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अरुणाचल प्रदेश की जलविद्युत क्षमता भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य को देगी नई रफ्तार, बोले चाउना मेनअरुणाचल प्रदेश
20 सित॰ 2026, 5:35 pm (37 दिन पहले)· 3

अरुणाचल प्रदेश की जलविद्युत क्षमता भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य को देगी नई रफ्तार, बोले चाउना मेन

अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चाउना मेन ने नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में कहा कि राज्य में मौजूद 58,000 मेगावाट जलविद्युत क्षमता देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा बदलाव के लिए बेहद अहम है।

देश में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के बीच पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश एक प्रमुख ऊर्जा केंद्र के रूप में उभर रहा है। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से आयोजित 'फाइनेंसिंग इंडियाज जर्नी टुवर्ड्स अ विकसित भारत' सम्मेलन के दूसरे दिन ऊर्जा क्षेत्र पर विस्तृत चर्चा हुई। इस कार्यक्रम के 'फाइनेंसिंग एनर्जी ट्रांजिशन' सत्र को संबोधित करते हुए अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चाउना मेन ने स्पष्ट किया कि राज्य के विशाल जलविद्युत संसाधन देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने में आधारशिला साबित होंगे। उन्होंने इसे केवल राज्य का विषय न मानकर एक राष्ट्रीय रणनीतिक अवसर करार दिया, जो ग्रिड को चौबीसों घंटे स्थिर और भरोसेमंद बिजली देने में सक्षम है।

राष्ट्रीय ऊर्जा जरूरतों में अरुणाचल प्रदेश की हिस्सेदारी

अरुणाचल प्रदेश में लगभग 58,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन की आकलित क्षमता मौजूद है, जो समूचे भारत की कुल क्षमता का करीब 40 प्रतिशत बैठती है। राज्य सरकार ने स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष यानी 2047 तक 40 गीगावाट जलविद्युत क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। सौर और पवन ऊर्जा के उत्पादन में आने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने के लिए जलविद्युत की निरंतर उपलब्धता ग्रिड स्थिरता बनाए रखने में सबसे भरोसेमंद विकल्प मानी जाती है।

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क्षमता विस्तार और सुबनसिरी लोअर परियोजना का योगदान

राज्य में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बिजली उत्पादन के बुनियादी ढांचे में तेजी से प्रगति दर्ज की गई है। साल 2016 में अरुणाचल प्रदेश की स्थापित जलविद्युत क्षमता मात्र 405 मेगावाट थी, जो बाद में बढ़कर लगभग 1,200 मेगावाट तक पहुंची। इसके बाद सुबनसिरी लोअर परियोजना के चालू होने से यह आंकड़ा छलांग लगाकर 2,270 मेगावाट के स्तर पर पहुंच चुका है। बिजली उत्पादन की इस गति को बनाए रखने के लिए सरकार दीर्घकालिक रणनीतियों पर काम कर रही है।

1.9 लाख करोड़ रुपये का निवेश और रोजगार के नए अवसर

राज्य ने 'डिकेड ऑफ हाइड्रोपावर 2025–35' की कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत अगले एक दशक में 19 गीगावाट नई जलविद्युत क्षमता जोड़ने का लक्ष्य है। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये की निवेश पाइपलाइन तैयार की गई है। वर्तमान में लगभग 19,000 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाएं विकास के अलग-अलग चरणों में हैं, जिनमें से 4,880 मेगावाट पर निर्माण कार्य सीधे तौर पर चल रहा है। इस विशाल औद्योगिक विस्तार से युवाओं के लिए 30,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 16,000 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान लगाया गया है।

“लगभग 58,000 मेगावाट की आकलित क्षमता और 2047 तक 40 गीगावाट दोहन के विजन के साथ अरुणाचल प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है।”

पारेषण ढांचे और दूरदराज के इलाकों की चुनौतियां

बिजली उत्पादन संयंत्रों के साथ-साथ मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क खड़ा करना भी एक बड़ी प्राथमिकता है। अरुणाचल प्रदेश का भौगोलिक भूभाग काफी दुर्गम और दूरदराज का है, जिससे उत्पादित बिजली को राज्य के ग्रिड और अंतरराज्यीय नेटवर्क तक सुचारू रूप से पहुंचाना चुनौतीपूर्ण रहता है। इसके लिए बिजली निकासी व्यवस्था को समयबद्ध तरीके से पूरा करना अनिवार्य है। जिम्मेदार विकास, मजबूत ग्रिड नेटवर्क और वित्तीय भागीदारी से न केवल राज्य में उद्यमशीलता बढ़ेगी, बल्कि पूरे देश को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

