राजस्थान के ऊर्जा परिदृश्य में पिछले 34 महीनों के दौरान व्यापक बदलाव देखने को मिला है, जहां पारंपरिक और नवीकरणीय दोनों क्षेत्रों में अभूतपूर्व विस्तार दर्ज किया गया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने विद्युत उत्पादन और हरित ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तेज गति से कदम उठाए हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस 34 महीने की समयावधि में राज्य की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में 10920 मेगावाट का इजाफा हुआ है. वहीं दूसरी तरफ, राज्य की भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में 28303 मेगावाट की जबर्दस्त बढ़ोतरी हासिल की गई है. इस व्यापक विस्तार का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों और ढाणियों तक निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना, किसानों को दिन के समय पर्याप्त बिजली मुहैया कराना और समूचे प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है.
बिजली उत्पादन क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि और पूर्ववर्ती कार्यकाल से तुलना
विद्युत उत्पादन क्षमता के विस्तार को लेकर राज्य सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के मुकाबले अपनी प्रगति का तुलनात्मक ब्योरा सामने रखा है. आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा सरकार के मौजूदा 34 महीनों में जो 10920 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई है, वह पिछली कांग्रेस सरकार के पूरे पांच साल के कार्यकाल में हुई वृद्धि से कहीं अधिक है. पूर्ववर्ती सरकार के पांच वर्षों के पूरे कार्यकाल में कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में महज 3958 मेगावाट की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. इस प्रकार मौजूदा सरकार के 34 महीनों का प्रदर्शन पूर्ववर्ती सरकार के पांच सालों के कुल आंकड़े से लगभग पौने तीन गुना ज्यादा बैठता है.
इसके अलावा, यदि दोनों प्रशासनों के शुरुआती 34 महीनों की परस्पर तुलना की जाए, तो मौजूदा गति पांच गुना से भी अधिक निकलती है. प्रशासन का कहना है कि बिजली उत्पादन संयंत्रों की समयबद्ध स्थापना, परियोजनाओं की सतत निगरानी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने की वजह से यह तेज रफ्तार संभव हो सकी है. इस रणनीतिक विस्तार ने प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के साथ-साथ भविष्य की जरूरतों के लिए एक मजबूत आधारशिला तैयार की है.
सौर ऊर्जा का व्यापक विस्तार और स्वच्छ ऊर्जा का नया दौर
राजस्थान देश में सर्वाधिक धूप पाने वाले भूभागों में शामिल है, और राज्य सरकार ने इस प्राकृतिक संपदा का दोहन करने के लिए सौर परियोजनाओं को शीर्ष प्राथमिकता दी है. सरकारी आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि 34 महीने के कार्यकाल के दौरान सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में कुल 28303 मेगावाट की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है. यह आंकड़ा स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की अग्रणी स्थिति को मजबूती से स्थापित करता है.
पूर्ववर्ती कांग्रेस प्रशासन के दौरान सौर ऊर्जा की गति काफी धीमी रही थी. उस दौरान शुरुआती 34 महीनों में केवल 3985 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित हो पाई थी, जबकि पूरे पांच साल के शासनकाल में यह वृद्धि 14878 मेगावाट तक ही पहुंच सकी थी. मौजूदा सरकार के 34 महीनों में हासिल किया गया 28303 मेगावाट का आंकड़ा यह दर्शाता है कि सौर ऊर्जा क्षेत्र को एक नई नीतिगत गति और संस्थागत सहयोग मिला है. स्वच्छ ऊर्जा का यह तीव्र विस्तार प्रदेश के उद्योगों और कृषि को सतत बिजली उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा रहा है.
26 जिलों के किसानों को दिन में बिजली और ग्रामीण आपूर्ति में सुधार
विद्युत ढांचे के इस सुदृढ़ीकरण का सबसे सीधा लाभ राज्य के कृषि समुदाय को मिला है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन के वक्त दो अलग-अलग ब्लॉकों में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है. पूर्व के वर्षों में किसानों को अक्सर रात के समय खेतों की सिंचाई के लिए बिजली मिलती थी, जिससे उन्हें कड़ाके की ठंड, अंधेरे और जंगली जानवरों के खतरों का सामना करना पड़ता था. दिन में बिजली मिलने से किसानों की कार्यकुशलता और जीवन की सुगमता में ठोस सुधार आया है.
