अरुणाचल प्रदेश में विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची पर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य कांग्रेस इकाई ने चुनावी डेटा में भारी बदलाव को देखते हुए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में जोड़े गए और हटाए गए नामों की विस्तृत जांच कराने की मांग रखी है। राजनीतिक दल का कहना है कि इस पूरी कवायद में पारदर्शिता बरती जानी बेहद आवश्यक है ताकि किसी भी योग्य नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार न छीने।
मतदाताओं की संख्या में 21 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट
संशोधन से पहले के आंकड़ों की तुलना में राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या में 21 प्रतिशत से अधिक की बड़ी कमी दर्ज की गई है। मंगलवार को सामने आई अंतिम सूची के अनुसार, अब राज्य में कुल 6.96 लाख मतदाता पंजीकृत हैं। इस प्रक्रिया के चलते पूर्व की संख्या से 1.91 लाख मतदाताओं के नाम कम हो गए हैं, जिसने राजनीतिक हलकों में चिंता पैदा कर दी है।
महिला और पुरुष मतदाताओं के आंकड़े
अंतिम सूची में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में महिला वोटरों की संख्या पुरुषों से अधिक बनी हुई है। इस समय कुल 3,52,315 महिला मतदाता और 3,43,709 पुरुष मतदाता पंजीकृत हैं। इसके अलावा राज्य में दो थर्ड-जेंडर मतदाता भी इस सूची का हिस्सा हैं। कांग्रेस का तर्क है कि आंकड़ों में इस भारी फेरबदल के पीछे के कारणों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।
प्रशासनिक चूक और दुर्गम इलाकों का मुद्दा
अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने निर्वाचन अधिकारियों से अपील की है कि नाम काटे जाने की प्रत्येक कार्रवाई कानूनी और सत्यापन योग्य आधार पर ही की जाए। पार्टी ने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक गलतियों या दूरदराज के दुर्गम इलाकों तक पहुंच की दिक्कतों की वजह से पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर नहीं होने चाहिए।
संशोधन अभियान का पूरा घटनाक्रम
राज्य भर में विशेष गहन संशोधन का कार्य 5 जून को शुरू किया गया था। इसके बाद 21 जुलाई को प्रारूप मतदाता सूची सामने रखी गई थी, जिसमें कुल 7,18,046 मतदाता शामिल थे। उस समय जारी प्रारूप के अनुसार, 6,32,871 मतदाताओं की मैपिंग स्वयं या संतान के रूप में पूरी हो चुकी थी, जबकि 85,175 वोटर बिना मैपिंग के रह गए थे।
पारदर्शिता और गोपनीयता के साथ डेटा सार्वजनिक करने की मांग
मतदाताओं की संख्या में इतनी बड़ी कटौती को देखते हुए कांग्रेस ने कहा है कि जनता के सामने विधानसभावार और श्रेणीवार आंकड़े रखे जाने चाहिए। साथ ही नाम हटाए जाने के सामान्य कारणों की जानकारी भी दी जाए, जिसमें व्यक्तिगत प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाए। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह अंतिम आंकड़ों का गहन अध्ययन करेगी और किसी भी प्रकार की विसंगति पाए जाने पर उसे निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष उठाएगी।
























