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अरुणाचल में एलएसी की सुरक्षा होगी मजबूत, चीन सीमा तक पहुंचेगी नई ग्रीनफील्ड सड़कभारत
31 अग॰ 2026, 9:49 am (31 दिन पहले)· 8

अरुणाचल में एलएसी की सुरक्षा होगी मजबूत, चीन सीमा तक पहुंचेगी नई ग्रीनफील्ड सड़क

सीमा सड़क संगठन ने अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम इलाकों में सैनिकों और भारी सैन्य उपकरणों की आवाजाही को तेज करने के लिए एक नए मेगा प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। इस 95.348 किलोमीटर लंबी सड़क के बनने से भारत की सामरिक स्थिति और अधिक मजबूत होगी।

भारत और चीन की सीमा पर सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह से सुदृढ़ करने के लिए बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन ने एक बड़ा कदम उठाया है। कुरुंग कुमे जिले के हुरी से लेकर अपर सुबनसिरी के ताकसिंग तक लगभग 95.348 किलोमीटर लंबी ऑल-वेदर ग्रीनफील्ड सड़क का निर्माण किया जाना है। इस बेहद महत्वपूर्ण परियोजना को बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अरुणांक के तहत आकार दिया जा रहा है। इसके लिए फीजिबिलिटी स्टडी और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है ताकि दुर्गम क्षेत्रों में सेना की पहुंच को निर्बाध बनाया जा सके।

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है यह मार्ग

यह नई सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम के मानकों के आधार पर बनाई जाएगी। इसके निर्माण से भारी सैन्य वाहन, तोपें और रसद सामग्री सीधे वास्तविक नियंत्रण रेखा के अग्रिम मोर्चों तक बेहद कम समय में पहुंचाई जा सकेंगी। रक्षा जानकारों का मानना है कि इससे सीमावर्ती इलाकों में भारत की रक्षात्मक स्थिति और अधिक आक्रामक व मजबूत हो जाएगी। इस 95.348 किलोमीटर लंबे मार्ग से जुड़ी जानकारियां सामने आई हैं, जो सीमा पर बुनियादी ढांचे को एक नया आयाम देने का काम करेंगी।

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ताकसिंग की भौगोलिक स्थिति और चुनौतियां

इस सड़क का महत्व केवल दो दूरदराज के क्षेत्रों को आपस में जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि ताकसिंग रणनीतिक रूप से कहां स्थित है। अपर सुबनसिरी जिले में स्थित ताकसिंग जिला मुख्यालय डपोरिजो से 200 किलोमीटर से अधिक दूरी पर भारत-चीन सीमा के पास बसा हुआ है। यह क्षेत्र लंबे समय से अरुणाचल प्रदेश के सबसे दुर्गम और कठिन पहुंच वाले हिस्सों में शुमार रहा है। हाल के वर्षों में ही यहां तक सड़क मार्ग पहुंच पाया है, लेकिन आज भी इस रास्ते पर सफर करना काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

तिब्बत सीमा से सटा हुआ है यह अग्रिम क्षेत्र

वर्तमान में नाचो और ताकसिंग के बीच मौजूद सड़क काफी संकरी और खराब स्थिति में है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई स्थानों पर सड़क इतनी तंग है कि दो वाहन एक साथ आसानी से नहीं निकल सकते, जिससे सुरक्षा बलों की आवाजाही में भी बाधा आती है। इसी समस्या के समाधान के लिए यह नया हुरी-टक्सिंग एलाइनमेंट बेहद आवश्यक हो गया है। एक नए ग्रीनफील्ड मार्ग के रूप में यह विकल्प हुरी की तरफ से ताकसिंग तक पहुंचने का एक वैकल्पिक और बेहतर मार्ग प्रदान करेगा, जिससे अग्रिम क्षेत्रों में आवागमन सुगम हो जाएगा। ताकसिंग का यह इलाका चीन के तिब्बत क्षेत्र से सटा हुआ है और वास्तविक नियंत्रण रेखा के बेहद करीब स्थित है।

सैन्य साजो-सामान की आवाजाही होगी सुगम

सीमा पर एक मजबूत और भरोसेमंद सड़क नेटवर्क यह तय करता है कि सैनिक कितनी तेजी से मोर्चा संभाल सकते हैं और अग्रिम चौकियों तक कितनी मात्रा में साजो-सामान पहुंचाया जा सकता है। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में इंजीनियरिंग और मेडिकल सहायता भी बेहद कम समय में पहुंचाई जा सकेगी। रक्षा मामलों से जुड़े एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी संकट के समय एक से अधिक सुगम मार्ग उपलब्ध होना उतनी ही अहमियत रखता है जितनी कि एक बेहतर सड़क का होना।

क्षेत्र में विकास और प्रशासनिक गतिविधियां

यह परियोजना ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब पारंपरिक गश्त वाले क्षेत्रों तक पहुंच और दावों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इससे पहले फरवरी महीने में ताकसिंग के दौरे के दौरान अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने ताकसिंग, नाचो, कोडुखा और लाइमेकिंग क्षेत्र में कई विकास कार्यों की शुरुआत की थी और विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया था। इन तमाम पहियों से सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे का विस्तार तेजी से हो रहा है।

सवाल-जवाब

हुरी से ताकसिंग के बीच बनने वाली नई सड़क की लंबाई कितनी है?
इस प्रस्तावित ऑल-वेदर ग्रीनफील्ड सड़क की कुल लंबाई लगभग 95.348 किलोमीटर है।
इस सड़क का निर्माण किस संस्था द्वारा किया जा रहा है?
इस सड़क का निर्माण बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन द्वारा अपने प्रोजेक्ट अरुणांक के तहत किया जा रहा है।
ताकसिंग क्षेत्र किस जिले के अंतर्गत आता है?
ताकसिंग अपर सुबनसिरी जिले में स्थित है और यह जिला मुख्यालय डपोरिजो से 200 किलोमीटर से अधिक दूर है।
यह सड़क किस मानक पर तैयार की जाएगी?
यह नई सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम के मानकों के आधार पर बनाई जाएगी।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य वास्तविक नियंत्रण रेखा के अग्रिम मोर्चों तक भारी सैन्य वाहनों, तोपें और रसद सामग्री की आवाजाही को तेज करना है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 दिन पहले

यह रणनीतिक बुनियादी ढांचा परियोजना केवल सामरिक पहुंच तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक निगरानी और आंतरिक सुरक्षा को भी अभेद्य बनाएगी। दुर्गम इलाकों में त्वरित सैन्य और रसद आवाजाही से राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र और अधिक सशक्त होगा, जो भविष्य की किसी भी आकस्मिक परिस्थिति से निपटने में निर्णायक साबित होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·30 दिन पहले

यह ढांचागत विकास केवल सैन्य रसद को सुगम नहीं बनाएगा, बल्कि भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों और आपूर्ति श्रृंखला को भी स्थायी स्थिरता देगा। बुनियादी ढांचे का यह विस्तार दूरदराज के पर्वतीय इलाकों में निवेश और क्षेत्रीय विकास की संभावनाओं को खोलते हुए दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा को आर्थिक सुदृढ़ता से जोड़ेगा।

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