात्रा के कारण हल्का और मीठा कच्चा तेल कहा जाता है। यह उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है जिसे आसानी से परिष्कृत किया जा सकता है। इसका उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका में होता है और वितरण कुशिंग हब के जरिए किया जाता है, जिसे दुनिया का पाइपलाइन चौराहा भी कहा जाता है।
अन्य परिसंपत्तियों की तरह कच्चे तेल के भाव भी मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से तय होते हैं। मजबूत वैश्विक आर्थिक वृद्धि खपत को बढ़ावा देती है, जबकि सुस्त विकास मांग को घटाता है। इसके अलावा युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति बाधित करके कीमतों में उछाल लाते हैं। चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल का कारोबार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की मजबूती या कमजोरी भी तेल के भावों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। डॉलर कमजोर होने पर अन्य मुद्रा धारकों के लिए तेल खरीदना सस्ता हो जाता है।
तेल उत्पादक 12 देशों का समूह ओपेक भी कीमतों को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। ओपेक देशों के प्रतिनिधि साल में दो बार बैठक कर उत्पादन कोटा निर्धारित करते हैं। जब ओपेक उत्पादन में कटौती करता है तो बाजार में आपूर्ति कम होती है और कीमतें बढ़ती हैं। उत्पादन बढ़ाने पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा ओपेक प्लस में रूस सहित दस गैर-ओपेक उत्पादक देश भी शामिल हैं, जो वैश्विक आपूर्ति संतुलन को गहराई से प्रभावित करते हैं।
विदेशी मुद्रा, सोना और इक्विटी बाजार की हलचल
ईरान संघर्ष पर नरमी और आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले वित्तीय बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7000 के स्तर पर टिका रहा। बाजार को रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के नीतिगत फैसले का इंतजार है, जहां ब्याज दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत से 4.85 प्रतिशत किए जाने की प्रबल संभावना है। यदि यह बढ़ोतरी होती है तो यह 2026 की पांचवीं दर वृद्धि होगी और आधिकारिक नकद दर 18 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगी।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी के कारण डॉलर-येन जोड़ी गिरकर 158.00 के आसपास सिमट गई। बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें बढ़ाने के समय को लेकर अनिश्चितता और मुद्रा हस्तक्षेप के जोखिम के बीच यह जोड़ी सीमित दायरे में बनी हुई है। बहुमूल्य धातुओं में सोना 3,950 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर रहा, जिसने अक्टूबर 2025 के बाद के निचले स्तर से पिछले सत्र में सुधार दर्ज किया था। कमजोर डॉलर ने सोने को सहारा दिया, हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मामूली उछाल ने तेजी को सीमित रखा। इक्विटी मोर्चे पर एपल ने चौथी तिमाही में आईफोन की 57.58 अरब डॉलर की मजबूत बिक्री दर्ज कर अनुमानों को पीछे छोड़ दिया, हालांकि बेहतर नतीजों के बावजूद आफ्टर-आवर्स कारोबार में शेयर करीब 4 प्रतिशत टूट गया।



