सवाल-जवाब

अरुणाचल प्रदेश में कुल कितनी जलविद्युत क्षमता आकलित की गई है?
राज्य में लगभग 58,000 मेगावाट जलविद्युत क्षमता आकलित है, जो भारत की कुल क्षमता का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है।
अरुणाचल प्रदेश ने 2047 तक कितना बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है?
राज्य ने वर्ष 2047 तक 40 गीगावाट (GW) जलविद्युत क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया है।
वर्तमान में राज्य की स्थापित जलविद्युत क्षमता कितनी हो चुकी है?
सुबनसिरी लोअर परियोजना के चालू होने के बाद राज्य की स्थापित जलविद्युत क्षमता 2,270 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जो 2016 में मात्र 405 मेगावाट थी।
'डिकेड ऑफ हाइड्रोपावर 2025–35' योजना क्या है?
यह 10 साल की योजना है जिसके तहत 1.9 लाख करोड़ रुपये के निवेश से 19 गीगावाट नई जलविद्युत क्षमता जोड़ने का प्रस्ताव है।
इन जलविद्युत परियोजनाओं से कितने रोजगार सृजित होने की उम्मीद है?
इस क्षेत्र से 30,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 16,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है।
अरुणाचल प्रदेश में बिजली परियोजनाओं के सामने मुख्य चुनौती क्या है?
कठिन और दूरदराज का पहाड़ी भूभाग मुख्य चुनौती है, जिसके कारण बिजली को राष्ट्रीय ग्रिड तक ले जाने के लिए समय पर ट्रांसमिशन ढांचा तैयार करना जरूरी है।
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टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·36 दिन पहले

अरुणाचल प्रदेश में जलविद्युत के इस बड़े विकास का एक सीधा और सकारात्मक असर वहां की समृद्ध खाद्य संस्कृति और कृषि पर पड़ेगा। पूर्वोत्तर के इस राज्य में कीवी, संतरे और दुर्लभ जड़ी-बूटियों जैसी अनूठी ऑर्गेनिक फसलें होती हैं। बिजली की कमी के कारण अक्सर कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग इकाइयां सुचारू रूप से नहीं चल पातीं, जिससे स्थानीय खाद्य उत्पाद खराब हो जाते हैं। सतत और भरोसेमंद स्वच्छ ऊर्जा मिलने से यहां की फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को नई ताकत मिलेगी। इससे न केवल स्थानीय व्यंजनों और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को संरक्षित किया जा सकेगा, बल्कि उन्हें वैश्विक बाजार तक सुरक्षित पहुंचाने के नए रास्ते भी खुलेंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·36 दिन पहले

अरुणाचल प्रदेश का ₹1.9 लाख करोड़ का निवेश खाका भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े 'कैपेक्स साइकिल' (पूंजीगत व्यय) की शुरुआत को दर्शाता है। यह विशाल निवेश न केवल देश की ग्रिड स्थिरता को मजबूत करेगा, बल्कि बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्र के निवेशकों के लिए दीर्घकालिक अवसर भी पैदा करेगा। ग्रिड ट्रांसमिशन और दूरदराज के इलाकों की भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए, आगामी समय में वित्तीय संस्थानों और निजी पूंजी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। यह परियोजनाएं ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) निवेश को आकर्षित करने के लिए भारतीय ऊर्जा बाजार में एक गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·36 दिन पहले

रविकाश के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह विशाल पूंजीगत आवश्यकता वैश्विक जलवायु वित्त के महत्व को रेखांकित करती है। वैश्विक संस्थागत निवेशकों और ईएसजी-केंद्रित फंडों के लिए, ये परियोजनाएं दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा संपत्ति के रूप में एक बड़ा अवसर हैं। हालांकि, रणनीतिक सीमावर्ती क्षेत्र और पर्यावरण की संवेदनशीलता को देखते हुए, इतनी बड़ी परियोजनाओं के लिए मजबूत जोखिम-प्रबंधन ढांचा बेहद जरूरी होगा। विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए भारत को रणनीतिक सुरक्षा और टिकाऊ विकास के बीच सटीक संतुलन बनाना होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·36 दिन पहले

अरुणाचल प्रदेश का यह विशाल जलविद्युत रोडमैप भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए नीतिगत रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास और 1.9 लाख करोड़ रुपये के निवेश को धरातल पर उतारना एक बड़ी प्रशासनिक और नीतिगत चुनौती होगी। ग्रिड स्थिरता के लिहाज से यह बेहद जरूरी है, लेकिन सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में पारेषण (ट्रांसमिशन) नेटवर्क खड़ा करना और समय पर परियोजनाओं को पूरा करना आसान नहीं होगा। केंद्र और राज्य के बीच मजबूत नीतिगत समन्वय ही इस रणनीतिक बदलाव को सफल बना सकता है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा के साथ-साथ क्षेत्र में बड़ा ढांचागत विकास भी संभव होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·36 दिन पहले

रोहन की बात को आगे बढ़ाते हुए, इस सीमावर्ती राज्य में जलविद्युत का विकास केवल घरेलू ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूर्वोत्तर में भारत के भू-राजनीतिक हितों और जल नीति को रणनीतिक मजबूती देने का एक बड़ा माध्यम भी है। 1.9 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र और राज्य को मिलकर पर्यावरण संवेदी क्षेत्रों में त्वरित और पारदर्शी नीतिगत मंजूरी व्यवस्था बनानी होगी। रणनीतिक रूप से संवेदनशील इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का यह विकास अंततः राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास, दोनों को एक साथ सुदृढ़ करेगा।

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