सरकार का स्पष्ट मत है कि शहरों और कस्बों से लेकर सुदूर गांवों और ढाणियों तक हर नागरिक को स्थिर वोल्टेज और गुणवत्तापूर्ण बिजली मिलनी चाहिए. इसके साथ ही सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय पर बिजली व्यवस्था में गंभीर कुप्रबंधन, योजनागत लापरवाही और बिजली वितरण निगमों (डिस्कॉम्स) को भारी वित्तीय घाटे में धकेलने का आरोप भी लगाया है. वर्तमान प्रशासन का कहना है कि व्यवस्थागत सुधारों के जरिए पुरानी कमियों को दूर किया जा रहा है.
पारेषण तंत्र का सुदृढ़ीकरण: नए ग्रिड सब-स्टेशनों की स्थापना
केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसे दूरदराज के क्षेत्रों तक सुरक्षित और बिना किसी तकनीकी बाधा के पहुंचाना भी आवश्यक होता है. इसके लिए पारेषण और वितरण नेटवर्क का व्यापक स्तर पर विस्तार किया गया है. राज्य में विभिन्न क्षमताओं के सैकड़ों नए विद्युत ग्रिड सब-स्टेशन स्थापित किए गए हैं
- 400 केवी क्षमता के 2 बड़े ग्रिड सब-स्टेशन स्थापित किए गए.
- 220 केवी क्षमता के 9 ग्रिड सब-स्टेशन सफलतापूर्वक चालू किए गए.
- 132 केवी क्षमता वाले 51 ग्रिड सब-स्टेशनों का निर्माण पूरा किया गया.
- 33 केवी क्षमता के 532 सब-स्टेशन विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित किए जा चुके हैं.
इस बुनियादी ढांचे की तुलना जब पिछली सरकार से की जाती है, तो अंतर साफ नजर आता है. कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल में 400 केवी का केवल 1 ग्रिड सब-स्टेशन, 220 केवी के 5 सब-स्टेशन और 132 केवी के 38 ग्रिड सब-स्टेशन स्थापित किए गए थे. इसी प्रकार 33 केवी के स्तर पर पूर्ववर्ती सरकार ने अपने शुरुआती 34 महीनों में 477 सब-स्टेशनों की स्थापना की थी, जबकि मौजूदा सरकार ने 532 सब-स्टेशन स्थापित कर प्रसारण तंत्र को काफी अधिक सघन बना दिया है.
पीएम कुसुम योजना में राजस्थान का राष्ट्रीय स्तर पर दबदबा
कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित पीएम कुसुम योजना के क्रियान्वयन में राजस्थान ने देश भर में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 5.57 गीगावॉट विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा क्षमता सफलतापूर्वक स्थापित की जा चुकी है, जो पूरे भारत में किसी भी राज्य द्वारा हासिल किया गया सबसे बड़ा आंकड़ा है.
इस महत्वाकांक्षी पहल का सीधा लाभ राज्य के 3 लाख 78 हजार से अधिक किसानों तक पहुंचा है. योजना के माध्यम से किसानों को सोलर पंप लगाने, अपनी बंजर भूमि पर सौर संयंत्र स्थापित करके अतिरिक्त आय अर्जित करने और खेतों की सिंचाई के लिए आवश्यक बिजली की जरूरतों को आत्मनिर्भर तरीके से पूरा करने में भरपूर सहायता मिल रही है.
डिस्कॉम्स की वित्तीय सेहत में सुधार और आर्थिक प्रगति की राह
बिजली उत्पादन और नेटवर्क विस्तार के समानांतर ही राज्य की बिजली वितरण कंपनियों की माली हालत सुधारने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. सरकारी आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि घाटे में चलने वाली वितरण कंपनियां अब मुनाफे की ओर लौट रही हैं. अजमेर डिस्कॉम ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान 825 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया. वहीं जयपुर डिस्कॉम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 931 करोड़ रुपये का शानदार मुनाफा दर्ज किया है.
राज्य सरकार का मानना है कि सौर ऊर्जा, पारेषण ग्रिड और वितरण कंपनियों के वित्तीय पुनरुद्धार से बना यह मजबूत ढांचा राज्य में नए औद्योगिक निवेश को आकर्षित करेगा. निर्बाध बिजली मिलने से स्थानीय उद्योगों को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. सरकार ने इन तमाम उपलब्धियों को विकसित राजस्थान और विकसित भारत के व्यापक विजन को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर करार दिया है.


















